व्यक्ति, विचार और व्यवहार के प्रतीक थे मामाजी-सुरेश सोनी
   Date08-Nov-2020

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भोपाल ठ्ठ 7 नवंबर (विसंके)
मामाजी ऐसे दूरदर्शी संपादक थे, जिन्होंने अपने संपादकीय में पहले ही आपातकाल के बारे में सचेत कर दिया था। उन्होंने आपातकाल लगने से कुछ दिनों पहले ही लिख दिया था कि ऐसी काली रात आने वाली है, जब संवैधानिक अधिकार छीन लिए जाएंगे और लोगों के मुंह बंद कर दिए जाएंगे। मामाजी की लेखनी में यह गहराई इसलिए थी, क्योंकि उनका जीवन समाज के प्रवाह के साथ एकरूप था। यह बातें श्री सुरेश सोनीजी ने पाञ्चजन्य द्वारा प्रकाशित पत्रिका 'माणिक जैसे मामाजीÓ के विमोचन के अवसर पर कही।
विश्व संवाद केंद्र मध्यप्रदेश द्वारा शनिवार को मानस भवन में पाञ्चजन्य द्वारा मध्यप्रदेश के मनस्वी पत्रकार स्व. माणिकचंद्र वाजपेयी 'मामाजीÓ के जन्मशताब्दी वर्ष पर प्रकाशित विशेषांक 'माणिक जैसे मामाजीÓ का विमोचन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कोरोना संबंधित गाइडलाइंस का पालन करते हुए आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह श्री सुरेशजी सोनी मुख्य वक्ता एवं स्वदेश के पूर्व संपादक श्री जयकिशन शर्मा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित थे।