जनसेवा व कुशल प्रबंधन का पर्याय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
   Date23-May-2020

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विष्णु चौधरी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऐसी पवित्र गंगा धारा है, जो न केवल पवित्रता व समरसता फैलाती है अपितु मानवमात्र की सेवा और विश्व बंधुत्व का संदेश भी देती है। संघ ने न केवल भारत में बल्कि दूसरे देशों में भी अपनी नि:स्वार्थ सेवा, कुशल प्रबंधन व प्रशासकीय क्षमताओं के नए मानक स्थापित किए हैं। बगैर किसी प्रसिद्धि पाने की चाह, मानवता की सेवा, सरकार को हर मोर्चे पर त्वरित व स्वस्फूूूूर्त सहायता करना संघ के डीएनए में है। इसीलिए कोरोना के इस विकट दौर में भी संघ के स्वयंसेवक गरीब मजदूरों को भोजन पहुंचाने, अस्पतालों की साफ-सफाई व स्थानीय प्रशासन को प्रशासकीय मदद देने में कभी पीछे नहीं रहे।
सामाजिक सरोकारों को लेकर संघ की बढ़ती स्वीकार्यता का ही परिणाम है कि उत्तरप्रदेश के प्रयागराज के रहने वाले एक मुस्लिम परिवार की बेटी की मानवीय मदद संघ परिवार ने की। इंदौर के एक निजी कॉलेज में पढऩे वाली यह बालिका तालाबंदी के कारण इंदौर में फंस गई। बाद में उसे 29 मार्च को प्रयागराज जाने की सरकारी अनुमति मिली, परन्तु किसी प्रशासनिक पेचीदगी के कारण यह अनुमति स्वत: रद्द हो गई। जब संघ परिवार को सारे मामले की जानकारी मिली तो छात्रा को इंदौर के महालक्ष्मी नगर के स्वयंसेवकों द्वारा आवश्यक वस्तुएं भिजवाई गईं, सुबह-शाम खाना पहुंचाने की व्यवस्था की गई और उसकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई।
संघ के लाखों स्वयंसेवकों ने तालाबंदी के पहले चरण 2 अप्रैल तक दस हजार से अधिक स्थानों पर दस लाख से अधिक परिवारों तक भोजन, दवाइयां व अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करवाई थीं। कोरोनाकाल के प्रारंभिक दिनों में जहां इस सेवाकार्य में लगे स्वयंसेवकों की संख्या एक लाख के आसपास थी, वहीं वह बढ़कर अप्रैल के तीसरे हफ्ते तक ढाई लाख तक पहुंच गई और अब तक तो इन मानवता के सेवकों की संख्या साढ़े तीन लाख से भी अधिक हो गई है। विश्वस्त जानकारी के अनुसार देश में ही 68300 स्थानों पर पच्चीस अलग-अलग प्रकार के सेवा कार्य संघ द्वारा निष्पादित किए जा रहे हैं। संघ व उसके आनुषांगिक संगठनों द्वारा अब तक तीन करोड़ अठारह लाख से अधिक भोजन के पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही पचास लाख से अधिक परिवारों को राशन की थैलियां उपलब्ध करवाई गई हैं, जिसमें आटा, चावल, एक किस्म की दाल व आलू-प्याज होता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए 21 लाख पच्चीस हजार लोगों को आयुर्वेदिक काढ़ा और कोरोना वायरस से बचने के लिए 44 लाख 60 हजार मास्क बांटे गए। संघ परिवार के सौजन्य से देशभर में विभिन्न स्थानों पर रक्तदान शिविर लगाए गए, जिनमें 22400 स्वयंसेवकों ने रक्तदान किया। इंदौर शहर से चलाई जाने वाली रेलों के कुशल परिचालन के लिए पिछले दिनों नगर के 35 स्वयंसेवकों ने अपनी सेवाएं दीं। संपूर्ण मेडिकल जांच के बाद स्वयंसेवकों ने रेलवे स्टेशन पर विभिन्न जिम्मेदारियां संभाली । प्रशंसनीय बात यह है कि इन सेवा कार्यों के लिए तीस और पचास वर्ष के बीच की आयु के स्वयंसेवकों की ही सेवाएं ली जा रही हैं। पचास पार कर चुके स्वयंंसेवको को कोरोना वायरस से संक्रमण का अधिक खतरा होने के कारण उन्हें नम्रतापूर्वक मना कर दिया जाता है। ऐसे सामाजिक सरोकार और वरिष्ठों के प्रति ऐसा सम्मान और कहां देखनेे को मिलता है।
सब्जी मंडियों में होने वाली भीड़ से शारीरिक दूरी बनाए रखना लगभग असम्भव होता है। इसका साफ-सुथरा समाधान संघ ने नासिक में ढूंढा। किसानों और सब्जी क्रेता नागरिकों की बीच कड़ी बनकर स्वयंसेवकों ने भोंसला मिलिट्री स्कूल के आसपास के करीब दस कॉलोनियों के निवासियों के नंबर इक_ा कर एक वाट्सएप ग्रुप बनाया। प्रतिदिन इस ग्रुप पर अगले दिन उपलब्ध हो सकने वाली सब्जी और उसके संभावित दाम डाल दिए जाते हैं। इसी ग्रुप पर ग्राहक अपनी वांछित सब्जी व उसकी मात्रा डाल देता है। अगले ही दिन शारीरिक दूरी का पूर्ण ध्यान रखते हुए एक लोडिंग वाहन से ग्राहक को उसकी पसंद की सब्जी उसकी सोसायटी पर पहुंचा दी जाती है। वरिष्ठ नागरिकों के आग्रह पर सब्जी उनके घरों तक भी पहुंचाई जाती है। इस पूरी योजना के क्रियान्वयन के लिए स्वयंसेवकों ने कड़ी मेहनत की। उन्होंने नासिक के गिरनारे गांव के 35 किसानों से इस संबंध मे बात की। इस योजना से एक पंथ, दो नहीं, तीन काज हुए - किसान चिंतामुक्त, संघ संतुष्ट और जनता खुश। इन सभी दैवीय कार्यों में संघ को सेवा भारती, विद्या भारती, भारतीय मजदूर संघ, वनवासी कल्याण आश्रम, अभाविप, भारतीय किसान संघ व हिंदू जागरण मंच आदि संगठनों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। जम्मू-कश्मीर राज्य में कोरोना से कराह रहे लोगों तक आवश्यक वस्तुएं, दवाइयां, साबुन, राशन सामग्री व अन्य जरूरी सरकारी मदद संघ व उसके सहयोगी संगठन के सदस्य बेखौफ होकर पहुंचा रहे हैं। संघ की विश्वसनीयता व स्वीकार्यता के कारण ही इसमें कुछ मुस्लिम युवक व सेवा भारती में मुस्लिम युवतियां भी शामिल हैं। श्रीनगर, बडग़ाम, बारामूला व हंदवाड़ा में ये स्वयंसेवक सेवा कार्यों में दिन-रात लगे रहते हैं। सेवा भारती से जुड़ी मोबिना बेगम बेझिझक होकर कहती हैं कि वे सेवा भारती से जुड़ी हैं, क्योंकि मानवता व वतन की सेवा करना उनका मकसद है। बारामूला के गुलाम मोहम्मद का मानना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व उससे जुड़े संगठनों को कश्मीर के अलगाववादी और जिहादी तत्व मुसलमानों का दुश्मन साबित करने में लगे रहते हैं, जबकि ऐसा सोचने वालों की आंखों पर धर्मांधता की पट्टी पड़ी हुई है। जनसेवा में कभी पीछे नहीं रहने वाले संघ की प्रशासनिक कुशलता व प्रबंधकीय निपुणता भी उत्कृष्ट है। अप्रैल माह में तो संघ ने इतिहास ही रच दिया। संघ ने स्थानीय प्रशासन को सहयोग करते हुए अपनी प्रतिदिन लगने वाली शाखाएं निरस्त कर दीं, परंतु शाखा लगाने का उत्साह कम नहीं हुआ। 19 अप्रैल रविवार को संघ से जुड़े तीन करोड़ से अधिक पुरुष, महिलाओं व बच्चों ने अपने-अपने घरों पर ही शाखा लगाई। 50 लाख से अधिक परिवारों में संध्या 5.30 बजे 'नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिंदू भूमे सुखवं वर्धितोहमÓ गुंजायमान हो गया। घर परिवारों के ऐसे सदस्य जो पहले कभी शाखा नहीं गए थे, उनके लिए यह सुखद आश्चर्य से परिपूर्ण अनुभव था। घरों पर ही शाखा लगाकर संघ ने चरित्र निर्माण, संस्कारों का प्रसार व नेतृत्व क्षमता सुनिश्चित करने का भागीरथी प्रयास किया। अपनी गतिविधियों को विस्तार देते हुए संघ ने भी हाईटेक की राह अपनाकर स्काइप और विभिन्न एप के माध्यम से शाखा लगानी प्रारंभ कर दी है। संघ ने कुछ वर्गों की सुविधा का ध्यान रखते हुए साप्ताहिक शाखा भी शुरू कर दी है, जिसे 'मिलनÓ कहते हैं। संघ ने इस विकट दौर में कोरोना योद्धाओं को आदरांजलि अर्पित कर उनका हौसला भी बढ़ाया। इटारसी में स्वयंसेवकों ने सामाजिक समरसता का परिचय देते हुए पूरी आत्मीयता के साथ स्वच्छता सेनानियों के पैर धोकर आभार प्रकट किया। अलवर में भी स्वयंसेवकों ने स्वच्छता सेनानियों के चरणवंदन किए। यह अलग बात है कि संघ के इन सम्मान कार्यक्रमों का प्रत्यक्ष व सार्थक परिणाम कम हो, लेकिन इस भीषण गर्मी में अपनी जान हथेली पर रखकर कोरोना से लड़ाई में अपना सुख-शांति, हंसी-खुशी त्याग देन वालों को इससे उत्साह भरी संजीवनी जरूर मिलती है। इसी प्रकार स्थान-स्थान पर स्वास्थ्यकर्मियों का संगीतमय बैंड के साथ अभिनंदन किया गया और उन पर पुष्पवर्षा की गई। संघ के बढ़ते जनाधार से चिंतित होकर कई बार केंद्र व प्रदेश में पूर्ववर्ती गैर भाजपा सरकारों ने इस पर प्रतिबंध लगाने का असफल प्रयास किया, जबकि वे स्वयं जानते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतीय जनमानस में अंदर तक पैठ कर चुका है, क्योंकि संघ की जड़ें राष्ट्रवाद की हैं, जिन्हें हिंदुत्व, परोपकार, सकारात्मकता, रचनात्मकता व मानवता ने सींचा है, इसलिए संघ के वृक्ष को हिला पाना सम्भव नहीं है।