कार्बन उत्सर्जन में कमी कर प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाएंगे
   Date22-Nov-2020

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पं. दीनदयाल पेट्रोलियम विवि का 8वां दीक्षांत समारोह
नई दिल्ली द्य 21 नवंबर (वा)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेेे शनिवार को कहा कि भारत पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखतेे हुए अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहा है और उसने कार्बन उत्सर्जन में 30 सेे 35 प्रतिशत की कमी करने तथा प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी चार गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। श्री मोदी ने आज गुजरात के गांधीनगर में पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह में वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया। उन्होंने 45 मेगावाट के उत्पादन संयंत्र मोनोक्रिस्टलाइन सोलर फोटोवोल्टिक पैनल और जल प्रौद्योगिकी उत्कृष्ठता केन्द्र की आधारशिला भी रखी। उन्होंने विश्वविद्यालय में 'अभिनव और उद्भवन केन्द्र-प्रौद्योगिकी व्यापार इनक्यूबेशनÓ, 'ट्रांसलेशनल अनुसंधान केन्द्रÓ और 'खेल परिसरÓ का भी उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे समय में स्नातक होना आसान बात नहीं है, जब विश्व इतने बड़े संकट का सामना कर रहा है, लेकिन उनकी क्षमताएं इन चुनौतियों से बहुत बड़ी हैं। उन्होंने कहा कि छात्र इस उद्योग में ऐसे समय में प्रवेश कर रहे हैं, जब महामारी के कारण दुनियाभर में ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक बदलाव हो रहे हैं।
ठ्ठश्री मोदी ने कहा कि इस दृष्टि से, आज भारत के ऊर्जा क्षेत्र में वृद्धि, उद्यमिता और रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि देश अपने कार्बन उत्सर्जन को 30-35 प्रतिशत तक कम करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है और इस दशक में हमारी ऊर्जा जरूरतों में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को बढ़ाने के लिए प्रयास किए गए हैं। अगले पांच वर्षों में तेल शोधन क्षमता को दोगुना करने का कार्य जारी है, ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है और छात्रों एवं पेशेवरों के लिए एक कोष बनाया गया है।
प्रधानमंत्री ने छात्रों से जीवन में उद्देश्य के साथ आगे बढऩे की अपील की और जोर देते हुए कहा कि ऐसा नहीं है कि सफल लोगों के पास समस्याएं नहीं हैं, लेकिन जो चुनौतियों को स्वीकार करता है, उनका सामना करता है, उन्हें हराता है, समस्याओं को हल करता है, केवल वही सफल होता है।
उन्होंने कहा कि जो लोग चुनौतियों का सामना करते हैं, बाद में वही जीवन में सफल होते हैं। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 1922-47 के दौर के युवाओं ने आजादी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। उन्होंने छात्रों से देश के लिए जीने और आत्मनिर्भर भारत के आंदोलन से जुडऩे के साथ-साथ जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का भी आग्रह किया।
श्री मोदी ने कहा कि सफलता का बीज जिम्मेदारी की भावना में निहित है और जिम्मेदारी की भावना को जीवन के उद्देश्य में बदल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वही लोग जीवन में सफल होते हैं, जो कुछ ऐसा करते हैं, जिससे उन्हें जीवन में जिम्मेदारी का अहसास होता है और असफल होने वाले लोग वह होते हैं, जो हमेशा एक बोझतले जीवन जीते हैं। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी की भावना भी व्यक्ति के जीवन में अवसर की भावना को जन्म देती है।