दिल्ली का दंगल निर्णायक मोड़ पर...
   Date05-Feb-2020

vishesh lekh_1  
देश की राजधानी दिल्ली का विधानसभा चुनाव अपने पूरे रोमांच पर आ चुका है... इस सियासी दंगल को अगर निर्णायक मोड़ के रूप में देखें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह सिर्फ दिल्ली में कौन सत्ता पर काबिज होगा..? इसी का निर्णय नहीं करेगा, बल्कि दिल्ली के इस चुनाव से अनेक सारे ज्वलंत मुद्दों, समस्याओं और समसामयिक उलझनों या कहें जबरिया पैदा की गई चुनौतियां का भी समाधान निकलकर सामने आएगा... इस राजनीतिक संघर्ष में हर किसी की भूमिका अहम है और हर किसी का सबकुछ दांव पर भी लगा है... इसलिए जनता की अदालत से जो निर्णय आएगा, वह सिर्फ राजधानी दिल्ली की राज्य की राजनीति को ही नए तरीके से परिभाषित नहीं करेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति और भविष्य में राज्यों की राजनीति या सीधे-सीधे कहें कि भविष्य के राजनीतिक गठबंधन की गांठों को खोलने, बंद करने का निर्णय दिल्ली की जनता के हाथों में है... चुनाव प्रचार अपने चरम पर पहुंचने लगा है... 8 फरवरी को मतदान होगा... मतदान से पूर्व के ये तीन दिन भाजपा, कांग्रेस से ज्यादा आआपा के लिए करो-मरो साबित हो रहे हैं... क्योंकि जिन मुद्दों, बातों और वादों को लेकर ऐतिहासिक बहुमत के साथ आआपा ने सत्ता प्राप्त की थी, आज वह अपने उन्हीं खैरात बांटने वाली रीति-नीति के जाल में निरंतर उलझती जा रही है... तभी तो आआपा से दागी हुए अनेक मंत्री, विधायक और आआपा के वरिष्ठ नेता रहे आज भाजपा या कांग्रेस का दामन थामकर अरविंद केजरीवाल के खिलाफ ताल ठोंक रहे हैं... इसलिए अरविंद केजरीवाल की आआपा के लिए इस बार तिहरी चुनौती है... भाजपा-कांग्रेस के साथ ही आआपा के लोग ही उसे चुनाव प्रचार में झिड़कियां दे रहे हैं... जनता भी संभवत: यही बात दोहराने के मूड़ में नजर आ रही है... क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को ऐतिहासिक जनसभा के जरिए आआपा की नींद उड़ाने वाला दांव चल दिया है... प्रधानमंत्री ने चुनावी सभा में जो बातें कही, उनका सार यही है कि मतदाता दिल्ली में इस बार बदलाव को तैयार हैं... एकतरफा भी हो सकता है, जिसमें कांग्रेस-आआपा चारों खाने चित हो जाए, भाजपा को ऐतिहासिक बढ़त भी मिले... क्योंकि सोमवार को पहाडग़ंज क्षेत्र में गृहमंत्री अमित शाह की रोड शो में जो जनसैलाब उमड़ा, वह भगवा बयार के स्पष्ट संकेत कर रहा है... क्योंकि भाजपा का पूरा फोकस राष्ट्रीय मुद्दों, राष्ट्रीय अस्मिता, राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विकास पर केन्द्रित है... जबकि आआपा और कांग्रेस शाहीन बाग में चल रहे करीब पचास दिनों से अराजक आंदोलन में अपनी जीत के समीकरण ढूंढ रहे हैं... इन्हें हो सकता है कि दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे उन मतदाताओं से ज्यादा उम्मीद है, जो जैसे-तैसे मतदाता बन बैठे हैं.., लेकिन भाजपा के लिए यही सारे बिन्दु धनात्मक पक्ष के रूप में जुड़ते जा रहे हैं... क्योंकि शाहीन बाग में देश के खिलाफ नारेबाजी हुई है और देश के खिलाफ बोलने वालों को जनता ने चुनना बंद कर दिया है... यह हम लगातार रह-रहकर चुनाव में देख रहे हैं... इसलिए इस चुनावी दंगल की स्थिति भी स्पष्ट होने लगी है...
दृष्टिकोण
मातृ वंदन से प्रदेश का बढ़ा मान...
मातृ मृत्यु दर में कमी के साथ ही शिशु मृत्यु दर में भी कमी लाने और जच्चा-बच्चा को गर्भावस्था के समय उचित पोषण मिले, यह सिर्फ किसी समाज या परिवार की ही चिंता नहीं है, बल्कि अब सरकार भी इसे अपनी स्वयं व्यक्तिगत जवाबदेही के रूप में देखती है... तभी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी द्वारा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को जनवरी, 2017 में शुरू किया गया था... इसके तहत गर्भवतियों को पौष्टिक आहार के लिए सीधे उनके खाते में उक्त सहायता राशि भेजी जाएगी... इस योजना पर सीधे प्रधानमंत्री व राज्यों के मुख्यमंत्री निगरानी रखेंगे... इस मातृ वंदन योजना के अंतर्गत मुख्य लक्ष्य काम करने वाली महिलाओं की मजदूरी के नुकसान की भरपाई करने के लिए मुआवजा देना और उनके उचित आराम और पोषण को सुनिश्चित करना... गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य में सुधार और नकदी प्रोत्साहन के माध्यम से अधीन-पोषण के प्रभाव को कम करना... कुछ इस तरह के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को लेकर योजना शुरू हुई थी, वह योजना आज मध्यप्रदेश का भी मान बढ़ा रही है, क्योंकि प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों, केन्द्रशासित प्रदेशों और जिलों में जो स्थिति सामने आई है, उसमें एक करोड़ से अधिक राज्यों में मध्यप्रदेश को प्रथम और आंध्र को द्वितीय और हरियाणा को तृतीय पुरस्कार मिला है... अगर इसी गति से मध्यप्रदेश ने मातृ वंदन योजना को प्रभावी बनाए रखा हो और पारदर्शितापूर्वक योजना का क्रियान्वयन हुआ तो मध्यप्रदेश में मातृ शक्ति के सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत पहल होगी... जिसके सकारात्मक परिणाम भी मिलेंगे...