आनंदमठ
   Date07-Nov-2020

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प्रेरणादीप
बंगाल के बंकिम बाबू अंग्रेजी सरकार में उच्च ओहदे पर डिप्टी मजिस्ट्रेट थे। उन्होंने साथ ही एक-से-एक अधिक प्राणवान पुस्तकों का बंगला में सृजन किया है, किंतु उन सबमें 'आनंदमठÓ उनकी विशेष कृति है। इससे उन्होंने राष्ट्र स्वातंत्र्य हेतु योजनाबद्ध क्रांति का एक व्यावहारिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। मंदिर युग के खंडहरों में क्रांतिकारी साधुवेश में निवास करते थे। इस प्रकार उनकी भोजन और निवास की गुत्थी सुलझ जाती थी और मंदिर-मठों पर शासन को भी उतना संदेह नहीं होता था। दिन में देश का प्रचार और रात्रि में आक्रमण का क्रम चलता था। इस कार्य में उन्हें भावनाशील जनता की जहां सहायता मिलती थी, वहां पता चल जाने पर शासन द्वारा त्रास भी कम नहीं दिया जाता। इस प्रकार योजना का सांगोपांग स्वरूप प्रस्तुत करके प्रकारांतर से भारत के वातावरण में क्रांति की सफलता का एक अच्छा मार्गदर्शन किया। उसके अनुरूप अनेक स्थानों पर प्रयास हुए भी। 'आनंदमठÓ को सरकार ने जब्त कर लिया। फिर भी भारत की सभी भाषाओं में उसके अनुवाद होते रहे। क्रांतिकारी आंदोलन की जड़ यहीं से जमी व पनपी।