सांस्कृतिक पतन से बढ़ते अपराध
   Date07-Nov-2020

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धर्मधारा
देश में प्रतिदिन औसतन 1109 मामले महिलाओं के खिलाफ अत्याचार, 80 हत्या, 289 अपहरण 88 बलात्कार की घटनाएं घट रही हैं। जिस देश के आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और योगेश्वर श्रीकृष्ण हों, जो देश संस्कार और अपनी समावेशी संस्कृति के लिए जाना जाता हो, वहां इतने अपराध चिंतनीय और निंदनीय है। जिस देश में यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता: का भाव हो, वहां पर नारियों के प्रति अपराध इतना कैसे बढ़ गया? इसके पीछे कारण क्या हैं? जिस देश में श्रीराम के जैसा बेटा हुआ, जिन्होंने पुत्र धर्म निभाने के लिए अयोध्या के राज सिंहासन को त्याग दिया। भरत जैसा भाई हुआ, जिसके लिए अयोध्या का राज धूल के कण के समान था। भगवान श्रीकृष्ण जैसा सखा, जिन्होंने अपने मित्र सुदामा को हंसते हुए अपना समस्त राज्य दान दे दिया। द्रोणाचार्य जैसा गुरु हुआ, जिसने अपने पुत्र से अधिक अपने शिष्य अर्जुन को स्नेह किया। हनुमान जैसा दास हुआ, जो अथाह बलशाली और बुद्धिशाली होने के बावजूद सदा अपने आपको अपने स्वामी प्रभु श्रीराम के सेवा में समर्पित किए रहे। सीता जैसी पत्नी जिन्होंने स्वर्णमयी लंका को देखा भी नहीं। श्रवण के जैसा पुत्र हुआ, जो जीवन के अंतिम क्षण तक माता-पिता की सेवा करते रहे। एकलव्य के जैसा शिष्य हुआ, जो बिना किसी शोक के गुरु दीक्षा में अपने अंगूठे को दान कर दिया। भारतीय शिक्षा पद्धति एवं संस्कृति में कहीं ना कहीं ब्रह्मचर्य की भावना थी। उत्तम कर्मों के साथ-साथ पाप-पुण्य का समावेश था। पशु-पक्षियों की सेवा भावना थी। बड़ों का सम्मान, आदर-सत्कार की परंपरा थी। इस लोक के कर्मों का परलोक पर भी असर पडऩे का डर था। इन वजहों की से अपराधों की संख्या में बेहद कम थी। आज किसी को पाप या पुण्य की चिंता नहीं है। ना लोक और ना ही परलोक की चिंता है, क्योंकि रामायण और गीता जैसे धार्मिक ग्रंथों को पढऩे और उनकी शिक्षाओं को आत्मसात करने का समय नहीं है। बड़ों के पास बैठने का समय नहीं है तो अपराध तो बढ़ेंगे ही। क्या गुरुकुल पद्धति से पढ़े हुए विद्यार्थी को आपराधिक कृत्यों में सम्मिलित पाया गया है? कोई अच्छा संस्कृत जानने वाला व्यक्ति अपराधों में संलग्न मिला है? अधिकतर अपराधों को अंजाम पढ़े-लिखे व्यक्तियों द्वारा दिया जा रहा है, ना कि अशिक्षित या अनपढ़ व्यक्तियों के द्वारा। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था संस्कारमुक्त शिक्षा व्यवस्था है।