मनुष्य जीवन में सुख की कुंजी परोपकार
   Date07-Feb-2020

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धर्मधारा
ज ब भी हमारी कोई गलती हो, तो उसे स्वीकार करना भी समस्याओं को जटिल होने से बचाता है। जब हम अपनी गलतियाँ छिपाते हैं तो समस्याओं को उलझाने का काम करते हैं। यदि हमारी कोई गलती नहीं है और दोषारोपण किया जा रहा है, तो ऐसी परिस्थिति में भी किसी तरह का तनाव लेने की जरूरत नहीं; क्योंकि सच्चाई ज्यादा देर तक छिपती नहीं और षड्यंत्र या बुराई ज्यादा देर तक टिकती नहीं।
असहाय व्यक्ति की जब मदद की जाती है तो वह मदद इतनी बेशकीमती व महत्वपूर्ण होती है मानो डूबते हुए को तिनके का सहारा मिल गया हो। यदि किसी की मदद करना संभव न हो, फिर भी यथासंभव मदद के लिए केवल पूछ लिया जाए, बस, इतना ही कहने मात्र से व्यक्ति की मदद हो जाती है, मन को तसल्ली मिल जाती है। परेशान व्यक्ति के साथ कुछ समय बिताना, उसका हाल-चाल पूछना, उससे हँसी-मजाक करना, उसकी पसंद की चीजें लाना, निराशा में घिरे व्यक्ति को प्रोत्साहित करना, भरोसा दिलाना, आगे बढऩे के लिए प्रेरित करना आदि मदद करने के विभिन्न तरीके हैं, जिन्हें आजमाना चाहिए। अक्सर बीमार या परेशान व्यक्ति किसी सोच में डूबे रहते हैं व माथे को संकुचित करके सोचते रहते हैं। ऐसी स्थिति में उनके मन को कुरेदना चाहिए कि वे क्या सोच रहे हैं? इस बारे में विशेषज्ञों का यह मानना है कि मानसिक दु:ख झेल रहे व्यक्ति को उसकी सोच के साथ कभी अकेला नहीं छोडऩा चाहिए; क्योंकि ऐसा करने से उसकी समस्याएँ बढ़ती हैं। यदि प्रश्न पूछने पर उत्तर के रूप में नकारात्मक प्रतिक्रियाएँ मिलती हैं और उन्हें सुनने से ऐसा लगता है कि व्यक्ति बहुत निराश है तो उसे यह समझाना चाहिए कि ऐसी परिस्थितियों में इस तरह के नकारात्मक विचार आते हैं। इसलिए इन विचारों पर ध्यान न दें। परिस्थितियाँ इतनी बुरी नहीं हैं, जितना उनके बारे में सोचा जा रहा है। इसलिए अपने इस बुरे समय में भी कुछ अच्छा सोचा जाए; क्योंकि बुरा नहीं होगा, सब अच्छा होगा। दिलासा के दो शब्द, निराशा में डूबे हुए व्यक्ति को आशान्वित करते हैं, उसके रोते हुए चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, दु:खी चेहरे पर प्रसन्नता लाते हैं। हमारे छोटे-छोटे मदद के प्रयास किसी दु:खी व्यक्ति के आँसू पोंछ सकते हैं, किसी रोते हुए चेहरे पर मुस्कराहट वापस ला सकते हैं तो क्यों न हम इस ओर अपने कदम बढ़ाकर देखें? जीवन की खुशियाँ और संतुष्टि की चाबी यहाँ भी छिपी है।