एकाग्रता की बड़ी बाधा चिंता
   Date26-Dec-2020

dharmdhara_1  H
धर्मधारा
चिं ता घुन की तरह होती है, यदि यह घुन लग जाए तो व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देती है। चिंता मनुष्य को वैसे ही खा जाती है, जैसे कपड़े को कीड़ा। बहुत चिंता करने वाले व्यक्ति अपने जीवन में चिंता करने के सिवा और कुछ सार्थक कर नहीं पाते और चिंता से अपनी चिता की ओर बढ़ते हैं। चिंता की घुन क्या होती है, यह दरसाने वाला एक आख्यान है- दो वैज्ञानिक आपस में बातचीत कर रहे थे। उनमें से एक वृद्ध और एक युवा था। वृद्ध वैज्ञानिक ने कहा-'चाहे विज्ञान कितनी भी प्रगति क्यों न कर ले, लेकिन वह अभी तक ऐसा कोई उपकरण नहीं ढूंढ पाया, जिससे चिंता पर लगाम कसी जा सके।Ó
युवा वैज्ञानिक मुस्कराते हुए बोला-'आप भी कैसी बातें करते हैं। अरे चिंता तो मामूली बात है। भला उसके लिए उपकरण ढूंढने में समय क्यों नष्ट किया जाए?Ó वृद्ध वैज्ञानिक ने कहा- 'चिंता बहुत भयानक होती है। यह व्यक्ति का सर्वनाश कर देती है।Ó लेकिन युवा वैज्ञानिक उनसे सहमत नहीं हुए। उसे अपनी बात समझाने के लिए वृद्ध वैज्ञानिक उसे अपने साथ घने जंगलों की ओर ले गए और एक विशालकाय वृक्ष के आगे वे खड़े हो गए। युवा वैज्ञानिक समझ नहीं पा रहे थे कि वे दोनों वहां क्यों आए हैं? वह बोले - 'आप मुझे यहां क्यों लाए हैं?Ó वृद्ध वैज्ञानिक ने कहा - 'इस वृक्ष की उम्र चार सौ वर्ष बताई गई है।Ó युवा वैज्ञानिक बोला- 'अवश्य होगी।Ó वृद्ध वैज्ञानिक ने उसे समझाते हुए कहा - 'इस वृक्ष पर चौदह बार बिजलियां गिरीं। चार सौ वर्षों से अनेक तूफानों का इसने सामना किया।Ó युवा वैज्ञानिक ने झुंझलाकर पूछा- 'आप साबित क्या करना चाहते हैं?Ó वृद्ध वैज्ञानिक बोले - 'धैर्य रखो। यहां आओ और देखो कि इसकी जड़ों में दीमक लग गई है। दीमक ने इसकी छाल को कुतर-कुतरकर तबाह कर दिया है।Ó युवा वैज्ञानिक ने पूछा- 'अब निष्कर्ष तो बताइए।Ó वृद्ध वैज्ञानिक बोले- 'जिस तरह यह विशाल वृक्ष बिजली से नष्ट नहीं हुआ, तूफान से धराशायी नहीं हुआ, लेकिन मामूली दीमक उसे चट कर गई, उसी तरह चिंता की दीमक भी एक सुखी, समृद्ध और ताकतवर व्यक्ति को चट कर जाती है।Ó अब युवा वैज्ञानिक को उनसे सहमत होना पड़ा।