आपका नहीं, पूरा कसूर आपके करीबियों का...
   Date21-Mar-2020

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त्वरित टिप्पणी
शक्तिसिंह परमार
दिसम्बर 2018 से जिस बात के कयास लगाए जा रहे थे..,रह-रहकर जो आशंकाएं जाहिर की जा रही थीं...वह मप्र में कमल नाथ सरकार के अल्प आयु में अवसान के साथ ही सही साबित हो रही हैं...क्योंकि मप्र की जनता ने जो जनादेश सुनाया था, वह मिलाजुला ही कहा जाएगा...क्योंकि कांग्रेस-भाजपा दोनों को ही बहुमत की दहलीज पर ऐसा लाकर खड़ा किया कि बनने वाली कांग्रेस सरकार को हमेशा अस्थिरता का भय सुबह-शाम सताता रहा...और सत्ता से बाहर भाजपा को भी सत्ता में लौटने से ना उम्मीद नहीं होने दिया...आज करीब 15 माह बाद मप्र का सत्ता समीकरण बदल चुका है...मप्र में करीब दो सप्ताह से चल रही राजनीतिक उठापटक एवं प्रदेश की कमल नाथ सरकार पर मंडरा रहे अस्थिरता के उन बादलों के शुक्रवार को बरसने के साथ ही पूरे घटनाक्रम का पटाक्षेप विधानसभा में शाम को बहुमत सिद्ध किए बिना ही हो गया...जब मुख्यमंत्री कमल नाथ ने दोपहर में पत्रकारवार्ता के माध्यम से अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की...यही होना था..,क्योंकि जैसे ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से हाथ झटका और उनके 22 समर्थक मंत्री-विधायक बागी हुए...उसी दिन कमल नाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी...हालांकि इस राजनीतिक अस्थिरता के भंवर को तूफान के रूप में तब्दील होने और इसमें सरकार उड़ न जाए, इससे बचाने के सारे समीकरण कांग्रेस के घाघ रणनीतिकारों ने भिड़ाए...बागी विधायकों को मनाने.., उन्हें प्रलोभन देने.., और विधायिकी जाने..,भविष्य में चुनाव न जीत पाने जैसे भय भी दिखाए...यही नहीं, राज्यपाल के दिशा-निर्देशों को ठेंगा दिखाकर विस अध्यक्ष की ताकत का घमंड पाला और मनमानी की सारी सीमाएं लांघी...हद तो तब हो गई, जब कांग्रेस के वकील नेता ने विस अध्यक्ष की तरफ से शीर्ष अदालत में बार-बार यह बात धमकाने वाले अंदाज में दोहराई कि आप (न्यायालय) स्पीकर को निर्देश नहीं दे सकते.., उनके अधिकारों का हनन या उनकी कटौती नहीं कर सकते...आखिर कांग्रेस बहुमत सिद्ध करने..,फ्लोर पर जाकर टेस्ट देने..,यानी अपने पास आवश्यक संख्या बल होने का सबूत देने के बजाय ऐसे दरवाजों की तलाश करने में जुटी रही, जिसमें कैसे भी भाजपा या कांग्रेस के बागी विधायकों को तोड़ लिया जाए...प्रलोभन देकर पाले में कर लिया जाए...लेकिन कांग्रेस की सारी साजिशें विफल रहीं...अदालत में भी सारे दांव-पेच और कुतर्क जब विफल हुए तो सत्ता से रुखसत होने के सिवाए रास्ता भी क्या था..? मुख्यमंत्री कमल नाथ के पास..?
इस्तीफे की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री कमल नाथ ने चाहे जितने आरोप भाजपा पर लगाए.., अपनी तमाम नीतियों, कार्य योजनाओं एवं सफलताओं का बखान किया हो...या अपने को पाक-साफ बताते हुए यह पूछ लिया कि आखिर 'मेरा कसूर क्या था..?Ó तब इस सवाल का जवाब उन्हें भाजपा से नहीं..,बल्कि अपने विधायक दल की बैठक में अपने वरिष्ठ-कनिष्ठ कांग्रेस नेताओं के बीच में जाकर पूछना होगा...क्योंकि कसूर कमल नाथजी आपका नहीं..,बल्कि आपके करीबियों का पूरा-पूरा है...इसमें कोई दो राय नहीं है कि बहुत छोटी समयावधि में आपने कुछ ऐसे निर्णय किए..,जिसका भाजपा ने 15 वर्षों में भी विचार नहीं किया था...और हो सकता है कि भविष्य में भाजपा सरकार उन्हें अच्छे से आगे भी बढ़ाएगी...फिर चाहे वह गुमास्ता लायसेंस में परिवर्तन कर भ्रष्टाचार का काकस तोडऩा हो या जनसुनवाई में कलेक्टर-कमिश्नर की उपस्थिति अनिवार्य करना हो अथवा प्रदेश में एक हजार गौशालाएं बनाने के लिए तेजी से कार्य-रणनीति को अमल में लाना हो...अथवा भूमाफियाओं एवं गिरोह बनाकर आतंक मचाने वालों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लडऩे में जो आपने बिना झुके-डिगे काम किया...वह प्रदेश की जनता याद करेगी...लेकिन क्या बस इन्हीं के भरोसे आप 5 साल शासन करना तय कर चुके थे..? तो इस पर अब जरा गंभीरता से विचार कीजिएगा...
कमल नाथजी कसूर आपके करीबियों का था...जिसमें दिग्विजय सिंह जैसों की वह महत्वाकांक्षी मंडली शपथ ग्रहण के साथ आप पर हावी रही...पहली बैठक में अधिकारियों-विधायकों को आप नहीं.., दिग्विजय दिशा-निर्देशित कर रहे थे...कभी दिग्विजय मंत्रियों की क्लास लेने के लिए पत्र बम फोड़ते, तो कभी हाईवे पर वाहनों में मरती गौमाता पर आपको सवालों के घेरे में खड़े करते रहे...बीच-बीच में आपको धमकाने या ब्लैकमेल करने का यह सबसे नायाब तरीका दिग्विजय सिंह ने निकाला कि कांग्रेस के विधायकों को भाजपा खरीद रही है...यह आरोप कितनी बार दिग्विजय ने लगाए...वास्तविकता में कांग्रेस के विधायक जब महाराज के साथ पाला बदलकर आपसे दूर हुए, तब जाकर आपको पता चला कि आपके पैरों की जमीन करीबियों ने ही खिसकाई है...तबादला उद्योग का सच किसी से छुपा नहीं है...जिस तरह से एक-एक अधिकारी के तीन-तीन बार इन 12-15 माह में स्थानांतरण हुए...आपके मंत्री, अधिकारियों द्वारा उनकी सुनवाई न करने का सार्वजनिक रोना रोते रहे...लेकिन आपने कभी भी इन करीबियों की तिकड़मों, साजिशों और समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया...परिणाम आपके सामने है...भले ही आज आप सरकार गंवाने के आरोप भाजपा पर लगाकर 'ऑपरेशन लोटसÓ की रणनीति को प्रदेश के साथ छलावा बताकर अपने को पाक-साफ बताने की असफल कोशिश कर रहे हों...लेकिन राजनीति का यही शाश्वत सत्य है कि जब सामने वाले पक्ष से कोई बागी होकर विपक्ष में बैठने को तैयार है, तब उसका स्वागत न करना कोई समझदारी नहीं है...भाजपा ने आपके करीबियों की साजिशों, षड्यंत्रों को अपनी सत्ता सीढ़ी के रूप में उपयोग करके मप्र वासियों के उज्ज्वल भविष्य निर्माण के लिए एक ऐसी सरकार देने का खाका खींच दिया है..,जो सिर्फ करीबी लोगों का गिरोह बनाकर सरकार संचालन में विश्वास नहीं रखती..,बल्कि जनता की, जनता के लिए, जनता द्वारा चुनी गई सरकार की अनुभूति इन शेष वर्षों में कराएगी...लेकिन आपको सत्ता से बेदखल करने में आपके करीबियों की जो भूमिका रही है...उसका आप विश्लेषण कब, कैसे और कितने दिनों में करेंगे..? इसी पर आपका और प्रदेश कांग्रेस का भविष्य तय होगा... श्चड्डह्म्द्वड्डह्म्ह्यद्धड्डद्मह्लद्ब८०ञ्चद्दद्वड्डद्बद्य.ष्शद्व