अम्फान को लेकर तैयारी...
   Date21-May-2020

vishesh lekh_1  
महाचक्रवात अम्फान का असर पश्चिम बंगाल, ओडिशा के साथ ही भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में दिखने लगा है... प्राकृतिक आपदाओं फिर चाहे तूफान, चक्रवात, भारी बारिश, सूखा, अकाल या फिर बाढ़ जैसी समस्या हो, इस संकटपूर्ण स्थिति में एनडीआरएफ की महती भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता... क्योंकि इस संकटपूर्ण स्थिति में जान-माल की सुरक्षा के साथ ही लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने एवं राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान से बचाने के लिए एनडीआरएफ की भूमिका सदैव अग्रणी रही है... इस बार भी एनडीआरएफ की 41 टीमें समय से पूर्व तैनात कर दी है, ताकि इस प्राकृतिक आपदा से समय पूर्व तैयारी के साथ लडऩे की पूरी भूमिका का निर्माण किया जा सके... प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मौसम विभाग द्वारा चेतावनी जारी होने के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल, ओडिशा के साथ सुरक्षा बैठक एवं अम्फान से बचने के तौर-तरीकों व तैयारी पर लंबी मंतणा की... इससे पहले भी मौसम विभाग द्वारा जब तूफान की सूचना दी गई थी, तब भी केन्द्रीय दल ने इस समस्या से लडऩे में त्वरित सक्रियता दिखाई और जान-माल की सबसे कम हानि का हिन्दुस्तान ने पहली बार रिकार्ड बना था... अत: इस बार महाचक्रवात अम्फान पश्चिम बंगाल और ओडिशा में किस तरह की विनाश लीलाएं निर्मित करेगा, यह तो समय के गर्भ में है, लेकिन केन्द्र से लेकर राज्य सरकारों की सक्रियता इस संकट की घड़ी में राहत पहुंचाने के अपने दायित्व निर्वाह हेतु तैयार दिखती है... तभी तो पश्चिम बंगाल में अभी तक 5 हजार से अधिक, जबकि डेढ़ लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है... एनडीआरएफ के पास इस महाचक्रवात अम्फान के दौरान होने वाली प्राकृतिक हानि जैसे पेड़ों का गिरना या फिर बिजली के पोल का गिरना, इन सभी को समय पूर्व हटाने के लिए कटाई करने वाले आधुनिक यंत्र है... इन दोनों राज्यों में केन्द्र ने 41 टीमों को इसी कार्य के लिए तैनात किया है... जबकि पश्चिम बंगाल में दो अतिरिक्त टीमें रिजर्व रखने की तैयारी भी की गई है... ओडिशा-पश्चिम बंगाल में इस अम्फान चक्रवात से निपटने के लिए न केवल समुद्री तटों, बल्कि मछवारा रहवासी क्षेत्रों को भी समय पूर्व खाली कराकर नुकसान की कम से कम स्थिति को ध्यान में रखा गया है... क्योंकि बंगाल व बांग्लादेश के बीच 155 से 165 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से टकराने वाला यह अम्फान जब तेज हवाओं के साथ इन क्षेत्रों में पहुंचेगा तो किस तरह के नुकसान की आशंकाएं है, उसका पूरा अनुमान लगाकर एनडीआरएफ की टीमें बचाव व राहत कार्य के लिए रणनीति बना चुकी है... जब तूफान तेजी से आएगा तो समुद्री लहरों के साथ हवा की गति भी नुकसान को बढ़ा देती है... लेकिन एनडीआरएफ की टीम हर समस्या के समाधान के लिए अम्फान से भिडऩे के लिए तैयार है...
दृष्टिकोण
मजदूरों के बहाने कांग्रेस का खेल...
कोरोना काल के इस भयावह संकट के बीच कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार विपक्ष के रूप में अपनी भूमिका का निर्वाह करने में पूर्णत: विफल होती नजर आई है... क्योंकि जितनी जिम्मेदारी किसी भी तरह के संकट, आपदा या विभिषिका के समय केन्द्र सरकार की एवं राज्यों की सरकारों की होती है, उतनी ही जवाबदेही केन्द्र से लेकर राज्यों तक की विपक्ष की भी तय है... आज कांग्रेस केन्द्र में विपक्ष जैसी स्थिति का आभास कराने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि उसकी जो राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने की मंशा मुद्दों को हवा देती है और समस्या को बढ़ाने का काम करती है, उससे कई बार कांग्रेस द्वारा उठाए गए वास्तविक मुद्दे भी धूल-धुसरित होते नजर आते हैं... कोरोना के इस संकट में कांग्रेस पहले दिन से मजदूरों, गरीबों का मुद्दा उठा रही है, लेकिन वाजिब रूप से उसका क्या समाधान इसकी कोई पहल या नीति पार्टी के पास नहीं है... तभी तो वह पहली बार सोनिया गांधी ने घोषणा की थी कि मजदूरों को घर पहुंचाने तक की ट्रेनों के किराये को कांग्रेस पार्टी अपने फंड से वहन करेगी, उस पर आज तक कोई अमल होता नजर नहीं आया... अब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने जिस तरह से बिना पंजीयन एवं कंडम गाडिय़ों को मजदूरों को राज्यों की सीमा तक पहुंचाने के लिए आनन-फानन में फतहपुर सिकरी क्षेत्र में तैनात किया, इससे राजनीति तो गरमाना ही थी, क्योंकि जब कांग्रेस शासित राज्यों छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब, झारखंड में स्थानीय सरकारों ने मजदूरों को लाने या फिर वहां से दूसरे राज्यों में पहुंचाने में तत्परता नहीं दिखाई तो फिर सवाल उठता है कि कांग्रेस को भाजपा शासित राज्यों में ही मजदूरों की इतनी चिंता क्यों सता रही है कि वह गंभीर मुद्दों को सतही राजनीति का अखाड़ा बनाने से नहीं चूक रही है... इसे मजदूरों के साथ राजनीतिक छल के रूप में देखा जाना चाहिए...