समय का सदुपयोग सफलता का द्वार
   Date19-May-2020

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धर्मधारा
स मय के बारे में प्रख्यात है कि यह एक ऐसा उड़ता हुआ सच है, जिसका चेहरा कोई नहीं देख पाता, क्योंकि यह सदा आगे बढ़ता रहता है, पीछे मुड़कर नहीं देखता। इसके सिर के पीछे बाल होते हैं, कोई चाहे तो बस इनको पकड़कर इसके साथ कदमताल करते हुए काल को अपने पक्ष में कर सकता है अन्यथा काल किसी का इंतजार नहीं करता। जो इसके साथ कदमताल नहीं कर पाते, वे जीवन की यात्रा में पिछड़ जाते हैं व उन संभावनाओं से वंचित रह जाते हैं, जिनके साथ उन्हें धरती पर भेजा गया था, जिनका पूर्ण विकास यहीं पर संभव था।
यह एक सच्चाई है कि सबको चौबीस घंटे मिले हैं, न इसके अधिक और न कम। इसके बावजूद कई इस समय में आश्चर्यजनक कार्य कर डालते हैं, तो कई समय के अभाव का रोना ही रोते रहते हैं। यहां सारा खेल समय के नियोजन व सदुपयोग का है। यही वह कारक है, जो एक सफल व्यक्ति को असफल व्यक्ति से अलग करता है। लापरवाह व्यक्ति के हाथ में से चौबीस घंटे कुछ ऐसे ही फिसल जाते हैं, जैसे मु_ी से रेत, लेकिन सजग व्यक्ति एक-एक पल का सदुपयोग करते हुए, जैसे बालू के ढेर से तेल निकालने की उक्ति को चरितार्थ करता है। जबकि समय की कीमत से अनजान एक लापरवाह व्यक्ति समय के अभाव की शिकायत करता रहता है और एक असफल एवं नाकारा जीवन जीने के लिए अभिशप्त होता है।
समय का श्रेष्ठतम उपयोग कैसे करें-इसके लिए समय प्रबंधन के सूत्रों का ज्ञान होना आवश्यक है। इसमें कार्यों की प्राथमिकताओं की समझ महत्वपूर्ण होती है और इसके लिए अपने लक्ष्य की स्पष्टता का होना अनिवार्य होता है, जिसके आधार पर कुशल समय प्रबंधन को अंजाम दिया जा सके।
प्राय: कार्यों को चार श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। पहले महत्वपूर्ण और तात्कालिक कार्य, जिन्हें बिना समय गंवाए पूरा करना होता है। दूसरे महत्वपूर्ण, किंतु गैर-तात्कालिक कार्य, जिन्हें उपयुक्त समय पर पूरा करने के लिए छोड़ा जा सकता है। तीसरे- तात्कालिक, किंतु गैर-महत्वपूर्ण कार्य, जिन्हें अपने सहयोगियों के बीच बांटा जा सकता है। चौथे-गैर-तात्कालिक और गैरमहत्वपूर्ण कार्य, जिन्हें फुर्सत के समय के लिए टाला जा सकता है। प्राय: जो समय-अभाव का रोना रोते हैं, या जिनके आवश्यक कार्य समय पर नहीं हो पाते और जो हमेशा परेशानी की अवस्था में हैरान-परेशान रहते हैं, अंतिम समय पर कार्यों को पूरा करने की हबड़-तबड़ में रहते हैं।