तालाबंदी का चौथा चरण और उम्मीदें...
   Date19-May-2020

vishesh lekh_1  
कोरोना काल के इस भयावह संकट के दौर में वैश्विक महामारी बन चुके इस खतरनाक विषाणु से मुक्ति पाने के लिए जिस तरह के कदम उठाने की आवश्यकता लगातार महसूस हो रही है, उसमें सबसे पहला या कहे प्राथमिक बिन्दु यही था कि कैसे भी बाजार की, मुख्य मार्गों की एवं कार्यरत स्थलों की जो जनसंख्यारूपी भीड़ है, उसको नियंत्रित किया जाए... क्योंकि इस वायरस के प्रसार का कारण यही वह आबादी है, जो चाहे, अनचाहे इस इस रोग के प्रसार का माध्यम बन जाती है... इस वायरस की चैन को तोडऩे के लिए भारत में 54 दिनों का तीन दौर का तालाबंदी कालखंड खत्म हो चुका है और सोमवार से चौथे चरण की तालाबंदी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है... सरकार ने नई गाइड लाइन के तहत फिलहाल हवाई, मेट्रो और रेल यातायात से लेकर स्कूल, कॉलेज, सिनेमा, बड़े मॉल, रेस्टोरेंट आदि को बंद रखने का अपना पुराना निर्णय यथावत रखा है... लेकिन उन क्षेत्रों में कुछ राहतों की भी अनुमति प्रदान की है, जहां पर रेड जोन, आरेंज जोन और ग्रीन जोन के माध्यम से स्थितियां नियंत्रण में है... इसलिए देश के लगभग सभी जिलों में कुछ न कुछ राहत कार्य या निर्णय अब कोरोना से इस लड़ाई के साथ गति पकडऩे की स्थिति में आ चुके हैं... तालांबदी का यह चौथा चरण भी अतिआवश्यक था, क्योंकि अभी भी संक्रमण की जो चैन बनी हुई है, वह टूट नहीं पाई है... लगातार देशभर में संक्रमितों की संख्या हजारों में बढ़ रही है... संभवत: मंगलवार तक देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1 लाख को पार कर जाएगी... जबकि 3 हजार लोग इस महामारी से जान भी गंवा चुके हैं... ऐसे में समझने वाली बात यही है कि जो भी निर्णय और नियम केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने केन्द्र शासित प्रदेशों एवं अन्य राज्यों के लिए बनाए है, उनका विधिवत रूप से पालन किया जाए... रेड जोन की स्थिति में सुधार होने पर आरेंज फिर उसे ग्रीन जोन में तब्दील होने के बाद सामान्य गतिविधियों को कुछ शर्तों के साथ छूट देने से ही आमजीवन सामान्य होता चला जाएगा... 25 मार्च से लागू पहली तालाबंदी को 31 मई तक बढ़ाए गई इस चौथी तालाबंदी के कुल 68 दिन हो रहे हैं... इसके बाद उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रधानमंत्री 31 मई को भी मन की बात के जरिये कोरोना से लंबी लड़ाई हेतु व्यापक दिशा-निर्देश आम जनता के सामने रखेंगे... उनकी समस्याओं का समाधान भी मन की बात में रहेगा... क्योंकि वुहान जैसे शहर में भी 76 दिनों तक तालाबंदी होने के बाद ही स्थिति नियंत्रण में आई थी... इस तालाबंदी के दौर में भी फिलहाल पूरे देश में सबसे बड़ी समस्या उन प्रवासी मजदूरों की है, जो कैसे भी अपनी जान दांव पर लगाकर मूल स्थानों पर लौटने के लिए इस भीषण गर्मी में दो चार हो रहे हैं... केन्द्र सरकार के प्रयास एवं राज्यों द्वारा उपलब्ध सहायता फिलहाल मजदूरों के लिए नाकाफी सिद्ध हो रही है... उम्मीद करना चाहिए कि जब यहां चौथा चरण पूर्ण होने को होगा, इसके पूर्व मजदूरों की इस विकट समस्या का समाधान केन्द्र-राज्य मिलकर निकाल लेंगे.., ताकि कोरोना से जीतने की उम्मीदें सफल हो सके...
दृष्टिकोण
मनरेगा फंड बढ़ाना उचित निर्णय...
आत्मनिर्भर भारत अभियान के अन्तर्गत केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा घोषित किए गए 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का बिन्दुवार एवं विस्तृत विवरण वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने किश्तों के माध्यम से प्रस्तुत कर दिया है... इस आर्थिक पैकेज का आवंटन एवं क्रियान्वनय की पूरी रूपरेखा भी केन्द्र सरकार ने बेहतर तरीके से सबके सामने रख दी है... रविवार को 20 लाख करोड़ के इस आर्थिक पैकेज की अंतिम किश्त जारी करते हुए वित्त मंत्री ने प्रत्येक क्षेत्र में निजी कंपनियों को प्रवेश देने की जो पहल की है, उससे स्थानीय स्तर पर अब तक आवश्यकताओं, संसाधनों के लिए मोहताज रही स्थानीय औद्योगिक इकाइयों या कहें बड़ी निजी फर्मों को लाभ मिलेगा और जब वे लाभ में रहेगी तो उनका उत्पादन बढऩे के साथ ही उसमें कार्यरत कर्मचारियों को भी लाभ होना निश्चित है... अगर इस आर्थिक पैकेज का बिन्दुवार आंकलन करके देखें तो पता चलता है कि पीएम गरीब योजना, स्वास्थ्य के लिए आवंटन, टैक्स में छूट, एमएसएमई सेक्टर, पावर सेक्टर, श्रमिकों, कृषकों, सिंचाई, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन समेत ऐसे क्षेत्र है, जिनके लिए पर्याप्त राशि का निर्धारण हुआ है... मनरेगा के आवंटन में 40 हजार करोड़ की बढ़ोत्तरी सही मायने में प्रवासी मजदूरों को उनके मूल स्थान पर ही भविष्य में पंचायतों, नगर परिषद्, नगर पंचायत के माध्यम से रोजगार उपलब्ध करवाने की पहल के रूप में देखा जाना चाहिए... क्योंकि जब तक इन वर्ग को उचित तरीके से रोजगार के अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने वाले प्रयास नाकाफी सिद्ध होंगे... अत: मनरेगा के फंड में बढ़ोत्तरी को एक दूरदर्शी एवं उचित निर्णय के रूप में देखा जाना चाहिए...