विश्व की मार्गदर्शक भारतीय संस्कृति
   Date28-Dec-2020

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धर्मधारा
ह मारी संस्कृति हमें यह सिखाती है कि प्रतिकूल से प्रतिकूल परिस्थितियों को भी आखिर सकारात्मक दिशा में एक खूबसूरत मोड़ कैसे दिया जा सकता है। अब कोरोना महामारी को ही ले लीजिए, इस समय सारी दुनिया हमारी अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और धर्म संस्कृति की अवधारणाओं की ओर लौटती प्रतीत होती है। हमारे अपने सांस्कृतिक मूल्य प्रकारांतर से ही सही, किंतु बेहतर जीवन जीने की सीख देते रहे हैं। हमारी धार्मिक अवधारणाएं विज्ञान के ज्ञान का किसी न किसी रूप में आधार रही है। कहानी के तत्वों की भांति प्रारंभ, विकास, चरमोत्कर्ष और अंत की प्रक्रिया से गुजरते हुए दुनिया की कहानी के बनने और बिगडऩे का सिलसिला, एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
परिवर्तन प्रकृति का अटल नियम है, इस नियम से परे आज का ज्ञान-विज्ञान भी नहीं। ऐसे में जब सारी दुनिया संकट के साये में सांस ले रही है, तब इसे भारतीय संस्कृति की परंपरा के अनुसार ही सकारात्मक मोड़ दिया जा सकता है। आदि-अनादिकाल से हमारी सभ्यता शून्य से शिखर की ओर अग्रसर रही है। अलग-अलग युगों की धार्मिक अवधारणाएं, हमारी अपनी जीवनशैली में सम्मिलित है। विकास की अंधी दौड़ के बावजूद इस दौड़ के अंध समर्थक हम कभी नहीं रहे। आज भी धर्मशास्त्रों के मूल नायकों के चरित्र एवं व्यवहार के अनुरूप हमें हमारा अपना आचरण और व्यवहार सुनिश्चित करने की सीख अपने ही घर के बुजुर्गों से मिलती रही है। यही सीख मूल संस्कारों का बीजारोपण करते हुए हमारे अपने जीवन को संस्कारित बनाती रही है। बीते दशकों में सारी दुनिया का स्वरूप क्या से क्या होता गया, लेकिन हम अपनी मूल संस्कृति से कल भी जुड़े हुए थे और आज भी जुड़े हुए हैं। हमारे नैतिक मूल्य, हमारी उच्चस्तरीय विचारधारा और हमारे सहज स्वाभाविक शालीन संस्कार, हमें गौरवान्वित करते हैं। (क्रमश:)