जो लोग कभी साइलेंट थे, वे आज वायलेंट
   Date07-Feb-2020

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नई दिल्ली 6 फरवरी (वा)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिक संशोधन कानून (सीएए)पर हो रहे विरोध प्रदर्शन के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए गुरुवार को कहा कि इस पर सबको मिल-बैठकर सोचने की जरूरत है और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है और इस पर निराशा नहीं फैलाई जानी चाहिए। साथ ही मोदी ने कहा कि देश के विभाजन के बाद जो लोग पाकिस्तान में रह गए थे उनमें से अधिकतर हमारे दलित भाई बंधु थे। अल्पसंख्यकों की दुहाई देने वाले लोग उनकी पीड़ा भी महसूस करें जो पड़ोस में अल्पसंख्यक बन गए , जो लोग कभी साइलेंट थे वे आज वायलेंट हैं।
प्रधानमंत्री ने संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर तीन दिन तक चली चर्चा का उत्तर देते हुए कहा कि सीएए पर विपक्ष लोगों को गुमराह कर रहा है। यह कानून वास्तव में देश के महापुरुषों राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, बाबा साहेब आम्बेडकर, पं. जवाहरलाल नेहरू और लालबहादुर शास्त्री की भावना के अनुरूप है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इससे किसी भी भारतीय नागरिक को कोई खतरा नहीं है। श्री मोदी ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और जनगणना को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए विपक्ष से इसका विरोध नहीं करने की अपील की और कहा कि इससे विपक्ष की गरीब विरोधी मानसिकता प्रकट होती तथा वह सिर्फ वोट बैंक की राजनीति कर रही है, जिससे देश में अविश्वास की स्थिति बनती है।
उन्होंने विपक्ष के अर्थव्यवस्था को लेकर किए गए हमलों का खारिज करते हुए कहा कि इसके मूल आधार मजबूत हैं और अर्थव्यवस्था को लेकर निराश होने की जरूरत नहीं है। श्री मोदी के जवाब के दोनों सदनों ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। राज्यसभा में विपक्ष के बहिर्गमन के बीच इस प्रस्ताव का अनुमोदन किया और लोकसभा में विपक्ष ने केवल अपना विरोध प्रकट किया। श्री मोदी ने दोनों सदनों में हिन्दी-उर्दू के कवियों और शायरों की पंक्तियों को उद्धृत करते विपक्ष पर तीखे प्रहार किए और कहा कि विपक्ष ठहर गया है और आगे बढऩे का नाम नहीं ले रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी पुरानी लीक से हट कर नई लकीर बना रही है।
संबोधन की मुख्य बातें
> सीएए के विरोध में जो हिंसा हुई उसे आंदोलन का अधिकार मान लिया गया, सीएए के बारे में जो भी प्रचारित किया जा रहा है, उसके बारे में सभी साथियों को खुद से पूछना चाहिए कि क्या उन्हें देश को गुमराह करना चाहिए। यह रास्ता सही नहीं हैं, हम सब मिल कर इस पर विचार करें।
> पहली बार जम्मू-कश्मीर में एंटी करप्शन ब्यूरो की स्थापना हुई, पहली बार वहां अलगाववादियों के सत्कार की परंपरा समाप्त हो गई। पहली बार जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ पुलिस और सेना मिलकर निर्णायक कार्रवाई कर रहे हैं।
> अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार जम्मू कश्मीर के गरीब सामान्य वर्ग को आरक्षण का लाभ मिला, पहली बार महिलाओं का ये अधिकार मिला कि वो अगर राज्य के बार विवाह करती हैं तो उनकी संपत्ति का अधिकार छीना नहीं जाएगा।
> उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंहजी ने लोकसभा में एक बात कही थी -स्रद्गद्वशष्ह्म्ड्डष्4 द्बठ्ठ ढ्ढठ्ठस्रद्बड्ड द्बह्य ड्ढद्गद्बठ्ठद्द द्धड्डह्म्द्वद्गस्र स्रह्वद्ग ह्लश श्चह्म्शह्लद्गह्यह्लह्य शठ्ठ ञ्जद्गद्यड्डठ्ठद्दड्डठ्ठड्ड द्बह्यह्यह्वद्ग. अटल जी की सरकार ने उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ बनाएं थे, पूरे सम्मान, शांति और सद्भाव के साथ।
> विभाजन के बाद जो लोग पाक में रह गए थे उनमें से अधिकतर हमारे दलित भाई थे। अल्पसंख्यकों की दुहाई देने वाले उनकी पीड़ा भी महसूस करें जो पड़ोस में अल्पसंख्यक बन गए , जो लोग कभी साइलेंट थे वे आज वायलेंट हैं।
> हिंदुस्तान का मुसलमान जिये और पाकिस्तान का हिंदू जिये। मैं इस बात को ठुकराता हूं कि पाकिस्तान के हिंदू पाकिस्तान के नागरिक हैं, इसलिए हमें उनकी परवाह नहीं करना चाहिए, यह बात लोहियाजी ने कही थी।
> महिला सशक्तिकरण का राष्ट्रपति के अभिभाषण में संक्षेप में जिक्र है। बहरहाल, सरकार ने सैनिक स्कूलों में बच्चियों की भर्ती शुरू की है। आकांक्षी जिले भी प्रतिस्पर्धी बन कर सहकारी संघवाद का श्रेष्ठ उदाहरण बन रहे हैं। इन जिलों से आकांक्षी कस्बे चुनने को कहा गया है।
> नार्थ ईस्ट अभूतपूर्व शांति के साथ आज भारत की विकास यात्रा का एक अग्रिम भागीदार बना है। 40-50 वर्षों से नॉर्थ ईस्ट में हिंसक आंदोलन चलते थे, लेकिन आज वो आंदोलन समाप्त हुए हैं और शांति की राह पर नॉर्थ ईस्ट आगे बढ़ रहा है।
> ेश में निराश होने का कोई कारण नहीं है। अर्थव्यवस्था के जो बेसिक मानदंड है, उनमें आज भी देश की अर्थव्यवस्था सशक्त है, मजबूत है और आगे जाने की ताकत रखती है। नार्थ ईस्ट में कांग्रेस और उनके मित्र दलों की सरकारें थीं। आप चाहते तो उनकी समस्य़ा पर सुखद समाचार आप ला सकते थे।