भक्ति में जीवन मृत्यु के पार पहुंचता है
   Date08-Feb-2020

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धर्मधारा
भगवान श्रीकृष्ण श्रीमद् भागवत गीता के इस श्लोक में वचन देते हैं-भक्ति के साधकों को, भक्ति के साधना-पथ पर गति व गमन करने वाले पथिकों को, कि जैसे ही तुम अपने द्वारा बनाई गई अस्मिता, अहंकार की दीवार गिरा दोगे, तुम्हारे उद्धार की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। क्योंकि अहंकार व अस्मिता की दीवार गिरते ही, परमात्मा का प्रवेश आरंभ हो जाता है। और परमात्मा के प्रकाश की किरणें हमें रूपांतरित करने लगती है। जब हमें भगवान के लिए मिटने का, समर्पित होने का आनंद आने लगता है, तो मिटना एक आनंददायक घटना बन जाती है। सारी कठिनाई बस, पहला कदम रखने की है। हमें डर लगता है कि अगर हम मिट गए तो? बस, इसी सवाल ने हमें डरा रखा है। एक दफा यदि हमें मिटने का जरा-सा भी मजा आ जाए, थोड़ा-सा भी इसका स्वाद मिलने लगे, तो बस, हम यही सोचने लगेंगे, यही कहने लगेंगे कि अब बचना नहीं, अब तो बस, मिटना है। संसार में जिसे सच्चे प्रेम का अनुभव होता है, उसे यदा-कदा अपने मिटने की झलकियां मिलती हैं। प्रेम के लिए अहं का घटना, हटना और मिटना जरूरी है। क्योंकि अहं के रहते किसी को कभी प्रेम की अनुभूति नहीं होती। भक्ति में पूरा का पूरा मिटना होता है। रत्ती-रत्ती कुछ भी नहीं बचना चाहिए। जैसे-जैसे हम मिटना शुरू हो जाते हैं, परमात्मा प्रवेश करने लगता है। भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, मेरे में चित्त लगाने वाले प्रेमी भक्तों का मैं शीघ्र ही मृत्युरूप संसार समुद्र से उद्धार करने वाला हूं। मृत्युरूप संसार समुद्र से, बात विचारणीय है। यह संसार समुद्र मृत्युरूप में है, यह अनुभूति कम ही हो पाती है, क्योंकि संसार को तो लोग जीवन मान लेते हैं। हालांकि, यहां पर मरना सभी को पड़ता है। प्रेम में, भक्ति में जीवन अनायास ही मृत्यु के पार पहुंच जाता है। जैसे-जैसे कोई मिटने को तैयार होता है। प्रेम में, भक्ति में, वह मृत्यु के ऊपर उठ जाता है। हमारे सांसारिक जीवन का प्रेम, हमारा क्षुद्र प्रेम मृत्यु पर छोटी विजय है और भक्ति-ईश्वरीय प्रेम, मृत्यु पर पूर्ण विजय है। इसीलिए जीवन में इतनी तड़प उटती है प्रेम को पाने के लिए। सच इसमें यह भी है कि जीवन की यह तड़प मृत्यु के ऊपर कोई अनुभव पाने की आकांक्षा है। संसार के सच्चे प्रेम में यदा-कदा यह क्षणिक अनुभव मिल जाता है। प्रेम यदि किसी तरह से प्रदूषित है तो नहीं हो पाता यह अनुभव। हाँ! प्रभु के प्रेम में पूर्णरूपेण यह अनुभव मिलता है।