भव्य मंदिर निर्माण की पहली ईंट...
   Date07-Feb-2020

vishesh lekh_1  
असंख्य हिन्दुओं की अटूट आस्था और अस्मिता की पर्याय अयोध्या है... अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण हो, यह सैकड़ों वर्षों से जन-जन की अभिलाषा व आकांक्षा रही है... इस पुनीत कार्य के लिए सहों संघर्ष और आंदोलनों के बाद वह घड़ी आ ही गई, जिसका हर किसी को इंतजार था... अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की सही मायने में पहली ईंट रखी जा चुकी है... क्योंकि जिन्हें मंदिर निर्माण की पूरी रूपरेखा बनानी है, योजनाबद्ध तरीके से मंदिर निर्माण के कार्यक्रम को आगे बढ़ाना है, उस जवाबदेह पक्ष ने आकार ले लिया है... जी हाँ, श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने 15 सदस्यीय स्वायत्त ट्रस्ट की घोषणा कर दी... इसी के साथ मंदिर निर्माण की प्रारंभिक प्रक्रिया या कहें कि मंदिर निर्माण का शुभारंभ हो चुका है... वैसे तो मंदिर निर्माण की पहली ईंट हिन्दू संगठनों एवं साधु-संतों ने 1989 में जन्मभूमि आंदोलन के दौरान कारसेवक रहे दलित कामेश्वर चौपाल के जरिये रख दी थी... अब वह प्रक्रिया बस आगे बढ़ाई जा रही है... ट्रस्ट का गठन करना और उसकी स्वतंत्रता की वचनबद्धता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सदन में रखना भी एक महत्वपूर्ण कड़ी है... क्योंकि यह सिर्फ मंदिर या स्मारक अथवा धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण भारतीयों के आराध्य स्वामी और भारतीय संस्कृति की मान-मर्यादा व चरित्र के प्रतीक श्रीराम की वह भूमि है, जिसे हम अयोध्या कहते हैं और अब इस स्थल को 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्रÓ नाम से पुकारा व पहचाना जाएगा... क्योंकि यह ट्रस्ट ही अब मंदिर निर्माण की हर तरह की बाधाओं को दूर करेगा... वृहद स्तर पर पार्किंग, श्रद्धालुओं के समूची सुविधा, सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्था, अन्य क्षेत्र, रसोई, गौशाला, प्रदर्शनी, संग्रहालय और सराय जैसी व्यवस्थाओं का प्रबंध भी ट्रस्ट करेगा... यही नहीं, कानूनन रूप से यह ट्रस्ट श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर निर्माण के लिए धन संग्रह व अन्य चल-अचल संपत्तियों को खरीदने, दान लेने के साथ ही अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति एवं तीर्थ स्थल की देखरेख का जिम्मा निभाएगा... यह शुरुआतभर है, उन करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं को फलीभूत करने की, जिन्होंने अपनी आंखों में भव्य मंदिर निर्माण का सपना संजोया है... इस ट्रस्ट में जो 15 सदस्य शामिल किए हैं, वे अपने-अपने क्षेत्र के गुणीजन एवं समाज में सर्वमान्य, सर्वस्वीकार्यता लिए हुए हैं... जिसमें के. पाराशरण, जिन्होंने मंदिर के लिए न्यायिक लड़ाई दशकों तक लड़ी या फिर शंकराचार्यजी ने जिन्हें हिन्दू धर्म की पहचान का प्रतीक माना जाता है... या फिर दलित कामेश्वर चौपाल हो, जिन्होंने कारसेवक के रूप में अपने योगदान को अमिट किया... या फिर अयोध्या राज परिवार के वंशज हो या फिर अयोध्या के प्रसिद्ध होम्योपैथिक डॉक्टर हो... या फिर शासन-प्रशासन के पक्ष हो... कहने का तात्पर्य यही है कि इन सभी के संयुक्त प्रयासों से करोड़ों भारतीयों का सपना साकार होने की पहल हो चुकी है... भव्य मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में ट्रस्ट गठन पहली ईंट माना जा सकता है...
दृष्टिकोण
भीड़ की बर्बरता की पराकाष्ठा...
धार जिले के मनावर में बोरलाई गांव में जिस तरह से किन्हीं भी कारणों से आक्रोशित हुई भीड़ ने बर्बरता की पराकाष्ठा को पार करते हुए जो हिंसक कृत्य किया है, उसकी माफी के लिए कोई शब्द नहीं हो सकता और ऐसे लोगों को सजा का स्वाद चखाये बिना ऐसी पाशविकता को रोका भी नहीं जा सकता... कितना वीभत्स दृश्य निर्मित हो रहा है कि पैसे न लुटाना पड़े या बदले में काम का वादा न करना पड़े, इसलिए सामने वाले से कैसे पीछा छुड़ाया जाए... इसके लिए लोगों को भ्रमित करने का खेल क्या कानूनी अपराध नहीं है..? जिन लोगों का बच्चा चोरी से दूर-दूर तक नाता नहीं, उन्हें सैकड़ों लोगों की भीड़ के बीच अफवाह फैलाकर धकेल देना एक षड्यंत्र है, जिसकी रोकथाम के लिए कठोर कार्रवाई की पहल प्रत्येक स्तर पर होना चाहिए... यह देखने में आया है कि जब से सरकारी स्तर पर खैराती सब्सिडी ने अपने पैर पसारे, काम करने से जी चुराने वालों की कोई कमी नहीं... अब तो ग्रामीण क्षेत्रों में रबी और खरीफ के मौसम में फसल कटाई के समय मजदूर मिलना मानो भगवान मिलने जैसा है... बस बुधवार को मनावर में जो लोग इन मजदूरों के हाथों अपनी जान गंवा बैठे या जान दांव पर लगा चुके, उनका इतना सा ही अपराध था कि उन्होंने विश्वास करके पैसा दिया था... ताकि वे उनके खेतों में समय पर काम करने आ जाएं... लेकिन जब काम नहीं किया तो पैसे वापसी सहज प्रक्रिया है, लेकिन पैसे वापस न करने और ऊपर से उन पर मौत दौड़ाने का यह बर्बरता व हिंसक कृत्य सामूहिक रूप से पूरे ग्राम को अपराधी बनाता है, क्योंकि अगर उन्होंने बच्चा चोरी किया था तो उन्हें बांधकर पुलिस के हवाले करना था, लेकिन ऑन द स्पॉट फैसला करना यानी कानून के राज को खुली चुनौती है...