आर्थिक सुदृढ़ता की बुनियादी शर्त आयकर भुगतान
   Date20-Mar-2020

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जयंतीलाल भंडारी
लं बे समय से दुनिया की वित्तीय और शोध संगठनों की रिपोर्टों में भारत के बारे में यह कहा जाता रहा है कि भारत के आर्थिक विकास की सबसे बड़ी चुनौती कर संबंधी जटिलताएं हैं। साथ ही यह भी कहा जाता है कि देश जब करों के सरलीकरण के रास्ते पर बढ़ेगा, तभी तेज आर्थिक विकास हो सकेगा। ऐसे में जुलाई 2017 में अप्रत्यक्ष करों के लिए जीएसटी लागू किए जाने के बाद अब सरकार प्रत्यक्ष कर सुधार (डायरेक्ट टैक्स रिफॉर्म यानी डीटीआर) की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है।
यह बात उल्लेखनीय है कि एक फरवरी, 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते वक्त प्रत्यक्ष कर सुधारों को लेकर तीन बड़ी घोषणाएं की थीं। अब वक्त है इन्हें अमली जामा पहनाने का। ये घोषणाएं थीं- एक, प्रत्यक्ष कर विवादों के समाधान के लिए विवाद से विश्वास योजना। दो, अर्थव्यवस्था को गतिशील करने के लिए उपभोग खर्च बढ़ाने वाली आयकर की नई व्यवस्था और तीसरी, करदाताओं के अधिकारों के लिए करदाता चार्टर को लागू करना।
देश में आजादी के बाद पहली बार प्रत्यक्ष कर विवादों के समाधान के लिए हाल में चार मार्च को लोकसभा में मंजूर की गई 'विवाद से विश्वास योजनाÓ पर करदाताओं के साथ-साथ देश के आर्थिक जगत की भी निगाहें लगी हैं। देश में पहली बार इस साल पांच फरवरी को वित्त मंत्री ने प्रत्यक्ष कर विवादों के समाधान की 'विवाद से विश्वास योजनाÓ लागू करने के लिए लोकसभा में प्रत्यक्ष कर विधेयक पेश किया था। फिर इसे 12 फरवरी को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत 31 मार्च तक विवादित बकाया कर का भुगतान करने पर करदाता को कर पर लगाने वाले ब्याज एवं जुर्माने से छूट दी जाएगी।
यह अवधि जरूरत के मद्देनजर बढ़ाई जा सकेगी। उल्लेखनीय है कि करीब प्रत्यक्ष कर विवादों के चार लाख तिरासी हजार मामलों में 30 नवंबर, 2019 तक नौ लाख छियानवें हजार आठ सौ उनतीस करोड़ रुपए का कर फंसा हुआ है। इसमें पांच लाख दो हजार एक सौ सत्तावन करोड़ रुपए कॉरपोरेट टैक्स से संबंधित हैं और बाकी चार लाख चौरानवें हजार छह सौ इकहत्तर करोड़ रुपए आयकर संबंधी मामलों के हैं। इस योजना को सफल बनाने के लिए सरकार कितनी दृढ़ संकल्प है, इसका अनुमान हाल में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के द्वारा प्रत्यक्ष कर से संबंधित अधिकारियों को भेजे गए उस परिपत्र से लगता है, जिसमें कहा गया है कि भविष्य में प्रत्यक्ष कर से संबंधित आधिकारियों की वार्षिक वेतनवृद्धि और पदोन्नति विवाद से विश्वास योजना के तहत उनके द्वारा निपटाए गए मामलों पर निर्भर करेगी।
नई प्रत्यक्ष कर समाधान योजना के तहत करदाता अपनी पिछली अतिरिक्त आय का खुलासा कर सकेंगे। इस योजना के तहत आयुक्त अपील, आयकर अपील न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में लंबित प्रत्यक्ष कर विवादों के साथ-साथ मध्यस्थता और ऋण वसूली पंचाटों में लंबित मुकदमों, कर संशोधन और जब्ती के छोटे मामले भी इसमें शामिल किए गए हैं। इनके निपटान में ब्याज, जुर्माने और अभियोजन की छूट की पेशकश की गई है।
यह योजना 30 जून, 2020 तक जारी रहेगी। यदि कर बकाया केवल विवादित ब्याज और जुर्माने से जुड़ा है तो योजना में घोषित निर्धारित अंतिम तिथि तक विवाद का निपटारा करने पर विवादित जुर्माने/ब्याज की पच्चीस फीसद राशि का भुगतान करना होगा। उसके बाद यह राशि तीस फीसद हो जाएगी। माना जा रहा है कि प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान योजना आर्थिक सुस्ती से निपटने का कारगर हथियार साबित हो सकती है। अगर इस योजना पर ईमानदारी के साथ काम हुआ तो सरकारी खजाने को करीब नौ लाख करोड़ रुपए की एक बड़ी धनराशि उपलब्ध हो सकती है, साथ ही मुकदमों पर सरकार का होने वाला खर्च भी घटेगा।
आयकर भुगतान को सरल बनाने के लिए वित्त मंत्री ने बजट के तहत आयकरदाताओं को पहली बार दो विकल्प दिए हैं। या तो आयकरदाता पिछले वर्ष के बजट में दी गई निवेश पर आयकर छूटों का लाभ ले सकता है या फिर नए बजट की आयकर छूटों का। चूंकि नया बजट एक अप्रैल, 2020 से लागू होगा, इसलिए देश के इतिहास में पहली बार करदाता चार्टर भी लागू हो जाएगा। बजट में आयकर अधिनियम में एक नई धारा 119 (ए) जोडऩे का प्रस्ताव किया गया है। यह धारा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को एक करदाता चार्टर अपनाने एवं घोषित करने के लिए अधिकृत करती है। आयकर अधिनियम में नई धारा जोड़े जाने के बाद सीबीडीटी के पास आयकर अधिकारियों को दिशा-निर्देश और आदेश जारी करने की शक्ति मिल जाएगी।
यह बात भी महत्वपूर्ण है कि दुनियाभर में करीब चालीस देशों में ऐसे करदाता चार्टर बने हुए हैं। भारत को एक कठोर कर नियमन वाले देश के के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में इस चार्टर से करदाताओं का भरोसा बहाल करने में मदद मिलेगी। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि नए करदाता चार्टर को तैयार करते समय कानून-निर्माताओं को करदाताओं के प्रति जवाबदेही भी दिखानी होगी। करदाता चार्टर में कर विवरण सूचना की निजता, कारोबार संबंधी आंकड़ों की गोपनीयता और औपचारिक समाधान प्रक्रिया से इतर एक शिकायत निपटान प्रणाली को भी शामिल किया जाना होगा। एक करदाता चार्टर भले ही करदाता को अधिकार दे देगा, लेकिन उसके प्रभावी होने के लिए लोगों की मानसिकता में बदलाव और कर अधिकारियों के भीतर जवाबदेही की भावना लाने की भी जरूरत है।
अब जब कुछ प्रत्यक्ष कर सुधारों पर काम शुरू हो गया है, तब करदाता नई प्रत्यक्ष कर संहिता और नए आयकर कानून पर नजरें लगाए बैठे हैं। रंजन समिति की रिपोर्ट में प्रत्यक्ष कर कानूनों में व्यापक बदलाव और वर्तमान आयकर कानून को हटाकर नए सरल व प्रभावी आयकर कानून लागू करने की बात कही गई है। नए आयकर कानून में छोटे करदाताओं की सहूलियत के लिए कई प्रावधान सुझाए गए हैं। अकलन की प्रक्रिया सरल किए जाने और आयकर कानून के किसी प्रावधान को लेकर करदाता सीधे केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड से व्यवस्था ले सकेंगे।
भले सरकार कर सुधारों की दिशा में बढ़ रही है, लेकिन करदाताओं को इनका लाभ तभी मिल पाएगा, जबकि करदाता ईमानदारी से अपने करों का भुगतान करेंगे। सबसे बड़ी समस्या यह है कि देश में अभी सिर्फ डेढ़ करोड़ लोग ही आयकर देते हैं। स्थिति यह है कि देश के केवल तीन लाख लोगों ने ही अपनी आय पचास लाख रुपए सालाना से अधिक घोषित की है। केवल दो हजार दो सौ पेशेवरों ने ही अपनी आय एक करोड़ से अधिक बताई है। जबकि पिछले पांच साल में तीन करोड़ लोग व्यापार के सिलसिले में या घूमने के लिए विदेश गए और पिछले पांच साल में डेढ़ करोड़ से ज्यादा महंगी कारें खरीदी गई हैं। ऐसे लोग अगर ईमानदारी से कर नहीं चुकाते हैं तो इसका बोझ ईमानदार करदाताओं पर पड़ता है।
देश में अगर सभी करदाता भी ईमानदारी से कर देने की संस्कृति विकसित कर लें तो ज्यादातर समस्याओं का समाधान हो सकता है। इससे ईमानदार करदाता तो लाभान्वित होंगे ही, देश की अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगी। साथ ही सरकार को भी इस तरह की नीतियां बनानी होंगी, जो हर करदाता, खासतौर से छोटे करदाताओं के हितों के अनुकूल हों। कर प्रणाली की जटिलता को लेकर लोगों में जो भय व्याप्त है, उन्हें दूर करना होगा। तभी भारत 2025 तक पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना पूरा कर सकता है।