दण्ड का विधान
   Date19-May-2020

prernadeep_1  H
प्रेरणादीप
पा प करने वाले का स्तर क्या है? इस पर सजा निर्भर है, जिसके दायित्व बढ़े-चढ़े हैं, उससे यदि ऐसा कुकृत्य हो तो उसकी सजा भी अलग होगी। एक बार चार जुआरी पकड़े गए। वे राजा के सामने पेश किए गए। राजा ने एक को छह महीने की जेल दी। दूसरे को पांच सौ रुपया जुर्माना। तीसरे को कान पकड़कर दस बार उठने-बैठने की सजा दी और चौथे को इतना ही कहा- 'आप भी!Ó और उसे बिना कुछ दंड दिए रिहा कर दिया। 12 मंत्रियों ने एतराज किया-'एक ही जुर्म में एक साथ पकड़े गए अपराधियों को अलग-अलग प्रकार की सजा क्यों?Ó राजा ने कहा- 'कल आप लोग जाकर देखना कि वे चारों क्या कर रहे हैं?Ó देखा गया तो जिसे जेल हुई थी, वह जेल में जाकर भी कंकड़ों की सहायता से दूसरे कैदियों को जुआ खिला और सिखा रहा था, जिसे पांच सौ रुपया जुर्माना हुआ था, उसने उस नगर को छोड़कर दूसरे नगर में अपना धंधा करना शुरू कर दिया था। जिसे कान पकड़कर उठने-बैठने के लिए कहा गया था, उसने घर जाकर शपथपूर्वक प्रतिज्ञा की कि वह कभी भी जुआ न खेलेगा और जिसे आप भी, कहकर रिहा कर दिया था, उसने सोचा कि हमारे खानदान की प्रतिष्ठा राजदरबार में धूमिल हो गई और शहर में जानकारी फैलने से मुंह दिखाने लायक न रहेगा, सो उसने वह राज्य छोड़ दिया और किसी अन्य देश के लिए चला गया। राजा ने सूचना के आधार पर कहा-'जुर्म ही नहीं, व्यक्ति का स्तर देखकर भी सख्ती और नरमी बरती जाती है।Ó