कोरोनाकाल और राहतों का दायरा...
   Date23-May-2020

vishesh lekh_1  
वैश्विक महामारी नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) के कारण दुनिया में अब तक 51 लाख से अधिक लोग संक्रमण का शिकार हो चुके हैं...भारत में ही कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा सवा लाख के करीब पहुंचने वाला है.., लेकिन इस बीच देश में संकटकालीन स्थिति के साथ कुछ राहतों का दायरा लगातार बढ़ता भी नजर आ रहा है...यह संकट से लड़कर उभर आने की भारत की वह आत्मिक शक्ति है, जिसके लिए उसे विश्व में पहचान मिली हुई है...जिस देश में एक लाख से अधिक कोरोना संक्रमित हो और उससे आधे कोरोना संक्रमितों में उपचार के बाद घातक वायरस हो हरा दिया हो, यह दुनिया के लिए भारत के संदर्भ में किसी आश्चर्य से कम नहीं है..,क्योंकि जो दवाई, चिकित्सकीय संसाधन भारत में उपलब्ध हैं, उसकी तुलना में अमेरिका से लेकर यूरोपीय देशों यहां तक कि चीन भी एक कदम आगे है.., लेकिन कोरोना से निपटने में भारत की हर रणनीति कारगर नजर आ रही है...एक तरफ पूरे देश में चौथे चरण की तालाबंदी का पहला सप्ताह पूर्ण होने को है तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने मई के अंतिम सप्ताह से कुछ निर्णय जून के प्रथम सप्ताह से लागू करके राहत का दायरा तेजी से बढ़ाने का संकेत कर दिया है...पूरे देश में घरेलू उड़ानें 25 मई से प्रारंभ हो जाएंगी, जिसके लिए सरकार ने बकायदा पूरी तैयारी के साथ योजना को सामने रख दिया है... तीन महीने तक हवाई किराया स्थायी रखने के साथ हवाई उड़ानों के मार्गों को 7 श्रेणियों में बांटकर कोरोना के कहर से बचने की पूरी व्यवस्था का खाका खींचा है...यह भारत सरकार की उस आत्मविश्वास का ही प्रमाण है, जिसमें वह कोरोना जैसे संकट से लड़ते हुए भी देश की आर्थिक गतिविधियों को निरंतर गतिमान रखने का साहस दिखा रही है...इसमें देशवासियों के सहयोग की अब बड़ी जरूरत है...क्योंकि सरकार ने सिर्फ अमीरों के लिए माने जाने वाली हवाई यात्रा को ही अनुमति नहीं दी है, बल्कि 1 जून से 200 ट्रेनें चलाने की रणनीति को भी अंतिम रूप दे दिया है और यह देश के उस विश्वास का सबसे बड़ा सबूत है कि शुक्रवार शाम तक साढ़े 4 लाख से अधिक टिकट बुक हो चुके हैं...वहीं केंद्र सरकार वंदे भारत मिशन के पहले चरण को सफलतापूर्वक लागू करके 17 दिनों में 20 हजार भारतीयों को विदेशों से निकालने में सफल रही है...कहने का तात्पर्य यह है कि कोरोना संकट से लड़ते हुए किस तरह से अपने सामान्य जीवन की गतिविधियों, राष्ट्रीय आवश्यकताओं एवं आर्थिक चहल-कदमी को निर्बाध रखना है, इसकी झलक सरकार की प्रत्येक नीति व निर्णय में देखने को मिल रही है...यह संकट का दौर है, लेकिन सरकार ने बिना घबरोय लोगों में हड़बड़ाहट न मचे, इसका विश्वास जगाते हुए कड़े फैसले लेकर इस बात का संकेत स्पष्ट रूप से किया कि सरकार हर संकट में देशवासियों के साथ खड़ी है और राहतों का दायरा यूं ही बढ़ता रहेगा...
दृष्टिकोण
चिकित्सकीय साधनों का उत्पादन ...
आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है...यह कथन तो हमने कई बार रोजमर्रा के जीवन में सुना, लेकिन कोरोना के इस भयावह संकटकाल में किस तरह से अनेक बातें देश के लिए अवसर के रूप में आकर खड़ी हो गई, इसका अनुमान हमें अब होने लगा है...विचार कीजिए देश में 22 मार्च को जनता कफ्र्यू लागू हुआ था और उसके बाद तालाबंदी का पहला चरण शुरू हुआ, तब तक देश में कोरोना से लडऩे वाले चिकित्सकीय संसाधनों की भारी कमी ही यहां तक कि हमें विदेशों से आयात करना पड़ रहा था...इन दो माह में अब स्थिति इसके उलट हो चुकी है...आज देश में प्रतिदिन 3 लाख से अधिक पीपीई किट का निर्माण किया जा रहा है...जबकि 3 लाख से अधिक एन-95 मास्क का भी उत्पादन निरंतर जारी है...केंद्र सरकार ने अब तक केंद्रशासित प्रदेशों व अन्य राज्यों में 65 लाख पीपीई किट एवं 7 लाख मास्क के वितरण का रिकार्ड भी कायम कर दिया है...आज देश में प्रत्येक अस्पतालों में कोविड-19 से लडऩे के लिए उपचार संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सकी है...भारत ने अपने प्रौद्योगिकी एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के जरिए वेंटीलेटर से लेकर कोरोना से लडऩे वाली चिकित्सकीय संसाधनों की उत्पादन गति को तेज किया है...इस मान से देखें तो जिस संक्रमण के प्रारंभकाल में भारत ने उपचार साधनों को लेकर लगातार पक्ष-विपक्ष के साथ ही चिकित्सा जगत एवं जनता भी चिंता जता रही थी, उन्हीं सवालों के जवाब अब भारत की इस आत्मनिर्भर पहल के जरिए मिल रहे हैं... कोरोना से लडऩे की रणनीति भारत के अंदर हर स्तर पर काम कर रही है, फिर चाहे वह चिकित्सकीय संसाधनों की उपलब्धता हो या फिर कोरोना जांच के लिए बढ़ाई जा रही नमूनों की संख्या का विषय हो, तभी तो भारत में कोरोना से स्वस्थ होने की दर विश्व में सर्वाधिक 40 प्रतिशत हो चुकी है...