प्रभु का संदेश
   Date23-May-2020

prernadeep_1  H
प्रेरणादीप
राम गंभीर हुए, कहा...! राम क्या रावण का वध करने आया है?...अरे रावण का वध तो लक्ष्मण अपने पैर से बाण चलाकर कर सकता है। राम हजारों कोस चलकर इस गहन वन में आया है तो केवल तुमसे मिलने आया है माते, ताकि हजारों वर्षों बाद जब कोई पाखंडी भारत के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा करे तो इतिहास चिल्लाकर उत्तर दे कि इस राष्ट्र को क्षत्रिय राम और उसकी भीलनी मां ने मिलकर गढ़ा था। जब कोई कपटी भारत की परम्पराओं पर उंगली उठाये तो काल कहे कि यह एकमात्र ऐसी सभ्यता है, जहां एक राजपुत्र वन में प्रतीक्षा करती एक दरिद्र वनवासिनी से भेंट करने के लिए चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार करता है। राम वन में बस इसलिए आया है ताकि जब युगों का इतिहास लिखा जाए तो उसमें अंकित हो कि सत्ता जब पैदल चलकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, तभी वह रामराज्य है। राम वन में इसलिए आया है ताकि भविष्य स्मरण रखे कि प्रतिक्षाएं अवश्य पूरी होती हैं। सबरी एकटक राम को निहारती रही। राम ने फिर कहा-राम की वन यात्रा रावण युद्ध के लिए नहीं है माता! राम की यात्रा प्रारंभ हुई है भविष्य के लिए आदर्श की स्थापना के लिए। राम आया है ताकि भारत को बता सके कि अन्याय का अंत करना ही धर्म है।