योग-नैचुरोपैथी व आयुर्वेद को व्यापक पैमाने पर प्रतिष्ठित करना होगा-डॉ. हर्षवर्धन
   Date21-Nov-2020

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शुक्रवार द्य 20 नवंबर
आयुष मंत्रालय के सहयोग से सूर्या फाउंडेशन व आईएनओ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस कार्यक्रम के उपलक्ष्य में आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि जन-जन तक स्वास्थ्य सेवाओं को उपलब्ध कराना है तो हमारी देश की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति योग-नेचरोपैथी, आयर्वेद को व्यापक पैमाने पर प्रतिष्ठित करना होगा। प्राकृतिक चिकित्सा योग व आयुर्वेद द्वारा हम व्यक्ति को स्वस्थ रहने की कला सिखा सकते हैं। भारत में आम लोगों की यह धारणा है कि अमेरिका व यूरोपीय देशों में वैज्ञानिक व उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन अब अमेरिका व अन्य देशों में भी लोग योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, ऑर्गेनिक, होम्योपैथी व अन्य ड्रागलेस चिकित्सा के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी स्वस्थ रहने के लिए हमेशा प्राकृतिक चिकित्सा में विश्वास रखते थे और अपने निकटवर्ती लोगों को इसके बारे में बताते थे। डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि नेचुरोपैथी का मुख्य उद्देश्य प्रकृति में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध तत्वों के उचित प्रयोग द्वारा रोग का मूल कारण समाप्त करना है।
सूर्या फाउंडेशन सामाजिक क्षेत्र में 3 दशकों से सेवारत - इस अवसर पर वेबिनार में देश-दुनिया से जुड़े लोगों को संबोधित करते हुए माननीय आयुष मंत्री श्रीपाद नाईक ने कहा कि महात्मा गांधीजी की 151वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में सामाजिक क्षेत्र में लागभग 3 दशकों से सेवा कार्य में संलग्न सामाजिक संस्था सूर्या फाउंडेशन व इंटरनेशनल नेचरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन द्वारा (आईएनओ) रिटर्न टू नेचर (प्रकृति की तरफ लौटो) अभियान का आयोजन संस्थापक पद्मश्री जयप्रकाशजी के मार्गदर्शन में किया गया है। इस अवसर पर श्रीपाद नाईक ने कहा कि नेचुरोपैथी गांधीजी का प्रिय विषय था, वे नेचुरोपैथी को स्वयं पर प्रयोग करते थे तथा अपने अन्य सहयोगी व परिवार के सदस्यों का इलाज भी नेचुरोपैथी से किया करते थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने प्राकृतिक चिकित्सा का ज्ञान व लाभ घर-घर, गांव-गांव पहुंचाने हेतु 18 नवंबर 1946 को पुणे में ऑल इंडिया नेचर क्योर फाउंडेशन ट्रस्ट की स्थापना की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य नेचुरोपैथी का प्रचार-प्रसार व नेचुरोपैथी विश्वविद्यालय स्थापित करना था। इसलिए आयुष मंत्रालय ने 2018 में 18 नवंबर को राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस की घोषणा की है एवं पुणे में 300 करोड़ रुपए बजट से विशाल नेचुरोपैथी अनुसंधान केन्द्रव अत्याधुनिक सुविधायुक्त चिकित्सालय बनाने की स्वीकृति दी है।
नैचुरोपैथी हमारी जीवनशैली में - उद्योगपति आईएनओ के संस्थापक पद्मश्री जयप्रकाशजी ने बताया कि योग प्राकृातिक चिकित्सा भारतीय परंपरा एवं संस्कृति की अमूल्य देन है। योग शरीर मन कर्म व प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। यह स्वास्थ्य तथा कल्याण का पूर्णतावादी दृष्टिकोण है। योग व नेचुरोपैथी हमारी जीवनशैली में परिवर्तन लाकर हमारे अंदर जागरुकता उत्पन्न करता है। प्राकृतिक परिवर्तनों से शरीर में होने वाले बदलावों को सहन करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
स्वास्थ्य रक्षक में एक लाख बने भागीदार - वेबिनार में आईएनओ के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा आयुष मंत्रालय के सदस्य डॉ. अनंत बिरादार ने संगठन द्वारा 2 अक्टूबर से 18 नवंबर 2020 तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिटर्न टू नेचर अभियान के अंतर्गत छात्र के लिए आयोजित कौन बनेगा स्वास्थ रक्षक (केबीएसआर) प्रतियोगिता की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योग नेचुरोपैथी आहार-विहार पर आधारित इस प्रतियोगिता में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, थाईलैंड, मारीशस, ओमान, दुबई, नेपाल सहित भारत के 31 राज्य (केंन्द्रशासित सहित) के 500 जिलों से एक लाख से अधिक छात्र ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
ार्जिलिंग लोकसभा से युवा सांसद राजू बिष्ट ने कहा कि इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन को मैंने एक ''छोटे पौधेÓÓ से ''वटवृक्षÓÓ होते हुए देखा है।
इस अवसर पर आचार्य लोकेश मुनि आयुष मंत्रालय के निदेशक विक्रम सिंह राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा की निदेशक डॉ. सत्यलक्ष्मीजी, केन्द्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. राघवेन्द्र राव ने प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रतियोगिताओं के विजेताओं की सूची संलग्न है।