लोगों ने देखा वलयाकार सूर्य ग्रहण
   Date22-Jun-2020

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नई दिल्ली द्य 21 जून (वा)
भारत समेत कई देशों में रविवार को सूर्य ग्रहण देखा गया। सुबह 9.16 बजे ग्रहण शुरू हुआ। भारत में यह सबसे पहले सुबह 10.01 बजे मुंबई-पुणे में दिखा। दिल्ली, राजस्थान, जम्मू और गुजरात समेत देश के कई हिस्सों में ग्रहण देखा गया। पड़ोसी देशों पाकिस्तान और नेपाल में भी ग्रहण देखा गया। अन्य देशों में ग्रहण पूरी तरह 3.04 बजे खत्म हुआ। कई जगहों पर खंडग्रास (आंशिक) सूर्यग्रहण के रूप में दिखाई दिया।
3 तरह के सूर्य ग्रहण
पूर्ण सूर्य ग्रहण- जब चंद्रमा पृथ्वी के बहुत करीब रहते हुए सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी को अपनी छाया में ले लेता है। इससे सूर्य की रोशनी पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाती है। इस खगोलीय घटना को पूर्ण सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
वलयाकार सूर्य ग्रहण- इस स्थिति में चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में तो आता है लेकिन दोनों के बीच काफी दूरी होती है। चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को नहीं ढंक पाता है और सूर्य की बाहरी परत ही चमकती है। जो कि वलय यानी रिंग के रूप में दिखाई देती है। इसे ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं। खंडग्रास सूर्य ग्रहण- इस खगोलीय घटना में चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में इस तरह आता है कि सूर्य का थोड़ा सा ही हिस्सा अपनी छाया से ढंक पाता है। इस दौरान पृथ्वी से सूर्य का ज्यादातर हिस्सा दिखाई देता है। इसे खंडग्रास सूर्य ग्रहण कहते हैं। जयपुर की वेधशाला के पूर्व अधीक्षक ओपी शर्मा का कहना है कि खगोल विज्ञान के अनुसार, लगातार 3 ग्रहण होना आम बात है। ये सामान्य खगोलीय घटना ही है। खगोल गणना के अनुसार 18 साल में करीब 70 ग्रहण हो सकते हैं। इस तरह एक साल में दोनों तरह के 7 ग्रहण होना संभावित है। लेकिन, 4 से ज्यादा ग्रहण बहुत ही कम देखने को मिलते हैं। इस तरह लगातार तीन ग्रहण की स्थिति हर 10 साल में करीब 2 या 3 बार बन जाती है।