उदारता
   Date07-Feb-2020

prernadeep_1  H
प्रेरणादीप
ए क फकीर ने जंगल में एक आदमी के रहने लायक छोटी सी झोपड़ी बनाई। एक रात को फकीर अपनी झोपड़ी में सोया था कि एक और फकीर आ गया। उसने दरवाजा खटखटाया और कहा कि भाई! हम पानी में भीग रहे हैं और ठंड से बीमार हो जाएंगे। इस झोपड़ी में जगह नहीं मिलेगी क्या? फकीर ने दरवाजा खोला और कहा कि इसमें सोने के लिए एक आदमी की जगह थी, परन्तु दो आदमी बैठ सकते हैं। आओ, हम बैठकर रात काट लें। मुसीबत को दोनों मिल-बांटकर बर्दाश्त कर लें।
उसी कोठरी में दोनों अपना गुजारा करने लगे। थोड़ी देर व्यतीत हुई कि एक और फकीर आया। उसने भी दरवाजा खटखटाया और आवाज लगाई, अरे भाई! हम पानी में भीग रहे हैं। ठंड के मारे सिकुड़ रहे हैं, बीमार हो जाएंगे। क्या इस कोठरी में हमको जगह नहीं मिल सकती? फकीर ने दरवाजा खोल दिया और कहा कि इसमें सोने के लिए एक आदमी की जगह थी, लेकिन हम दो आदमी भी बैठ सकते थे। अब चूंकि तीन आदमी आ गए, इसलिए खड़े हो करके हम तीन आदमी भी रात काट सकते हैं। आइए इस छोटी सी झोपड़ी में मिल-जुलकर हम समय काट लें। मनुष्य में इस तरह अध्यात्म उत्पन्न हो जाएं, तो दुनिया की समस्या हल हुए बिना रह सकती।