आफत के बीच मिली राहत...
   Date26-Dec-2020

vishesh lekh_1  
मध्यप्रदेश में कोरोना के कारण लागू हुई आधा दर्जन से अधिक शहरों की रात्रिकालीन कफ्र्यू की व्यवस्था को वापस ले लिया गया है...यानी अब इन शहरों में नियमों के चलते जिस तरह से 8 बजे से ही बाजार बंद होने का दबाव रहता था, उसे अब 10 बजे तक आसानी से खुला रखने से आर्थिक रूप से राहत मिलना जैसा ही है...वैश्विक महामारी कोरोना के कारण देश-दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है..,लेकिन इस बीच राहत वाली बात यह हो सकती है कि अनेक देशों में कोरोना वैक्सीन लगाना प्रारंभ हो चुकी है...तो अनेक देशों में तैयारियां अंतिम चरण में हैं...भारत में भी नए साल में कोरोना वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया तेज गति से प्रारंभ हो जाएगी...क्योंकि वैसे भी 28 दिसम्बर से यह काम शुरू होने वाला है...लेकिन यूरोपीय देशों में मंडराते कोरोना के नए रूप (स्ट्रेन) के खतरे में हर किसी को सांसत में डाल दिया है...हो भी क्यों नहीं..,क्योंकि आर्थिक गतिविधियां बड़ी मुश्किल से पटरी पर लौटने लगी थी..,ऐसे में ब्रिटेन व अन्य देशों के साथ पुन: हवाई यात्राएं रद्द करना आने वाले समय में आर्थिक स्थितियों को विकट करने का काम करेगा...क्योंकि जिस दिन पता चला कि कोरोना ने ब्रिटेन व अन्य देशों में अपना स्ट्रक्चर बदल लिया है...तभी से बाजार में भी भारी उठापटक का दौर चलता रहा...इस बीच अगर आर्थिक गतिविधियों को और आगे बढ़ाने की पहल हो रही है तो यह कोरोना जैसी महामारी वाली आफत के बीच में कुछ राहत के नए संकेत व संदेश हैं...मध्यप्रदेश में तो फिलहाल राज्य शासन ने इंदौर, भोपाल, रतलाम, विदिशा, उज्जैन में लागू रात्रिकालीन कफ्र्यू को हटा लिया है...यानी 10 बजे के बाद भी बाजार में रौनक बनाए रखने की इस पहल से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी...कोचिंग संस्थानों के लिए भी सारे नियम शिथिल किए गए हैं...लेकिन यह शर्त भी लागू रहेगी कि सामाजिक दूरी यानी शारीरिक दूरी के नियमों का इन कोचिंग संस्थानों को भी पालन करना होगा...जिस शैक्षणिक संस्थान में पहले 100 से 110 बच्चे बैठते थे, उसमें अब 50 से 55 के बीच भी बैठाना होंगे...लेकिन स्कूल, कॉलेजों के संबंध में भी फिलहाल इसी नियम को लागू रखकर आगे की कार्रवाई को आगे बढ़ाने का प्रशासन ने कोई निर्देश नहीं रखा..,क्योंकि फिलहाल 10वीं, 12वीं बोर्ड परीक्षा के विद्यार्थियों के लिए भी स्कूल खोलने की व्यवस्था लागू है...हालांकि फीस के मामले में उलझन बढऩे के कारण ऑनलाइन कक्षाओं के मान से विद्यार्थियों का कितना हितलाभ हो पाएगा..,यह भी हर किसी के सामने विचारणीय प्रश्न है...साथ ही राज्य शासन ने बार, पब, रेस्टोरेंट व अन्य बड़े होटलों में जिस तरह से नियमों का हवाला देकर इस नियम को लागू रखने यानी कि 31 दिसम्बर को देर रात तक चलने वाले भीड़भाड़ वाले हो-हल्ले व अन्य नियम तोड़ू गतिविधियों को प्रतिबंधित रखा, इससे भी कोरोना जैसी महामारी के प्रसार को रोकने में सहायता मिलेगी...जरूरत के मान से मप्र सरकार ने राहत का दायरा बढ़ाया है..,लेकिन यह किसी को नहीं भूलना चाहिए कि नियमित मास्क एवं शारीरिक दूरी का पालन ही इस रोग का उचित उपचार रोकथाम है...
दृष्टिकोण
किसान हस्ताक्षर पर संशय...
महीनाभर होने को है, किसानों का आंदोलन जारी है...इस बीच केंद्र सरकार के साथ ही किसान संगठनों के बीच किन-किन शर्तों के साथ बातचीत होगी और उस पर अमल के साथ उसके पालन को लेकर जो दुविधा बनी हुई है...उसी का नतीजा है कि सरकार बार-बार चिट्ठी लिखकर किसान संगठनों से संवाद के जरिए मामले के समाधान की बात कर रही है..,लेकिन किसान संगठन सिर्फ अपनी जिद के चलते कानून को रद्द करने पर ही चर्चा को तैयार होने के संकेत कर रहे हैं...ऐसे हठी किसानों को यह नहीं भूलना चाहिए कि केंद्रीय कृषि मंत्री से लगातार दर्जनों किसान संगठन मिलकर कृषि सुधार कानून के समर्थन में सहमित-पत्र सौंप चुके हैं...गुरुवार को भी वापस से 60 किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने कानून के पक्ष में सहमित-पत्र सौंपकर करीब 42 से अधिक किसान संगठन कृषि सुधार कानून का समर्थन कर रहे हैं...6 करोड़ से अधिक किसानों ने कानून के समर्थन में हस्ताक्षर भी भेजे हैं..,लेकिन इस बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को राष्ट्रपति को 2 करोड़ से अधिक किसानों के कृषि सुधार कानून विरोधी हस्ताक्षर का ज्ञापन सौंपा...इस पर भाजपा सरकार सवाल उठा रही है...इन 2 करोड़ हस्ताक्षरों की सच्चाई पर कृषि मंत्री संदेह जता रहे हैं...यह स्वाभाविक भी कि जब 2 करोड़ हस्ताक्षर कृषि सुधार कानून के विरोध में हैं...तो इनकी संख्या सड़कों पर नजर क्यों नहीं आती...क्या पूरे पंजाब व अन्य 3-4 राज्यों से भी यह 2 करोड़ का आंकड़ा जुटाया गया है..?