गौवंश सुरक्षा की पहल...
   Date19-Nov-2020

vishesh lekh_1  
किसी भी देश की संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों का दर्शन उसके कार्यों-व्यवहारों, खान-पान और प्रकृति व पशुओं के साथ प्रकट किए जाने वाले उस अगाध प्रेम से भी होता है, जिसके जरिये उसकी पहचान होती है... भारत की संस्कृति, संस्कार, व्यापार-कारोबार या कहें कि अर्थव्यवस्था के मूल आधार में गौवंश का सनातन काल से महत्व रहा है... गौ माता एक पशुभर नहीं है, बल्कि उसके जरिये किसी परिवार, कृषक या कृषि से जुड़े लाभ और आय-व्यय का आंकलन करे तो यह स्पष्ट हो जाता है कि गौवंश को पालना कभी भी नुकसान का निमित्त नहीं रहा... कहीं न कहीं गौवंश पर जो पालन-पोषण में खर्च आता है, उसका दोगुना या तीगुना रूप किसी को भी आसानी से प्राप्त होता है... एक गाय के औसतन खर्च का आंकलन करे तो वह 100 से 125 रुपए प्रतिदिन का खर्च अपने मालिक पर डालती है, उसके बदले में दूध, गोबर से जो आमदनी औसतन निकाली जाए तो वह लाभ में ही मालिक को रखती है... कहने का तात्पर्य यही है कि हमारी कृषि की उर्वरता का आधार भी उस जैविक खाद से ही तय होता है, जिसका हम लंबे समय तक उपयोग करते रहे हैं... लेकिन जब से दूध व अन्य दूध निर्मित उत्पादों के बाजार को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ी, तब से जर्सी गाय या फिर भैंस के दूध को लेकर एक बड़ा ही आकर्षण निर्मित होता चला गया, जिससे देशी नस्ल की गौवंश के प्रति लोगों में दूरियां बनती चली गई... तभी तो सड़कों पर आवारा पशु के रूप में गौवंश को देखा जाने लगा... जबकि यही गौवंश पहले घर की शान, स्वाभिमान हुआ करती थी... इसी के कारण गौवंश के अवैध परिवहन का धंधा भी खूब फला-फूला... अगर मध्यप्रदेश की शिवराजसिंह चौहान सरकार ने अपने स्वर्णिम मध्यप्रदेश की नीति व नियत के केन्द्र बिन्दु में गायों की सुरक्षा को रखा है तो इसका स्वागत होना चाहिए... क्योंकि गौधन के लिए संरक्षण-संवर्धन से किसी भी समाज, राष्ट्र का बेहतर विकास व निर्माण आसानी से संभव है... गौ कैबिनेट का गठन करने की पहल करके शिवराज सरकार ने अपने उस गौ संरक्षण-संवर्धन के उस संकल्प को आगे बढ़ाया है, जिसमें वह गायों को पूजनीय रूप में न केवल स्वीकार करता है, बल्कि मनुष्य के अस्तित्व के लिए गौ संरक्षण के लिए एक जरूरी उपाय के रूप में देखता है... गौ कैबिनेट में पशु पालन, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, गृह एवं कृषि विभाग को शामिल करके एक बेहतर रणनीति के साथ गौ संरक्षण की दिशा में सरकार आगे बढऩे को लेकर संकल्पबद्ध नजर आती है... शिवराज सरकार के द्वारा गौ कैबिनेट गठन की पहल स्वागत योग्य है... आगामी गौपाष्टमी यानी 22 नवंबर को गौ अभयारण सालरिया (आगर-मालवा) में इस कैबिनेट की पहली बैठक आयोजित होगी... उम्मीद करें कि गौशालाओं के बेहतर विकास एवं उनकी समस्याओं के समाधान के साथ यह कैबिनेट वास्तविकता में की सुरक्षा के संकल्प को सार्थक करेगी...
दृष्टिकोण
गुपकर की जहरीली फुफकार...
धरती के स्वर्ग जम्मू-कश्मीर को उन बेजा प्रावधानों से मुक्ति मिल चुकी है, जिसके कारण उसका सौंदर्य ही नहीं नैसर्गिक रूप से वह संस्कृति भी नष्ट हो रही थी, जिसमें हिन्दुओं को एकतरफा रूप से भयावह प्रताडऩा देकर घाटी से रुखसत किया गया था... अनुच्छेद 370 और 35ए ही ऐसी बेडिय़ां थी, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर में हिन्दू विशेष रूप से कश्मीरी पंडित पराया बना दिया गया... उसे पलायन करने के लिए मजबूर किया गया... यहां तक कि जम्मू-कश्मीर में किसी भी तरह की संपत्ति खरीदने, निवेश करने या अपना आशियाना बनाने से पूरे भारतवासियों को रोकने वाली यही दो धाराएं थी, जिनका नरेन्द्र मोदी सरकार ने बड़े साहसपूर्वक खात्मा करके एक राष्ट्र, एक निशान, एक संविधान का पंडित श्यामाप्रसाद मुखर्जी का सपना साकार किया... लेकिन अब गुपकर के बहाने आतंकवादियों की पैरोकार रही पार्टियां एक ऐसी गैंग बना रही है, जो जम्मू-कश्मीर में 370 और 35ए को बहाल करने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्र रच रही है... अगर देश के गृहमंत्री अमित शाह कांग्रेस, सोनिया व राहुल से यह पूछ रहे हैं कि वे गुपकर गैंग के साथ है या नहीं..? इसका उन्हें स्पष्ट रुख जनता के सामने करना चाहिए... तो इसमें बुराई क्या है..? जब नेकां के फारुख अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती की तमाम छोटे-बड़ों दलों के साथ बैठकें बार-बार हो रही है और 370 हटाने के खिलाफ आग उगल कर तिरंगे के अपमान का दुस्साहस करने से बाज नहीं आ रहे हैं, तब ऐसी गुपकर गैंग से यह पूछने का हर किसी को अधिकार है कि आखिर वे किसके लिए चीन से सहायता लेकर ऐसी बेजा धाराओं को बहाल करने की राष्ट्रघाती जहरीली फूफकार मार रहे हैं..?