गलती से सीख
   Date19-Nov-2020

prernadeep_1  H
प्रेरणादीप
बा त सन् 1948 की है। अहमदाबाद के महात्मा गांधी विज्ञान संस्थान में दो विद्यार्थी प्रयोगशाला में कुछ प्रयोग कर रहे थे। प्रयोग करते समय अधिक विद्युत प्रवाहित हो जाने से यंत्र जल गया। दोनों विद्यार्थी डर गए। इसी बीच उधर से उनके प्राध्यापक आते दिखाई पड़े। उनमें से एक विद्यार्थी बोला - वे आ रहे हैं। उन्हें बता दो। मैंने यह नुकसान नहीं किया। तब तक प्राध्यापक करीब आ चुके थे। उन्होंने दोनों विद्यार्थियों का वार्तालाप सुन लिया था। डरते-डरते एक विद्यार्थी ने जवाब दिया - विद्युत मोटर में एकाएक भारी विद्युत प्रवाहित हो जाने से वह जल गई है सर। बस इतना ही, उसकी चिंता नहीं। विद्यार्थी अध्ययन करते हैं, तब ऐसी घटनाएं हुआ ही करती हैं। गलतियां नहीं होगी, तो विद्यार्थी सीखेंगे कैसे भविष्य में सावधानी रखो। उक्त प्राध्यापक कोई और नहीं, अपितु भारत में अंतरिक्ष युग के प्रणेता डॉ. विक्रम अम्बालाल साराभाई थे। प्रयोग करने की पहली सीढ़ी ही गलती करना है। गलती करने की छूट है, पर दोहराने की नहीं। गलती तो करो, पर हर बार नई। गलती दोहराना असावधानी है और नई करना वैज्ञानिकता।