मेमने की चतुराई
   Date08-Feb-2020

prernadeep_1  H
प्रेरणादीप
एक बार एक भेडिय़ा भेड़ों के झुंड से एक मेमने को उठा लाया। जब वह जंगल में लाकर उसे मारने बैठा तो मेमना बोला-भेडि़ए मामा! अब आप मुझे उठा ही लाए हैं तो मारेंगे भी, और फिर खाएंगे भी। मगर मैं यूं ही मर गया तो मेरी एक इच्छा अधूरी रह जाएगी। क्या? भेडि़ए ने पूछा। मैंने सुना है कि आप गाना बहुत अच्छा गाते हैं। मेरी माँ भी आपकी बहुत प्रशंसा करती थी। क्या मेरे मरने से पहले आप एक गाना भी नहीं सुनाएंगे। मेमने की बात सुनकर भेडिय़ा फूलकर कुप्पा हो गया। वह बोला-क्यों नहीं भांजे! जब तू इतनी गुहार कर रहा है, तो एक गाना सुनाने में हर्ज क्या है? यह कहकर भेडिय़ा गाने लगा। गाते समय उसे यह ध्यान में भी नहीं रहा कि जंगल में शिकारी कुत्ते घूम रहे हैं। मेमना तो था ही इस लाग में कि कब भेडि़ए की बेसुरी आवाज सुनकर उसका मालिक गड़रिया और शिकारी कुत्ते आ जाएं। कुछ देर बाद वैसा ही हुआ। वो ऊपर को मुंह करके गा ही रहा था, तब तक मालिक व कुत्ते उसी स्थान पर आ गए। गड़रिया ने तो मेमना बचाया, और कुत्तों ने भेडि़ए को पकड़कर बीच में से फाड़ डाला। झूठी प्रशंसा से भेडि़ए के प्राण चले गए और चतुराई से मेमने के प्राण बच गए।