स्थिति से निपटने हेतु सेना को 500 करोड़
   Date22-Jun-2020

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लद्दाख सीमा विवाद पर सरकार सख्त
नई दिल्ली द्य 21 जून (वा)
चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनातनी के बीच भारत सरकार ने तीनों सेनाओं के लिए 500 करोड़ रुपए तक हथियार खरीदने की छूट दी है। एक समाचार एजेंसी के मुताबिक, एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया- तीनों सेना के वाइस चीफ को आवश्यक हथियारों की फास्ट ट्रैक प्रोसिजर के तहत हथियार उपकरण खरीद के लिए 500 करोड़ रुपए दिए गए हैं। पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों की तरफ से अतिक्रमण और जिस तरह से उसने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बड़ी तादाद में सैनिकों को तैनात किया है। इसके बाद से लगातार सेनाओं की तरफ से सरकार को इसकी जरूरत महसूस कर रही थी। इसी तरह की वित्तीय खरीद की छूट सुरक्षा बलों को उरी हमले और पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट हवाई हमले के बाद दी गई थी। वायुसेना को सरकार की तरफ से दी गई इस छूट का सबसे ज्यादा फायदा मिला, जिसने बालाकोट के बाद स्पाइस-2000 एयर टू ग्राउंड मिसाइल, स्ट्रम अटाका एयर टू ग्राउंड मिसाइल समेत कई रक्षा उपकरणों की खराददारी की। भारतीय सेना ने इजरायली एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल के साथ ही अमेरिका से हथियारों की खरीद की।
भारतीय सेना को इस तरह के फंड देने का मुख्य मकसद किसी भी चुनौती के मुकाबले के लिए शॉर्ट नोटिस पर खुद को तैयार करना है।
राजनाथ ने की स्थिति की समीक्षा
पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ एक महीने से भी अधिक समय से चले आ रहे गतिरोध के बीच रक्षा मंत्री राजनाथसिंह ने आज यहां चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ स्थिति की समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार रूस में विक्टरी डे परेड कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सोमवार को रूस रवाना होने से पहले श्री सिंह ने लद्दाख में जमीनी हालात और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सेना की तैयारियों का जायजा लिया। तीनों सेनाओं के प्रमुखों से कहा गया कि सेनाएं चौकस और सतर्क रहें तथा थल, जल और हवाई सीमा पर चीनी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कुछ जगहों पर अतिक्रमण की चीन की नापाक कोशिशों के कारण गत पांच मई से क्षेत्र में सैन्य गतिरोध बना हुआ है। इसी गतिरोध के दौरान दोनों ओर के सैनिकों में गत 15 जून की रात हिंसक झड़प हुई। चीन ने सोची-समझी योजना और साजिश के तहत इस झड़प को अंजाम दिया, जिसमें एक कर्नल सहित सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद से ही दोनों देशों ने इस क्षेत्र में सैन्य जमावड़ा बढ़ा रखा है और सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है।
श्री सिंह लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के घटनाक्रम पर बराबर नजर रखे हुए हैं और वह समय-समय पर शीर्ष सैन्य नेतृत्व के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा करते रहे हैं।