मोदी के आगे सदन में निरुत्तर विपक्ष...
   Date08-Feb-2020

vishesh lekh_1  
देश की सर्वोच्च पंचायत यानी संसद में गुरुवार का दिन अनेक मायने में महत्वपूर्ण रहा और इसे लंबे समय तक कम से कम विपक्ष तो याद रखेगा ही..,क्योंकि जब देशभर में उनके द्वारा जो नरेन्द्र मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा था...उसका बिंदुवार और तार्किक जवाब जब संसद के दोनों सदनों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रखा तो इस पूरी समयावधि में विपक्ष का चेहरा ही स्याह नहीं था..,बल्कि पूरा विपक्ष निरुत्तर नजर आया...स्वाभाविक भी था कि जब आप जनता को भय, भ्रम और अफवाह के जरिए देश के खिलाफ ही खड़ा करने का षड्यंत्र रचते हो और अराजकता के साथ ही हिंसक कृत्यों की आग रह-रहकर धधकाते हो तो उसका कहीं न कहीं तो पटाक्षेप होगा ही...जब नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), एनआरसी, एनपीआर का विपक्ष ने वर्ग-विशेष के खिलाफ बताकर विरोध किया और देशभर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, तब बार-बार यही दोहराया जा रहा था कि प्रधानमंत्री आखिर कुछ क्यों नहीं बोल रहे हैं..? लेकिन जब प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) ने उत्तरप्रदेश के हिंसक आंदोलन से लेकर शाहीन बाग तक के षड्यंत्र के तार पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े पाए...तो सबको समझ आ गया कि यह खेल देश के खिलाफ देश विरोधियों की साजिश है...यही बात तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान अपने संबोधन में दोनों सदनों में कही...प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर करारा हमला बोला..,बल्कि उनकी साजिशों, अफवाहों को भी बेनकाब कर दिया...यहां तक कहा कि अर्थव्यवस्था सही दिशा में है, निराशा का भाव देश में न फैलाएं...सीएए पर भ्रम फैलाने के बजाय मिलकर सोचें...प्रधानमंत्री ने जब बोलना शुरू किया तो अनुच्छेद 370, 35 ए से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों के विकास और वहां की वर्तमान प्रायोजित हिंसा से लेकर देश की अर्थव्यवस्था और संवैधानिक मर्यादाओं का भान भी संपूर्ण विपक्ष को रह-रहकर कराया...प्रधानमंत्री ने यहां तक कहा कि नए राज्यों के गठन का काम भाजपा के समय जिस तरह अटलजी की सरकार ने शांतिपूर्ण, सद्भाव और सम्मान के साथ किया, ऐसा कांग्रेस के समय कभी नहीं हुआ...तेलंगाना के बंटवारे के समय महीनों हिंसक आग व प्रदर्शन किसे याद नहीं है..? संविधान किस तरह से केंद्र सरकार के लिए पवित्र धर्मग्रंथ है...इसका भी उन्होंने अपनी ही शैली में विपक्ष को स्मरण कराया...कुल मिलाकर प्रधानमंत्री का उद्बोधन संसद में विपक्षी एकजुटता को ही तार-तार करने वाला नहीं रहा...बल्कि संवैधानिक दृष्टि से सरकार के निर्णय का सिर्फ सदन में विरोध हो सकता है...लेकिन विपक्ष ने जो रास्ता लगातार सड़कों पर हिंसक आंदोलन के जरिए पकड़ा, उसे प्रधानमंत्री ने संसद की अवमानना माना..,क्योंकि बात सही भी है, जब संसद में बहुमत के साथ मतदान करवाने के बाद किसी भी तरह के कानून को लागू किया गया है तो उसको देश के खिलाफ या संविधान के खिलाफ विपक्ष कैसे बता सकता है...पूरे संबोधन के दौरान विपक्ष निरुत्तर था...
दृष्टिकोण
आरबीआई ने फिर किया निराश...
गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष की ऋण एवं मौद्रिक नीति की छठी द्विमासिक समीक्षा की...इस दौरान आरबीआई ने जो निर्णय लिए हैं, कम से कम बजट के संदर्भ में वे नौकरीपेशा के साथ ही घर, मकान, कार व अन्य ऋण सुविधाओं पर ब्याज कटौती का सपना संजोने वालों के लिए निराशाजनक ही रहे हैं...क्योंकि बजट के बाद लोगों को उम्मीद थी कि सरकार ब्याज दरों में कुछ कटौती करके लोगों को राहत पहुंचाने का काम करेगी..,लेकिन इसके विपरीत आरबीआई ने महंगाई बढऩे व भविष्य की अन्य समस्याओं का हवाला देते हुए नीतिगत दरें यथावत रखने का फैसला लिया...रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने जो आशंकाएं जताई है, वह यह है कि महंगाई बढ़ेगी और वह चौथी तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई के रूप में बढ़कर 6.5 प्रतिशत हो जाएगी...जबकि विकास अनुमान 5.9 से 6.3 फीसद कम करके 6.0 पर कर दिया गया...ऐसे में रेपो दर 5.15 प्रतिशत, जबकि रिवर्स रेपो दर 4.90 प्रतिशत रखी गई है...कहने का तात्पर्य यही है कि अभी आगे महंगाई से लडऩे के लिए सरकार और जनता को तैयार रहना होगा..,जबकि आर्थिक मजबूती के लिए कुछ कड़े प्रावधानों के लिए भी जनता व सरकार को साथ मिलकर आगे कदम बढ़ाना होगा...तभी सतत विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने एवं आर्थिक सुस्तीवाड़े को खत्म करने में सफलता प्राप्त हो सकेगी...फिलहाल तो आरबीआई ने निराश ही किया है...