तत्वदर्शी
   Date18-May-2020

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प्रेरणादीप
इ टली के एक छोटे से गाँव में जन्मे ऐविले आरंभिक जीवन में ही पादरी बना दिए गए, पर उन्होंने आँख खोलकर देखा कि पादरियों द्वारा कितना भ्रमजंजाल फैलाया जा रहा है और लूट-खसोट के लिए विचित्र आडंबर किया गया है। उन्होंने अपने समुदाय को इसके लिए लताड़ा और जनता को सावधान भी किया। जिनके स्वार्थों को चोट पहुँची, वे उनके विरोधी बन गए, पर इसकी उन्होंने तनिक भी परवाह न की। ऐविले ने अनुभव किया कि मात्र धर्मोपदेश या कर्मकांड पूरे कर लेने में ही धर्मधारणा का उद्देश्य पूरा नहीं होता। धर्मजीवियों को देश की अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति में भी जुटना चाहिए। उन्होंने अपना अध्ययन जारी रखा। एक विशाल पुस्तकालय की स्थापना की, जिसके माध्यम से प्रत्येक धर्मप्रेमी को इस तत्वज्ञा की वास्तविकता का पता चल सके। समाज-सुधार से लेकर राजनीतिक गुत्थियों के समाधान के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया। विग्रह और संधि के जितने अवसर पड़ोसी देशों के साथ आए, उन्हें सुलझाने में उन्होंने भरपूर सहायता की। उन्हें इटली में आदर्श पादरी माना जाता है और उनके मृत्युपरांत भी उन्हें एक सत्यनिष्ठ दूरदर्शी के रूप में भरपूर सम्मान दिया जाता है।