आत्मनिर्भर भारत 3.0 में हर वर्ग का रखा ध्यान...
   Date22-Nov-2020

parmar shakti_1 &nbs
ब्रेक
के बाद
शक्तिसिंह परमार
आ त्मनिर्भर भारत पैकेज 3.0 के जरिये केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने दीपोत्सव के पूर्व देश की अर्थव्यवस्था को गति देने और हर वर्ग की उम्मीदों को साकार करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया... रोजगार बढ़ाने, महंगाई घटाने, बाजार में पूंजी की तरलता को निर्बाध रखने से लेकर संगठित-असंगठित क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों, मजदूर संगठनों, किसानों, उद्योगों व निर्माण क्षेत्र से जुड़े प्रत्येक वर्ग के सपने को साकार करने के लिए 2 लाख 65 हजार करोड़ का आर्थिक पैकेज घोषित किया... क्योंकि अक्टूबर में खुदरा महंगाई 7.61 प्रतिशत पर थी, जबकि यह सितंबर में 7.27 पर रही... ठीक इसी तरह से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक आईआईटी में 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ सितंबर में नया रिकार्ड बना... जबकि चालू वित्त वर्ष में अभी तक आईआईटी में 21.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की थी... अर्थव्यवस्था से जुड़े ये कुछ ऐसे तथ्य व आंकड़े हैं, जो कोरोनाकाल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर देश-दुनिया को उम्मीदवान बनाए हुए है... क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था ने इन दो दशकों में अनेक बड़े उतार-चढ़ाव व आर्थिक संकट देखे... लेकिन स्वदेशी विचार पर आधारित इस भारतीय अर्थव्यवस्था ने हर संकट का सामना करते हुए विश्व के समक्ष एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है... मई में मोदी सरकार ने 20 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक पैकेज घोषित किया था... जिसमें हर किसी के लिए कुछ न कुछ नया और राहत देने वाला फंड था... दीपावली बाद घर, रोजगार से लेकर कृषि निर्माण, उपचार जैसे क्षेत्रों को ध्यान में रखकर जो 2 लाख 65 हजार करोड़ का पैकेज 'आत्मनिर्भर भारत 3.0Ó के नाम से घोषित हुआ है, वह प्रत्येक वर्ग की समस्याओं के समाधान को ध्यान में रखकर लाया गया है...
आत्मनिर्भर भारत पैकेज 3.0 के दो बड़े पहलुओं पर चर्चा करें तो ध्यान रखा जाना चाहिए कि पहला : दो करोड़ रुपए तक का घर खरीदने पर आयकर में 20 प्रतिशत तक की छूट का सरकार ने प्रावधान रखा है... इससे उन बिल्डरों या आवास निर्माणकर्ताओं को घर बेचने और लोगों को घर की रजिस्ट्री कराने में आसानी होगी.. इस योजना के तहत छूट केवल 30 जून 2021 तक रखी गई है... यानी बड़े रियल स्टेट क्षेत्र से एक बड़ी पूंजी का प्रवाह बाजार में होगा... क्योंकि निर्माण कार्यों को गति मिलेगी... दूसरा : एक हजार तक कर्मचारी वाली कंपनियों में नए कर्मचारियों के अंशदान के दोनों हिस्से सरकार देगी... बशर्ते कर्मचारी का मासिक वेतन 15 हजार रुपए से कम हो... यह व्यवस्था तो कोरोनाकाल के पहले पैकेज से जारी है... जिसमें पहले छह महीने की व्यवस्था की गई थी... यानी निजी क्षेत्र में नए कर्मचारियों का ईपीएफओ अंशदान केन्द्र के देने से छोटी कंपनियों में छंटनियां रुकेंगी...
आत्मनिर्भर भारत पैकेज 3.0 का सबसे ज्यादा फोकस रोजगार, कृषि व आवास पर है... प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के लिए इस पैकेज में 18 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त रखे गए हैं... जिससे 12 लाख नए घर बनने की उम्मीद है... वहीं 18 लाख अधूरे घर पूरे भी होंगे... इससे कुल मिलाकर 30 लाख जरूरतमंदों के खुद का घर मिलने का सपना साकार होगा... इस योजना के लक्ष्य में रोजगार की समस्या दूर करना है... शहरी गरीबों के लिए पक्के मकान की उपलब्धता, कुल मिलाकर इससे 78 लाख से अधिक लोगों को रोजगार की उम्मीद बंधी है... किसानों के लिए भी पैकेज में विशेष ध्यान रखा गया... क्योंकि केन्द्र की मोदी सरकार 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है... उत्पादन तो उस दिशा में होता नजर आ रहा है, लेकिन कोरोना के कारण उत्पादन का मूल्य उस मान से नहीं मिल पा रहा... इसलिए किसानों को अतिरिक्त राहत की आवश्यकता कोरोनाकाल से ही थी... अत: फर्टिलाइजर सब्सिडी के रूप में 6500 करोड़ रुपए की व्यवस्था है... 2016-17 में फर्टिलाइजर की खपत 500 लाख मीट्रिक टन थी... जो अब बढ़कर 2020 में 673 लाख मीट्रिक टन हो चुकी है... यानी इसकी खपत 17.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ सामने आई है... ऐसे में किसानों को फर्टिलाइजर (खाद) की कमी से जूझना न पड़े, इसका ध्यान सरकार ने रखा... यानी कृषि-कृषकों के समक्ष मुँहबाहे खड़े संकट का समाधान केन्द्र सरकार पैकेजों के जरिये खोजने का हरसंभव प्रयास कर रही है...
कोरोनाकाल ने देश में बेरोजगारी को मानों पंख लगा दिए हैं... जिस तरह से प्रत्येक क्षेत्र में नौकरीपेशा, संगठित-असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों, श्रमिकों, मजदूरों की आजीविका पर बन आई, उसका समाधान कहीं-न-कहीं सरकार को निकालना ही था... इसलिए उसने इस दिशा में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार योजना के जरिये समस्या के समाधान का तरीका खोजा है... इसमें जो नए कर्मचारी हैं या जिनकी 1 मार्च - 30 सितंबर के बीच नौकरी गई है, उन्हें लाभ मिलेगा... यानी नई भर्तियों के लिए कंपनियों को प्रोत्साहन, पैकेज इससे 1 हजार कर्मी होने पर नए कर्मी के पीएफ के पूरे यानी 24 फीसदी हिस्से पर सब्सिडी मिलेगी और कर्मी अधिक हो तो 12 फीसदी योगदान पर दो साल की सब्सिडी तय है...
आत्मनिर्भर भारत पैकेज 3.0 को लाने का कारण कोरोनाकाल रहा है... इसलिए आने वाले समय में सबसे बड़ी समस्या हर वर्ग के सामने टीकाकरण (वैक्सीन) की रहेगी... क्योंकि इसके लिए सरकारी से इतर निजी क्षेत्र के अस्पताल लूटमारी में पीछे नहीं रहते हैं... अत: सरकार ने हर वर्ग तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए 900 करोड़ रुपए का कोरोना शोध एवं विकास पैकेज बनाया है... इसका उपयोग स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा किया जाएगा... यानी सरकार हर हालात में हर व्यक्ति तक नि:शुल्क या फिर न्यूनतम दर पर वैक्सीन पहुंचाने के अपने वादे को लेकर कृतसंकल्पित है... उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इस आर्थिक पैकेज में 2500 करोड़ का प्रावधान किया गया है... अब अतिरिक्त 10200 हजार करोड़ रुपए दिए जाएंगे... इससे हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी), औद्योगिक अधोसंरचना, डोमेस्टिक डिफेंस इक्विपमेंट इंडस्ट्रीज को व्यापक स्तर पर लाभ होने की संभावनाएं हैं... इसके साथ ही दवा निर्माण क्षेत्र, मेडिकल उपकरण निर्माण, कच्चा माल, मोबाइल निर्माण जैसे क्षेत्रों के लिए भी अतिरिक्त राहत पैकेज से इन सभी इकाइयों में आर्थिक रूप से गतिविधियां नई सक्रियता के साथ रोजगार, निर्माण, उत्पादन व निर्यात को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने में सफल हो सकेगी...
आत्मनिर्भर भारत पैकेज 3.0 के भविष्य के प्रभावों और उम्मीदों का विश्लेषात्मक पहलू देखें तो इस पैकेज से घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ ही स्वदेशी उत्पाद की पहुंच हर घर, गांव व शहर तक बनाने में सहायता मिलेगी... क्योंकि कोरोनाकाल के साथ ही चीन के साथ चली लंबी तनाव वाली स्थितियों ने भारतीय वर्ग का यह मानस तय कर दिया है कि थोड़ा नुकसान उठाकर भी भारतीय उत्पाद यानी स्वदेशी को प्राथमिकता देना उनकी जिम्मेदारी है... इस भाव को अब उपभोक्ता ही नहीं, उत्पादक व विक्रेता भी गंभीरता के साथ समझने लगा है... तभी तो चीनी माल का हर क्षेत्र में न केवल बायकाट हो रहा है, बल्कि स्वदेशी की मांग भी हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है... इस घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए पीएलआई स्कीम से छोटी कंपनियों यानी छोटे उद्यम को व्यक्तिगत मुद्रा लोन के साथ ही छूट व सब्सिडी का भी दायरा बढ़ाने से स्वदेशी उत्पाद को संबल मिलेगा... घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने से पांच साल में 1.46 लाख करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि मिलेगी... इसके अंतर्गत 5-7 साल के लिए नकद राशि दी जाती है... निर्माण क्षेत्र, आटो-मोबाइल, नेटवर्किंग उत्पाद, खाद प्रसंस्करण, उन्नत रसायन, विज्ञान, सोलर पॉवर सिस्टम जैसे अनेक क्षेत्रों को इसका लाभ मिलेगा और स्वदेशी के साथ भारतीय उत्पाद के लिए आत्मनिर्भर भारत पैकेज 3.0 टॉनिक का काम करेगा... क्योंकि इसमें हर वर्ग की उम्मीदों का सरकार ने ध्यान रखा है...