केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक को मिली संसद की मंजूरी
   Date21-Mar-2020

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नई दिल्ली द्य 20 मार्च (वा)
लोकसभा ने आज केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक 2019 में राज्यसभा द्वारा सुझाए गए दो मामूली संशोधनों को स्वीकार कर लिया। इस प्रकार से इस विधेयक को संसद से मंजूरी मिल गई। उधर सरकारी निजी साझेदारी के आधार पर स्थापित किए गए देश के पांच प्रमुख भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईआईटी) को राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों का दर्जा देने के वास्ते भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान विधियां (संशोधन) विधेयक 2020 आज लोकसभा में पेश किया गया।
मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सदन में ये संशोधन पेश किए जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक 2019 में पहला संशोधन पृष्ठ 1 पंक्ति 1 में सत्तरवें की बजाय इकहत्तरवें किया गया है। दूसरा संशोधन पृष्ठ 1 पंक्ति 4 में 2019 की जगह 2020 किया गया है। इसके साथ ही केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक 2020 को संसद की मंजूरी मिल गई। इस विधेयक में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान और श्री लालबहादुर शास्त्री विद्यापीठ के साथ तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है।
मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सदन में यह विधेयक पेश किया जिसमें सूरत, भोपाल, भागलपुर, अगरतला और रायचूर स्थित आईआईआईटी को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित करने का प्रस्ताव किया गया है। डॉ. पोखरियाल ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि देश में 25 आईआईआईटी हैं जिनमें से प्रयागराज, जबलपुर, ग्वालियर, कांचीपुरम, कुर्नूल के संस्थान पूर्णत: केन्द्र द्वारा वित्तपोषित हैं जबकि 20 संस्थान केन्द्र सरकार की 50 प्रतिशत, राज्य सरकार की 35 प्रतिशत और 15 प्रतिशत उद्योग जगत के वित्तीय योगदान को मिला कर स्थापित किए गए हैं और इनमें उद्योग जगत की जरूरतों के अनुसार उनसे मिलकर पाठ्यक्रम तैयार किया जाता है और इस प्रकार से इन संस्थानों में बाज़ार की जरूरतों के हिसाब से पेशेवर तैयार हो रहे हैं।