संत टॉल्स्टॉय
   Date22-Jun-2020

prernadeep_1  H
प्रेरणादीप
सं त टॉल्स्टॉय एक दिन रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म पर खड़े थे। एक युवती ने उन्हें कुली समझकर कहा- 'जरा यह सामान उठाकर उस प्लेटफॉर्म पर रख आओ। मैं तुम्हें दो रूबल दूंगी।Ó टॉल्स्टॉय ने सामान उठाया और उसे दूसरे प्लेटफॉर्म पर रखकर आ गए। महिला ने उन्हें दो रूबल थमा दिए और ट्रेन की प्रतीक्षा करने लगी। इसी बीच उस महिला के शिक्षक रह चुके एक व्यक्ति वहाँ पहुँचे। उन्होंने टॉल्स्टॉय को देखते ही उनका अभिवादन किया और बोले- 'मैं आपके जैसे प्रख्यात लेखक से मिलकर स्वयं को कृतकृत्य अनुभव कर रहा हूँ।Ó
वह युवती समझ गई कि जिन्हें वह कुली समझ रही थी, वे कोई बड़ी विभूति हैं। उसने अपने शिक्षक को प्रणाम करके उनसे पूछा कि ये सज्जन कौन हैं? उनके शिक्षक ने उसे बताया कि वे प्रसिद्ध साहित्यकार टॉल्स्टॉय हैं। शिक्षक के परिचय देते ही वह युवती अपने पूर्व व्यवहार पर स्वयं को बहुत लज्जित महसूस करने लगी और टॉल्स्टॉय से क्षमा माँगते हुए बोली- 'मैंने आपको अकारण ही कष्ट दिया। कृपया वो दो रूबल मुझे वापस दे दीजिए। मैं आगे से अपना कार्य स्वयं करूँगी।Ó टॉल्स्टॉय बोले- 'बहन! आप अपना कार्य स्वयं करेंगी, यह तो अच्छी बात है, परंतु मैं आपको ये रूबल लौटाने वाला नहीं हूँ; क्योंकि ये मेरे परिश्रम की कमाई है।Ó वह युवती उनकी इस सरलता, सादगी व परिश्रमशीलता के समक्ष नतमस्तक हो गई।