राष्ट्र आराधना की घड़ी...
   Date25-Mar-2020

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शक्तिसिंह परमार
हि न्दुत्व केवल धर्म नहीं है..,बल्कि यह विश्वमान्य वह जीवनशैली/पद्धति है...जिसने प्रत्येक कालखंड में नवसृजन का शाश्वत संदेश दिया है...तभी तो हिन्दुत्व के विचार प्रत्येक दौर में समसामयिक, प्रासंगिक और नूतन रहे हैं...तमाम तरह के झंझावतों, प्राकृतिक आपदाओं, मानव निर्मित विध्वंसों का सामना करते हुए भी कालचक्र के साथ जिसकी गति कभी शिथिल हुई..,कभी तेज...लेकिन अवरुद्ध नहीं हुई...यह सबकुछ इसलिए संभव हुआ..,क्योंकि भारतीय संस्कृति के विचार, मूल्य, मान्यताएं, पर्व-उत्सव, वर्ष, तिथि, वार यहां तक कि घड़ी और पल तक में धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक, प्राकृतिक और वैज्ञानिक शास्त्र सम्मत वह भाव जिसका सृजन से विसर्जन तक का लिखित-अलिखित महत्व है...
ईश्वरीय अधिष्ठात्रा को मानने वाले भारत का शाश्वत विचार रहा है कि इस पुण्यधरा पर पेड़ का पत्ता भी सर्वोच्च सत्ता के बिना हिलता नहीं...फिर जब इस धरा ने अलग-अलग कालखंडों में वे सभी पड़ाव देख लिए, जिनकी कल्पना एक राष्ट्र के रूप में कोई अन्य देश नहीं कर सकता.., जहां ऐसा हुआ हो, उनकी संस्कृति और विचार का अवसान होते हुए भी हमने देखा..,लेकिन इन सबके बीच भारत का शाश्वत विचार आज भी विजय मशाल लेकर दुनिया को अंधेरे से लड़कर उजास की राह दिखा रहा है...तब विचार किया जाना चाहिए कि इस पुण्यभूमि के प्रति जिसके, जैसे और जो भी दायित्व हैं...वे उन्हें कैसे और कब तक निर्वाह करता है..? इस पूरी प्रक्रिया का वर्षभर में एक बार सिंहावलोकन होना चाहिए...यही समय की मांग है...तभी तो भारत में वर्ष में एक बार ऐसा अवसर भी आता है, जब हम अपनी गति का, मार्ग का और लक्ष्य का विश्लेषण करें...कहां जाना था..? कहां तक पहुंचे और आगे क्या करना है..? इसी विचार भाव का उत्सव यानी संकल्प, संयम और साधना का पर्व 'नवसंवत्सरÓ हमें नए परिवर्तन के साथ आगे बढऩे की प्रेरणा देने ही तो आता है...ताकि हम सृष्टि निर्माण की इस शुभारंभ बेला पर अपने धार्मिक, पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्व के आईने में अपनी भूमिका का विश्लेषण कर सकें...जब ऐसा होगा तो हमें अपने अच्छे-बुरे का स्मरण होगा और नवसृजन की राह भी दिखाई देगी..,क्योंकि इस नवसंवत्सर अर्थात विक्रम संवत् की शुभारंभ बेला यानी भारतीय नववर्ष (हिन्दू नववर्ष) के साथ अनेक मंगलकारी, प्रेरणादायी विचार जुड़े हैं...जिनका जन-जन तक प्रचार-प्रसार हमें नवीन ऊर्जा से पूरित करने में महती भूमिका का निर्वाह करता है...इसी से पूरे भारतीय समाज में समरसता, संगठित एकता के भाव की सदैव अनुगूंज होती है...कहा भी गया है कि-
भाषा-पंथ-जाति जो भी हो, अपने तो हैं बंधु सभी,
ग्राम-नगर-वनवासी-गिरीजन भारत माँ के पुत्र सभी।
पुत्रों के सुख में ही तो है, माँ के सुख की धारणा,
समाज है आराध्य हमारा, सेवा है आराधना।।
प्रत्येक राष्ट्र आने वाली पीढ़ी को अपना गौरवशाली इतिहास पढ़ाता है..,क्योंकि इतिहास का स्मरण ही हमें सीखने-समझने और सतर्कता के साथ आगे बढऩे की प्रेरणा देता है...अगर पुराने कालखंड की तरफ नजर दौड़ाकर देखें तो ऐसी अनेक प्राकृतिक आपदाओं, अकाल, सूखा, महामारियों और त्रासदियों के समय भारतीय समाज ने एकजुटता के साथ लड़ते हुए ऐसी विभीषिकाओं पर विजय प्राप्त की है...वर्तमान में पूरे विश्व में महामारी का रूप ले चुके नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) ने चीन से निकलकर पूरे विश्व को अपनी गिरफ्त में ले लिया है...यूरोप में कोरोना ने कोहराम मचाया...और चीन, जापान, ईरान के बाद भारत में भी इस महामारी ने अपना शिकंजा जमाना तेजी से प्रारंभ कर दिया है...उस स्थिति में यह मानव निर्मित महामारी मानवीय प्रयासों और अनुशासन से ही नियंत्रित होगी...जब तक सामाजिक एकता, सजगता, सतर्कता और संकल्प के साथ नियमों, प्रावधानों के पालन का भाव भारतीय समाज में तेजी से नहीं आएगा, तब तक इस भयावह त्रासदी से सामना करना सिर्फ किसी सरकार, प्रशासन या चिकित्सकीय दल के जरिए संभव नहीं है...इसमें प्रत्येक नागरिक का राष्ट्रीय अनुशासन जरूरी है...तभी तो प्रधानमंत्री मोदी ने 22 मार्च को 'जनता कफ्र्यूÓ के जरिए लोगों को घरों में रहकर संक्रमण से बचने और लोगों को संक्रमित होने से बचाने का आव्हान किया था...जिसका पूरे देश में करीब-करीब अक्षरश: पालन हुआ...कुछ अति उत्साही धड़ों ने जरूर 'जनता कफ्र्यूÓ की सफलता पर पानी फेरने का काम किया...लेकिन यह बात समझ में हर किसी को आना चाहिए कि किसी चिकित्सकीय उपाय अथवा सरकार या प्रशासन के प्रयासों से कहीं बढ़कर लोगों का घरों में रहकर इस घातक कोरोना वायरस महामारी से लडऩे में शत-प्रतिशत सहयोग जब मिलेगा, तभी यह आतंकवादी वायरस अपनी मौत मारा जाएगा...इसलिए जरूरी है कि सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों, बनाए जा रहे नियमों का प्रत्येक नागरिक अपना राष्ट्रधर्म समझकर पालन करे...क्योंकि जब कोई परिवार सरकार की इच्छा के अनुरूप घर में रहकर कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग में सहभागी बनेगा तो यह उसके द्वारा की गई किसी राष्ट्र आराधना से कम नहीं है...क्योंकि वह अपने को घर में कैद नहीं..,बल्कि सुरक्षित रखकर खतरनाक वायरस के खात्मे की रणनीति में 'एक राष्ट्र रक्षक सिपाहीÓ की भूमिका के निर्वाहकर्ता के रूप में नजर आता है..,जबकि जो सरकार या प्रशासन की नियमों की धज्जियां उड़ाकर सड़कों पर घूम रहे हैं, वे घातक वायरस कोरोना के संरक्षक व सहयोगी के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं...हिन्दू नववर्ष और नवसंवत्सर की इस शुभारंभ बेला में 'राष्ट्र आराधनाÓ की यह घड़ी प्रत्येक देशवासी से राष्ट्र, समाज की सुरक्षा का वचन व संकल्प मांग रही है...यही बात तो पुन: मंगलवार रात्रि को राष्ट्र संबोधन में प्रधानसेवक के रूप में मोदीजी ने कही है...उनके आव्हान पर गंभीर चिंतन-मनन करें और उसका पालन करें.., क्योंकि राष्ट्र रहेगा, तभी हम सब रहेंगे...और राष्ट्र की रक्षा के लिए जरूरी है कि हम सब कोरोना के कहर से सुरक्षित और संरक्षित रहें... उम्मीद है नवसंवत्सर की यह शुभारंंभ बेला भारत पर आई विपदा को हराने का निमित्त बनेगी... यही सभी के लिए सबसे बड़ी राष्ट्र आराधना भी है... इसी संयम-संकल्प के भाव के साथ सभी को हिन्दू नववर्ष की हार्दिक बधाई.., शुभकामनाएं...