मनुष्य वही, जो मनुष्य के काम आए
   Date09-Feb-2020

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उज्जैन द्य स्वदेश समाचार
शनिवार को लघु उद्योग भारती एवं सेवा भारती के सहयोग से माधव सेवा न्यास का एक और सेवा प्रकल्प मक्सी रोड उद्योगपुरी में लघु उद्योग भारती के भवन में प्रारंभ हो गया। बालाजी तौलकांटा के समीप स्थित इस प्रकल्प का नाम माधव चिकित्सालय रहेगा। यहां प्रतिदिन सायं 4 से रात्रि 8 बजे तक दक्ष चिकित्सक द्वारा सेवा दी जाएगी। मौका आने पर मरीज को अस्थायी रूप से उपचार देने हेतु भर्ती भी किया जाएगा। इस प्रकल्प का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अ.भा. सेवा प्रमुख पराग अभ्यंकर ने किया।
दीप प्रज्ज्वलन से प्रारंभ कार्यक्रम में विशेष अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र संघचालक अशोक सोहनी, कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर नारायण तेजनकर, माधव सेवा न्यास के अध्यक्ष विजय केवलिया एवं लघु उद्योग भारती के प्रांत सचिव चरणजीतसिंह कालरा भी मंचासीन थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता पराग अभ्यंकर ने कहा कि जो समाज के लिए विचार करता है, उसमें मानवता रहती है। मनुष्य वही है, जो मनुष्य के लिए काम आए। यदि हममें मानवता के गुण नहीं हैं तो हम मनुष्य नहीं हैं। सभी की सेवा करने का भाव, भूखे को भोजन देना, मन में दया का भाव रहना आदि व्यक्ति के विकास में भूमिका निभाता है। सम्मान से जीने का अधिकार हर व्यक्ति को है। हर व्यक्ति जन्म लेता है, निर्धारित कर्म करता है। शास्त्रों में लिखा है कि सारा जीवन चलाते हुए किसी के काम आएं। अपना जीवन चलाना भारतीय संस्कृति का द्योतक नहीं है। सभी धर्मों से ऊपर सेवा का धर्म माना गया है। सेवा, जीवन की आवश्यकता है। भगवान ने कुछ करने योग्य बनाया है तो वह केवल सेवा है। समाज ही इसके लिए शक्ति प्रदान करता है। हमने जो अर्जित किया है, उसका अहंकार निमित्त हो तो सेवा उसे विलोपित कर देती है। श्री अभ्यंकर ने कहा कि सेवा की एक और कड़ी माधव चिकित्सालय के रूप में प्रारंभ हो गई है। देशभर में सेवा भारती के 1 लाख 50 हजार सेवा कार्यक्रम चल रहे हैं। देश के भीतर कई कठिनाइयां हैं। देश की सेवा करने वाले जवानों के शहीद होने पर उनके परिवार के लिए तो कई कार्यक्रम चलते हैं। सेवा भारती के द्वारा आतंकवादियों के मरने के बाद उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए छात्रावास एवं विद्यालय चलाया जा रहा है। सुनने में यह अजीब लगता है, लेकिन आतंकवादी के बच्चों का कोई सीधा दोष नहीं रहता। इसका उदाहरण है कि ऐसे ही एक छात्रावास में जब अखिल भारतीय अधिकारी गए तो छात्रों से चर्चा में एक छात्र ने कहा कि वह बड़ा होकर आतंकवादी बनेगा और सेना के जवानों को मारेगा, क्योंकि उसके पिता को सेना के जवान ने गोली मारी थी। तीन वर्ष बाद उसी छात्र ने चर्चा में कहा कि वह बड़ा होकर फौजी बनेगा और देशसेवा करते हुए आतंकवादियों को समाप्त करेगा। उससे पूछा गया कि तीन वर्ष पूर्व तो उसने कुछ और कहा था? इस पर उसने कहा कि उसे यहां तीन वर्ष रहकर समझ में आ गया कि यहां पर धर्म-मजहब से जोड़कर भेदभाव नहीं किया जाता। राष्ट्र के लिए समर्पित होना और राष्ट्र भाव ही सबकुछ होता है। वह अपने देश के लिए अपना सबकुछ समर्पित करेगा। यह उदाहरण बताता है कि सेवा का भाव मनुष्य के बुरे भाव भी बदल देता है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत एवं शाल-श्रीफल-स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान विजय केवलिया, गोविंद शर्मा, गिरीश भालेराव ने किया। सेवा देने वाले डॉ. सतीश शर्मा को अतिथियों ने सम्मानित किया। इस अवसर पर योगेश शर्मा, बलराज भट्ट, शंभुप्रसाद गिरी, समीर मूंदड़ा, लखन धनगर, श्रीपाद जोशी, पारस गेहलोत, चिंतामणि मालवीय, मीना जोनवाल, सोनू गेहलोत, ओम जैन, निलेश चंदन, महेश गुप्ता, उल्लास वैद्य, नेमीचंद जैन, रवि सोलंकी, रितेश सोनी, गौतम शर्मा, राजेश मिश्रा, सीमा वैद्य, पिंकी आर्य, रमा पंड्या, आनंद बांगड़, दिनेश भायल, फजल कोठारी, अतुल जैन, गोपालदास अग्रवाल, सतीश मुकाती, सुनील भावसार, राजेश अग्रवा, सुनील पटवा, आनंद दशोरा, कपिल कटारिया, अतित अग्रवाल, असीम जिंदल, संजय ज्ञानी आदि उपस्थित थे।