शांति से संभव प्रभु चेतना का अनुभव
   Date23-May-2020

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धर्मधारा (भाग-3)
विचार नींद का हिस्सा है. जितना सोया हुआ आदमी, उतने ज्यादा विचार उसके भीतर चक्कर काटने हैं। जितना जागा हुआ आदमी, उतना भीतर साइलेंस और मौन आना शुरू हो जाता है, विचार बंद हो जाते हैं। पहला तीन महीने में उसे स्पष्ट दिखाई पड़ा था कि धीरे-धीरे विचार कम होते गए, कम होते गए, फिर धीरे-धीरे विचार समाप्त हो गए। सिर्फ सावधानी रह गई, होश रह गया, अवेयरनेस रह गई। दो चीजें एक साथ कभी नहीं रह सकती; या तो विचार रहता है या होश रहता है। विचार आया तो होश गया। जैसे बादल घिर जाएं तो सूरज ढंक जाता है, बादल हट जाएं तो सूरज प्रकट हो जाता है। विचार मनुष्य के मन के बादलों की तरह घेरे हुए हैं। विचार घेर लेते हैं, होश दब जाता है। विचार हट जाते हैं तो होश प्रकट हो जाता है। पहले तीन महीने में उसे अनुभव हुआ था कि विचार क्षीण हो गए, कम हो गए। दूसरे तीन महीने में एक और नया अनुभव हुआ... रात में जैसे-जैसे होश बढ़ता गया, वैसे-वैसे सपने ड्रीम्स कम होते गए। तीन महीने पूरे होते-होते जागरण रात में भी बना रहने लगा, तो सपने बिल्कुल विलीन हो गए, नींद स्वप्नशून्य हो गई। दिन विचार शून्य हो जाए, रात स्वप्नशून्य हो गई तो चेतना जागी। तीन महीने पूरे होने पर उसके गुरु ने कहा- दूसरा पाठ पूरा हो गया। उस राजकुमार ने कहा- तीसरा पाठ क्या हो सकता है ? जागने का पाठ भी पूरा हो गया, नींद का पाठ भी पूरा हो गया। गुरु ने कहा- अब असली पाठ शुरू होगा। कल से मैं असली तलवार से हमला करूंगा... अब तक तो लकड़ी की तलवार थी। उस राजकुमार ने कहा- आप क्या कह रहे हैं? लकड़ी की तलवार तक गनीमत थी.....,चूक भी जाता था तो भी कोई खतरा नहीं था, अब असली तलवार... गुरु ने कहा कि जितना चैलेंज, जितनी चुनौती चेतना के लिए खड़ी की जाए, चेतना उतनी ही जागती है। जितनी चुनौती हो चेतना के लिए, चेतना उतनी सजग होती है। तुम घबराओ मत। असली तलवार तुम्हें और गहराइयों तक जगा देगी। और दूसरे दिन सुबह से असली तलवार से हमला शुरू हो गया। सोच सकते हैं आप, असली तलवार का ख्याल ही उसकी सारी चेतना की निद्रा को तोड़ दिया होगा। भीतर तक, प्राणों के अंतस तक वह तलवार का स्मरण व्याप्त हो गया। (क्रमश:)