बजट का मंत्र विकास और विश्वास...
   Date09-Feb-2020

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ब्रेक
के बाद
शक्तिसिंह परमार
ब जट एक ऐसा शब्द है, जिसमें किसी व्यक्ति, संस्थान, संगठन, समाज, राज्य और राष्ट्र के वार्षिक आय-व्यय का लेखा-जोखाभर नहीं रहता है..,बल्कि यह वर्षभर के उस समग्र विश्लेषण का आईना भी है, जिसमें आर्थिक प्रबंध की एक ऐसी तैयारी होती है...जिसमें संतुलन बना रहे, विकास और विश्वास की गति निर्बाध रूप से जारी रहे..,क्योंकि किसी भी तरह का आर्थिक असंतुलन अनेक समस्याओं का कारण बनता है...इसलिए विकास और विश्वास का संतुलन बनाए रखने के लिए आर्थिक रूप से दूरदृष्टि का परिचय देते हुए ऐसे बजट प्रावधान और घोषणाएं की जाती हैं, जिनको वर्षभर में हरहाल में भी अमल में लाया जाए और जो वादे किए गए हैं और नीतियां लागू की गई हैं, उनका परिवर्तन जन-जन तक लाभकारी रूप में पहुंच सके...वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपनी निर्मल भावनाओं के जरिए जो बजट सदन में रखा है, वह अनेक मायने में महत्वपूर्ण भी है..,क्योंकि इस आम बजट 2020-21 की बजट थीम प्रमुख रूप से 'महत्वाकांक्षी भारतÓ, 'सबका आर्थिक विकासÓ और 'जिम्मेदार समाजÓ के रूप में रही है...अगर इस थीम पर विश्लेषणात्मक दृष्टि डालें तो यह पता चलता है कि महत्वाकांक्षी भारत किस तरह से व्यापक बदलाव के जरिए आगे बढऩे को तैयार है..? सबका आर्थिक विकास के मायने यही है कि अमीर-गरीब-मध्यमवर्ग से लेकर प्रत्येक वर्ग के लिए बजट में कुछ न कुछ राहतें और संभावनाएं निहित हैं...जिम्मेदार समाज के रूप में बजट का प्रमुख पहलू यही है कि आप (नागरिक) करदाता के रूप में या फिर योजनाओं, राहतों के प्राप्तकर्ता के रूप में अपनी जिम्मेदार भूमिका का ईमानदारी से निर्वाह करें...केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार की दूसरी पारी के पहले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना पहला पूर्ण बजट 2020-21 वह भी अब तक के सबसे लंबे बजट भाषण (02.40 घंटे) के रूप में पेश किया... जो कि 30.42 लाख करोड़ का है...इसमें 2.10 लाख करोड़ विनिवेश से जुटाने का लक्ष्य भी रखा गया है....यही नहीं, बजट की यह विशेषता भी है कि इसमें 12300 करोड़ रु. स्वच्छ भारत मिशन के लिए रखे गए हैं...कहने का तात्पर्य यही है कि वैसे तो स्वच्छता व्यक्तिगत रूप से हर किसी की जिम्मेदारी है...जिसे बिना खर्च के व्यक्ति निर्वाह करे तो पूरा देश स्वच्छ हो सकता है..,लेकिन ऐसी प्रेरणा के लिए भी सरकार को स्वच्छता बजट का आवंटन करना पड़ रहा है...इसलिए यह स्वच्छता बजट व्यक्तिश: जिम्मेदारी का पाठ भी पढ़ाता है...क्योंकि आजादी के बाद पहली बार बजट में आयकर (इनकम टैक्स) के दो विकल्प रखे गए हैं...नई दरों में 70 तरह की रियायतें न मिलने की भी व्यवस्था भी की गई है...जबकि बैंक में रखी रकम सुरक्षित रहेगी..,इसकी गारंटी के लिए अब बीमा रकम एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख करना बजट की बड़ी विशेषता है...जो बैंकों के प्रति जनविश्वास को बढ़ाएगा...
निर्मला सीतारमण के इस निर्मल नीति-नीयत से प्रस्तुत बजट की उपलब्धि, उम्मीदें और पहली बार वाले प्रायोगिक प्रावधानों पर नजर डालें तो यह बजट की विशेषता विकास-विश्वास के लक्ष्य और भविष्य की तैयारी का खाका भी स्पष्ट रूप से पेश कर रहा है...क्योंकि बजट में न केवल रेल, बैंक, पर्यटन, बुनियादी ढांचा, ग्रामीण भारत और बाजार-अर्थव्यवस्था को साधने, सहयोग करने के प्रावधान शामिल हैं..,बल्कि बजट में पहली बार शिक्षा, रोजगार, युवा, महिलाएं, व्यापारी और स्वास्थ्य जैसे बिंदुओं पर भी विशेष रूप से फोकस किया गया है...इन सभी का विश्लेषणात्मक रूप से आकलन करें तो यह स्पष्ट होता है कि निर्मला का निर्मल बजट समग्र दृष्टि का भाव लिए हुए है...
बजट उपलब्धि में यह बात प्रमुख रूप से शामिल है कि सरकार पर कर्जा यानी ऋण घटकर 2019 में जीडीपी के 48.7 प्रतिशत पर पहुंच गया है...जीएसटी की वजह से इंस्पेक्टर राजव्यवस्था खत्म हुर्ई है...यही नहीं, परिवार की मासिक खर्च में 4 प्रतिशत की बचत भी दृष्टिगोचर हुई है...पिछले दो वर्ष में देश में 60 लाख नए करदाताओं को जोडऩे में सफलता मिली है...तभी तो भारत विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है...अगर बजट से लगी उम्मीदों पर नजर डालें तो सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है...पानी की समस्या से जूझ रहे 100 जिलों में विशेष उपाय करने, आयुष्मान योजना में आर्टिफिशियल इंटिलिजेंस का उपयोग करने और देश के हर घर में पाइप लाइन के जरिए साफ-स्वच्छ पानी पहुंचाने...यानी हर शहर में बिना नमक का पानी पहुंचाने की वचनबद्धता है...ये ऐसे बिंदु हैं, जो बजट की समग्रता को रेखांकित करते हैं...क्योंकि पहली बार बजट में वित्त मंत्री ने महानगरों में बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए 4400 करोड़ की व्यवस्था की है...साथ ही आयकर दाताओं के लिए पहली बार टैक्स चार्टर लाने की भी घोषणा की गई है...पहली बार बजट न केवल भारतीय संस्कृति की झलक लिए था, बल्कि बजट में हिन्दी-संस्कृत-तमिल और कश्मीरी भाषाओं की कविता-शायरी का समावेश भी सबके समान विकास और विश्वास को बढ़ावा देने का निमित्त बना...क्योंकि बजट प्रावधानों से अर्थव्यवस्था की डगमगाती कश्ती और आर्थिक सुस्ती को साधने के प्रयास की झलक मिल रही है...
वित्तीय बजट 2020-21 में पहली बार कृषि-कृषकों के हित में व्यापक कार्ययोजना सामने आई है...क्योंकि 'जय किसानÓ से ही 'जय भारतÓ का नारा फलीभूत होगा...इसी को ध्यान में रखकर 16 सूत्रीय फार्मूला किसानों के लिए तैयार किया गया है...क्योंकि मुख्य लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय दोगुना करना है...100 जिलों में किसानों के लिए पानी की उचित व्यवस्था ताकि सिंचाई का लक्ष्य पूरा किया जा सके...धनलक्ष्मी योजना के जरिए महिला किसानों को बीज से जुड़ी योजनाओं से जोड़कर नए परिवर्तन की पहल हुई है...प्रधानमंत्री कुसुम योजना में 20 लाख किसानों को सोलर पम्प देने, किसान ऋण चलाने और कृषि-खाद उत्पादों की उचित आपूर्ति व भंडारण की भी चिंता बजट में झलकती है...इसलिए बजट कृषि-कृषकों के विकास और विश्वास को बढ़ावा देता है...
अगर मातृशक्ति के संदर्भ में बजट को देखें तो पहली बार महिलाओं से जुड़ी योजनाओं पर 28,600 करोड़ खर्च होंगे...युवा आबादी के मान से शिक्षकों, नर्स, पराचिकित्साकर्मी के कौशल सुधार (स्कील डेवलपमेंट) हेतु विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम एवं सभी इंफ्रा एजेंसियों में युवाओं के लिए स्टार्टअप भागीदारी सुनिश्चित करने की पहल हुई है...किसी भी देश के विकास का आधार शिक्षा होती है, इसलिए सरकार ने बजट में नई शिक्षा नीति लाने के लिए पहली बार व्यापक बजट का प्रारूप रखा है...सबको स्वास्थ्य सुविधाएं मिले, इसके लिए पीएम जन आरोग्य योजना के लिए 112 आकांक्षी जिलों में अस्पताल बनाने और 2025 तक टीबी खत्म करने के साथ ही 2024 तक प्रत्येक जिले में जन औषधि केंद्र खोलने की घोषणा इस बात का विश्वास दिलाती है कि 'सबको शिक्षा-स्वास्थ्यÓ सरकार का प्राथमिक लक्ष्य है...व्यापार को बढ़ावा देने हेतु विशेष रूप से छोटे व्यापारियों के लिए निवेश में वृद्धि को बढ़ाने एवं अधिक निर्यात ऋण के लिए निर्विक योजना शुरू करने के साथ ही एकल खिड़की व्यवस्था को भी मजबूत करने की योजना बजट में झलक रही है...रोजगार किसी भी देश के लिए और सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में रहता है...इसलिए सरकार ने नए इंजीनियरों को शहरी निकाय में एक साल की इंटरशिप योजना के जरिए कार्यकुशलता को बढ़ाने की पहल को भी बजट में प्रमुखता से जगह दी है...कुल मिलाकर आम बजट 2020-21 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आमजन से लेकर खास, मध्यमवर्ग, गरीब, व्यापारी, नौकरीपेशा को साधने के साथ ही उनके विकास और विश्वास के मंत्र से ऐसा संतुलन कायम किया है, जो देश की प्रगति का आधार बनेगा..,क्योंकि जब जनता का बजट के प्रति विश्वास कायम रहेगा, तभी तो देश विकास की रफ्तार को बनाए रखने में सफल होगा...निर्मला का निर्मल बजट इसी पवित्र ध्येय की पूर्ति का आधार है...