आधी रात से 21 दिनों तक पूरा भारत बंद
   Date25-Mar-2020

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मोदी सरकार का सबसे बड़ा फैसला : रात १२ बजे से ३ सप्ताह का लॉकडाउन, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा-
नई दिल्ली द्य 24 मार्च (वा)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि दुनिया में महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस 'कोविड-19Ó से निर्णायक लड़ाई के लिए सरकार ने आज आधी रात से समूचे देश में 21 दिन के लॉकडाउन का निर्णय लिया है, क्योंकि इस जानलेवा वायरस के संक्रमण की श्रृंखला को तोडऩे का यही एक मात्र रास्ता है।
एक सप्ताह में दूसरी बार आज रात राष्ट्र के नाम संबोधन में श्री मोदी ने कहा कि इस वायरस के संक्रमण से प्रभावित अन्य देशों के अनुभव और विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह लॉकडाउन आज आधी रात से शुरू होकर अगले 21 दिन तक लागू रहेगा और इस दौरान प्रत्येक देशवासी को अपने घर में ही रहना है और यह मानकर चलना है कि उसे अपने घर के दरवाजे के बाहर खिंची लक्ष्मण रेखा को पार नहीं करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि लोगों की छोटी सी लापरवाही उनके, उसके परिवार और समूचे देश को गंभीर खतरे में डाल सकता है।
मोदी के राष्ट्र संबोधन के प्रमुख अंश
कोरोना से मुकाबले के लिए इकलौता विकल्प है सोशल डिस्टेंसिंग- दुनिया के समर्थ से समर्थ देश को भी इस महामारी ने बेबस कर दिया है। ऐसा नहीं है कि देश प्रयास नहीं कर रहे हैं या उनके पास संसाधनों की कमी है, लेकिन, कोरोना वायरस इतनी तेजी से फैल रहा है कि तमाम तैयारियां और प्रयासों के बावजूद यह फैल रहा है। इन सभी देशों के दो महीनों के अध्ययन से जो निष्कर्ष निकल रहा है और जो विशेषज्ञ कह रहे हैं, वह यह है कि कोरोना से प्रभावी मुकाबले के लिए एकमात्र विकल्प है सोशल डिस्टेंसिंग।
संक्रमण के चक्र को तोडऩा होगा- कोरोना से बचने से फैलने से रोकना है तो उसके संक्रमण के चक्र को तोडऩा ही होगा। कुछ लोग इस गलतफहमी में हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग केवल मरीज के लिए आवश्यक है, यह सोच सही नहीं है। सोशल डिस्टेंसिंग हर नागरिक और हर परिवार के लिए है। प्रधानमंत्री के लिए भी है। कुछ लोगों की लापरवाही और गलत सोच आपको, आपके बच्चों, माता-पिता, आपके परिवार, आपके दोस्तों और पूरे देश को बहुत बड़ी मुश्किल में झोंक देगी।
कोरोना यानी को- कोई, रो- रोड पर, ना- ना निकले- देशभर में लॉकडाउन ने आपके घर के दरवाजे पर लक्ष्मण रेखा खींच दी है। आपको याद रहे कि घर से बाहर पडऩे वाला सिर्फ एक कदम कोरोना जैसी गंभीर महामारी को आपके घर में ले आ सकता है। याद रखना है कि कई बार कोरोना से संक्रमित व्यक्ति शुरुआत में बिल्कुल स्वस्थ लगता है। वह संक्रमित है, इसका पता ही नहीं चलता है। इसलिए ऐहतियात बरतिए, अपने घरों में रहिए। जो लोग घर में हैं, वह सोशल मीडिया पर नए-नए तरीके से इस बात को बता रहे हैं। एक बैनर जो मुझे भी पसंद आया, मैं आपको भी दिखा रहा हूं। कोरोना यानी को- कोई, रो- रोड पर, ना- ना निकले।
संक्रमित एक व्यक्ति सैकड़ों को 7 दिन में संक्रमित बना देगा- एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि आज अगर किसी व्यक्ति में कोरोना वायरस पहुंचता है तो इसके लक्षण दिखने में कई-कई दिन लग जाते हैं। इस दौरान वह जाने-अनजाने उस व्यक्ति को संक्रमित कर देता है जो उसके संपर्क में आता है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि इस बीमारी से संक्रमित एक व्यक्ति सैकड़ों लोगों को एक हफ्ते में संक्रमित कर सकता है। एक और आंकड़ा है। दुनिया में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या को पहले एक लाख तक पहुंचने में 67 दिन लगे थे, उसके बाद सिर्फ 11 दिन में एक लाख नए लोग संक्रमित हो गए।
कोरोना से तभी बचा जा सकता है, जब घर की लक्ष्मण रेखा ना लांघी जाए-कोरोना से निपटने के लिए उम्मीद की किरण उन देशों से मिले अनुभव हैं, जो कोरोना को कुछ हद तक नियंत्रित कर पाए। हफ्तों तक इन देशों के नागरिक घरों से बाहर नहीं निकले। इन देशों के नागरिकों ने शत-प्रतिशत सरकारी निर्देशों का पालन किया और इसलिए ये कुछ देश अब इस महामारी से बाहर आने की ओर बढ़ रहे हैं। हमें भी यह मानकर चलना चाहिए कि हमारे सामने सिर्फ और सिर्फ यही एक मार्ग है। हमें घर से बाहर नहीं निकलना है। चाहे जो हो जाए, घर में ही रहना है। सोशल डिस्टेंसिंग। प्रधानमंत्री से लेकर गांव के नागरिक तक सबके लिए। कोरोना से तभी बचा जा सकता है, जब घर की लक्ष्मण रेखा ना लांघी जाए।
डॉक्टर, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ के बारे में सोचिए-मेरी आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि घरों में रहते हुए आप उन लोगों के बारे में सोचिए, उनके बारे में मंगलकामना कीजिए, जो अपना संकल्प निभाने के लिए अपनी जान खतरे में डालकर काम कर रहे हैं। डॉक्टर, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ के बारे में सोचिए। ये लोग एक-एक जीवन बचाने के लिए अस्पताल में काम कर रहे हैं। अस्पताल प्रशासन के लोग, एम्बुलेंस के ड्राइवर, सफाई कर्मचारियों के बारे में सोचिए जो दूसरों की सेवा कर रहे हैं। आपकी सोसाइटी, सड़कों, मोहल्लों को साफ करने वालों के बारे में सोचिए। आपको सही जानकारी देने के लिए 24 घंटे काम कर रहे मीडिया के लोगों के बारे में भी सोचिए जो संक्रमण का खतरा उठाकर सड़कों पर, अस्पतालों में हैं। पुलिसकर्मियों के बारे में सोचिए जो घर-परिवार की चिंता किए बिना आपको बचाने के लिए ड्यूटी कर रहे हैं। कई बार कुछ लोगों की गुस्ताखी के शिकार भी हो जाते हैं।
यह गरीबों के लिए मुश्किल वक्त-सरकार, सिविल सोसाइटी, तमाम संगठन इन लोगों के लिए जुटे हुए हैं। लोग इन गरीबों के लिए साथ आ रहे हैं। जीवन जीने के लिए जो जरूरी है, उसके लिए सारे प्रयासों के साथ ही, जीवन बचाने के लिए जो जरूरी है, उसे सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। महामारी से निपटने के लिए देश की स्वास्थ्य सुविधाओं को ब?ाने का काम केंद्र सरकार कर रही है। कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के लिए केंद्र ने 15 हजार करोड़ रुपए का काम किया है। आइसोलेशन बेड, आईसीयू बेड, प्रयोगशालाएं आदि बढ़ाई जाएंगी।