दमा रोगी, लेकिन फतह किए 7 ज्वालामुखी शिखर
   Date20-Mar-2020

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नयी दिल्ली ठ्ठ 19 मार्च (वार्ता)
सात महाद्वीपों में से प्रत्येक के उच्चतम ज्वालामुखी पर चढऩे का अभूतपूर्व कारनामा करने वाले पहले भारतीय पर्वतारोही सत्यरूप सिद्धांत का नाम उनकी असाधारण उपलब्धि के लिए प्रतिष्ठित 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्डÓ में नामांकित किया गया है।
प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन ने कहा था, खतरनाक ऐल्प पर चढऩे की खुशी के बराबर कोई खुशी नहीं है; लेकिन यह एक ऐसी खुशी है जो उन लोगों के लिए सीमित है जो इसमें खुशी पा सकते हैं। भारतीय पर्वतारोही सत्यरूप दुनिया में सबसे खतरनाक शिखर पर विजय प्राप्त कर राष्ट्र के लिए इन भविष्यवाणियों को चरितार्थ कर रहे हैं। उन्होंने सात महाद्वीपों में से प्रत्येक के उच्चतम ज्वालामुखी पर चढऩे का अभूतपूर्व कारनामा किया है। ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय हैं। इस असाधारण उपलब्धि के लिए सिद्धांत का नाम प्रतिष्ठित लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नामांकित किया गया है। गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के बाद बेंगलुरु के 37 वर्षीय पर्वतारोही का नाम अब लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के प्रतिष्ठित सूचकांक में चमक रहा है। ग़ौरतलब है कि उन्होंने पिछले साल जनवरी 2019 में यह उपलब्धि हासिल की थी लेकिन हाल में उन्हें इसकी आधिकारिक स्वीकृति और प्रमाण पत्र प्राप्त जारी किया गया है। उन्होंने अंटार्कटिका के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी माउंट सिडली पर चढ़ाई की थी। सत्यरूप दुनिया के सबसे कम उम्र के पर्वतारोही होने का विश्व रिकॉर्ड रखते हैं, जिसमें प्रत्येक महाद्वीप के उच्चतम पर्वत के 7 शिखर शामिल हैं, जिसमें माउंट एवरेस्ट भी शामिल है। उन्होंने कई अन्य प्रतिष्ठित रिकॉर्ड भी हासिल किए हैं जैसे एशिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स, इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स, चैंपियंस बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स, ब्रिटिश बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स आदि।