सकारात्मक सोच
   Date21-Mar-2020

prernadeep_1  H
प्रेरणादीप
एक बहुत बड़ी कंपनी के कर्मचारी लंच टाइम में जब वापस लौटे, तो उन्होंने नोटिस बोर्ड पर एक सूचना देखी। उसमें लिखा था कि कल आपका एक साथी गुजर गया है, जो उनकी तरक्की रोक रहा था। कर्मचारियों को उसे श्रद्धांजलि देने के लिए बुलाया है। श्रद्धांजलि सभा कंपनी के मीटिंग हॉल में रखी गई थी। धीरे-धीरे कर्मचारी हॉल में जमा होने लगे। सभी होठों पर एक ही सवाल था। आखिर वह कौन है जो हमारी तरक्की में बाधा बन रहा था। सभी अपने-अपने कयास लगा रहे थे। उनके मानस पटल पर वे सारे अधिकारी-कर्मचारी घूमने लगे, जो कभी न कभी उनकी तरक्की में बाधा बने थे। हॉल में एक ओर सूचना लगी थी कि गुजरने वाले व्यक्ति की तस्वीर पर्दे के पीछे दीवार पर लगी है। सभी एक-एक करके पर्दे के पीछे जाएं, उसे श्रद्धांजलि दें। फिर अपनी तरक्की की राह में कदम बढ़ाएं, क्योंकि उनकी राह रोकने वाला अब चला गया है। कर्मचारियों के चेहरे पर हैरानी के भाव थे। कर्मचारी एक-एक कर पर्दे के पीछे जाते और दीवार पर टंगी तस्वीर देखते, तो अवाक् रह जाते। दरअसल, दीवार पर तस्वीर की जगह एक आईना टंगा था। उसके नीचे एक पर्ची लगी थी, जिसमें लिखा था-दुनिया में केवल एक ही व्यक्ति है जो आपकी तरक्की को रोक सकता है, आपको सीमाओं में बांध सकता है, वह आप खुद हैं। अपने नकारात्मक हिस्से को श्रद्धांजलि दे चुके नए साथियों का स्वागत है।
यह सही है कि यदि हम अपनी सोच को सकारात्मक बनाएं और हर सौंपें गए कार्य को चुनौती के रूप में लें, तो फिर हमें आगे बढऩे से कोई रोक नहीं सकता है।