तन और मन को बीमार बनाता तनाव
   Date21-Mar-2020

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धर्मधारा
वर्तमान समय में बढ़ता हुआ तनाव आज लोगों के जीवन में इस कदर प्रवेश कर गया है कि उसके कारण नित नए रोग व समस्याएं बढ़ रही हैं। आज दुनियाभर में तनाव के कारण रोगग्रस्त होने वाले मरीजों की संख्या तेजी के साथ बढ़ रही है, क्योंकि लंबे समय तक हमारे तन व मन में तनाव का रहना तन व मन, दोनों को बीमार बना रहा है। ध्यान देने वाली बात यह है कि तनाव ग्रस्त व्यक्ति के आसपास रहने वाले लोगों को भी यह अपनी गिरफ्त में सहजता से ले लेता है। देखा जाए तो हमने स्वयं ही अपने जीवन में तनाव के अनेक कारण पैदा किए हैं। जैसे-जैसे जीवन में तनाव बढ़ रहा है, उसी के साथ नए-नए रोग भी बढ़ रहे हैं, क्योंकि जीवन में आने वाला तनाव उस अनुपात में नहीं घट रहा है, जिस अनुपात में वह बढ़ रहा है। चिकित्सकों का यह मानना है कि लगभग 90 प्रतिशत मरीज अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए स्वयं जिम्मेदार होते हैं। जब व्यक्ति के मस्तिष्क को पूरा आराम नहीं मिल पाता है और उस पर हमेशा एक दबाव बना रहता है, तो उस पर तनाव हावी हो जाता है। चिकित्सकीय भाषा के अनुसार तनाव अर्थात् शरीर की होमियोस्टैटिस में गड़बड़ी। यह वह अवस्था है जो किसी भी व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक कार्य प्रणाली को गड़बड़ा देती है। अनेक वैज्ञानिक शोधों के अनुसार तनाव के दौरान व्यक्ति के शरीर में कई तरह के शारीरिक व जैविक बदलाव होते हैं, जिनसे शरीर में कई हार्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है, जिनमें एड्रिनेलिन और कॉर्टिसोल प्रमुख हैं। इनकी वजह से दिल का तेजी से धड़कना, पाचन क्रिया का मंद पड़ जाना, रक्त का प्रवाह प्रभावित होना, सिरदर्द रहना, नर्वस सिस्टम की कार्यप्रणाली गड़बड़ा जाना और इम्यून सिस्टम का कमजोर होना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। लगातार तनाव बने रहने से शरीर पर इनका बुरा प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, जो लोग प्राय: अधिक तनाव में रहते हैं, उनमें बुढ़ापे के लक्षण प्रकट होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। शरीर स्ट्रेस हार्मोन बनाता है, जिससे शरीर में जैविक बदलाव होने लगते हैं। तनाव के दौरान नींद, खान-पान व शारीरिक सक्रियता पर बुरा असर पड़ता है, जिससे असमय बुढ़ापा आने लगता है। तनाव अस्थमा की शुरुआत का कारण भी हो सकता है। तनाव के कारण अस्थमा के लक्षण गंभीर हो सकते हैं।