श्रीराम मंदिर धन संग्रह हेतु 4 लाख गांवों तक पहुंचेगी विहिप
   Date13-Nov-2020

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नई दिल्ली ठ्ठ 12 नवंबर (वा)
विश्व हिन्दू परिषद की दो दिन तक दिल्ली में चली केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन निर्णयों की घोषणा करते हुए जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर, पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरिजी महाराज ने आज कहा कि पूज्य संतों के आदेश पर विहिप कार्यकर्ता श्रीराम मंदिर के लिए देश के 4 लाख गांवों के 11 करोड़ परिवारों के 50 करोड़ सदस्यों से आगामी 15 जनवरी से 27 फरवरी के मध्य संपर्क कर श्रीराम मंदिर से उन्हें सीधा जोड़कर उसके लिए धन संग्रह करेंगे. संत समाज भी इस अभियान में जुटेगा। पूज्य स्वामी परमात्मानंदजी महाराज, विहिप कार्याध्यक्ष एडवोकेट श्री आलोक कुमार तथा प्रचार-प्रसार प्रमुख श्री विजय शंकर तिवारी की उपस्थिति में उन्होंने कहा कि दो दिवसीय केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल में संतों ने धर्मांतरण, लव जिहाद, संतों, बेटियों व भारतीय परंपराओं पर हो रहे सतत विधर्मी हमलों पर भी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए हमलावरों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा कड़े कानूनों की मांग भी की।
उन्होंने बैठक में पारित दो प्रस्तावों को मीडिया को जारी करते हुए कहा कि हमें संतोष है कि विगत कुछ वर्षों से केन्द्रीय सत्ता में राष्ट्रीय हितों एवं भारतीय संस्कृति के प्रति सकारात्मक चिंतन प्रारंभ हुआ है। श्रीराम जन्मभूमि पर गत 5 अगस्त को भूमि पूजन, धारा 370 व 35ए की समाप्ति, नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएए) का पारित होना, श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरीडोर समेत देश के सभी प्रतिष्ठित तीर्थस्थलों के समग्र विकास, जीर्ण-शीर्ण तथा भग्न मंदिरों के जीर्णोद्धार की योजना इत्यादि अनेक अविस्मरणीय व अप्रत्याशित कार्य हुए हैं।
अप्रैल 2020 में पालघर (महाराष्ट्र) में पुलिस की उपस्थिति में दो संन्यासियों और उनके चालक की नृशंस हत्या तथा उसके पीछे वहां सक्रिय चर्च व एनजीओ के राजनीतिक गठजोड़ का वीभत्स स्वरूप देखने को मिला। दुर्भाग्य से महाराष्ट्र सरकार ने ना सिर्फ घटना पर पर्दा डालने का प्रयास किया, अपितु जिस व्यक्ति या संस्था ने आवाज उठाई, उसे निर्ममता से कुचलने का प्रयास तथा सरकार द्वारा सीबीआई जांच से भागते हुए जांच के पूर्व ही मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री द्वारा घटना को भ्रम-जनित करार देना किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा ही है। संतों की इस बैठक ने पालघर घटना की निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग की है।
बैठक में पारित प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि आज मजहबी आतंकवाद अनेक रूपों में हमारे देश में सक्रिय है। वर्तमान समय में लव जिहाद के रूप में हिन्दू बहन-बेटियों को झूठे प्रेमजाल में फंसाना ही नहीं, अपितु बलात् अपहरण और हत्या की अनेक घटनाएं स्थान-स्थान पर सामने आ रही हैं। बल्लभगढ़ में धर्मान्तरण कर विवाह नहीं करने पर निकिता तोमर नामक बालिका की सरेआम सार्वजनिक स्थान पर हत्या ने इन जिहादियों के बढ़े हुए मनोबल का आभास करा दिया है। अनेक अपराधियों ने यह भी स्वीकारा है कि इस कार्य हेतु प्रशिक्षण एवं पर्याप्त धन उनको प्राप्त होता है। ऐसे मजहबी आतंकवादियों पर कठोर कार्रवाई तथा कड़े कानून की मांग करते हुए हिन्दू समाज को सावधान रहने के लिए भी संतों ने चेताया है।
कांग्रेस, वामपंथ एवं अर्बन नक्सली अपने नित नए षड्यंत्रों के माध्यम से हिन्दू समाज के मध्य दरार पैदा करने में जुटे हैं। हाथरस की घटना के माध्यम से उत्तरप्रदेश को जातीय दंगों में झोंकने का असफल प्रयास किस प्रकार किया गया, हम सबने देखा ही है। बेटी चाहे बल्लभगढ़ की हो या हाथरस की, आदिकाल से ही नारी सम्मान हिन्दू समाज की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। इतिहास के दो बड़े युद्ध रामायण और महाभारत नारी सम्मान हेतु ही लड़े गए थे। पश्चिम बंगाल एवं केरल में एक ओर हिन्दुओं की हत्या व लूटपाट की घटनाएं आम हैं, वहीं हमारी परम्परा, रीति-रिवाज, मठ-मंदिर एवं साधु-संतों को बदनाम करने के वामपंथी लेखकों, विचारकों या बुद्धिजीवियों के षड्यत्र सुनियोजित ढंग से जारी हैं। हिन्दू समाज को इनके विरुद्ध न केवल जागृत रहने अपितु प्रबल विरोध करने की भी आवश्यकता है। बैठक में हिन्दू समाज से आह्वान किया गया कि वह सभी जातीय भेदभाव मिटाकर समरस समाज बना अपनी परिवार परम्पराओं को पुन: स्नेह और धर्म-पालन से मजबूत करे, जिससे बहन-बेटियों को किसी के बनावटी प्रेमजाल में पडऩे से बचाया जा सके। पूज्य संतों ने कुछ पीढिय़ों से मुसलमान या ईसाई बने बंधुओं से अपने स्वधर्म में ससम्मान लौटने का आह्वान भी किया। संतों ने विहिप को अपना आशीर्वाद देते हुए कहा कि उसने 492 वर्षों के कलंक को मिटाने के लिए संतों के आदेश से न्यायालय से लेकर ग्राम-ग्राम तक इस धर्मयुद्ध को लड़ा। अब वह विश्व के प्रत्येक हिन्दू से सम्पर्क कर श्रीराम मंदिर निर्माण हेतु धन संग्रह के पुनीत कार्य में लगे। देश के सभी संत भी इस पुण्य कार्य में स्वयं लगेंगे। संतों ने विश्व के रामभक्तों से मंदिर निर्माण हेतु उदारतापूर्वक दान देने का आह्वान भी किया। 10 व 11 नवंबर 2020 को दिल्ली के विश्व जागृति मिशन बक्करवाला में सम्पन्न हुए उपवेशन में देशभर के संत समाज से जुड़े विविध मत-पंथ-संप्रदाय, मठ, भाषा व क्षेत्रों से पधारे लगभग 150 पूज्य संतों ने मार्गदर्शन किया। इसमें जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वतीजी महाराज, जूना अखाड़ा हरिद्वार के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरिजी महाराज, जगतगुरु माधवाचार्य, पेजावर उड़प्पी के विश्व प्रसन्न तीर्थ, अयोध्या से जगतगुरु रामानुजाचार्य, वासुदेवानंदजी महाराज, महाराष्ट्र से स्वामी भास्करानंदजी महाराज, बेंगलुरु से निर्मलानंद नाथजी महाराज, काशी से पूज्य स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वतीजी महाराज, जबलपुर से महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंदजी महाराज, गुरुकुल प्रभात आश्रम मेरठ से स्वामी विवेकानंदजी महाराज तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरिजी महाराज सहित अनेक संत उपस्थित थे। पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरिजी महाराज की अध्यक्षता में सम्पन्न उद्घाटन सत्र को विहिप कार्याध्यक्ष एडवोकेट श्री आलोक कुमार के उद्बोधन के साथ प्रारंभ किया गया। विहिप उपाध्यक्ष व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री श्री चंपत राय, विहिप उपाध्यक्ष श्री ओमप्रकाश सिंहल, संगठन महामंत्री श्री विनायकराव देशपांडे, संयुक्त महामंत्री स्वामी विज्ञानानंद, श्री राघवल्लू व श्री कोटेश्वर शर्मा तथा अखिल भारतीय धर्माचार्य संपर्क प्रमुख श्री अशोक तिवारी के अलावा विहिप के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।