योग की विशिष्ट प्रक्रियाओं का अभ्यास सूर्य नमस्कार
   Date09-Oct-2020

dharmdhara_1  H
धर्मधारा
वै ज्ञानिकों की दृष्टि में सूर्य हमारी पृथ्वी के लिए ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। प्रात:काल सूर्य नमस्कार करने से सूर्य की किरणें प्रचुर मात्रा में शरीर में प्रवेश करती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। योगशास्त्रों में उल्लेख है कि सूर्य नमस्कार मनुष्य के संपूर्ण व्यक्तित्व को प्रभावित करता है। इसके नियमित अभ्यास से मस्तिष्क में एक प्रकार की शक्ति आती है, जो मनुष्य को बुद्धिमान बना देती है तथा मनुष्य अपने तनाव, चिंता, द्वंद्वों का निराकरण करने में सक्षम हो जाता है। इस यौगिक अभ्यास को करने में समय भी कम लगता है और इसकी प्रक्रिया भी सरल है, अत: इसे हर कोई सहज रूप से अपना सकता है। इसमें योग की तीन विशिष्ट प्रक्रियाओं का समावेश होने के कारण यह शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक तीनों स्तरों पर लाभकारी सिद्ध होता है। इसका लाभ, क्षमताओं के विकास के साथ-साथ अनेक रोगों के निवारण व रोकथाम, मन की स्थिरता व आत्मनियंत्रण अथवा आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न तनाव से मुक्ति दिलाने के रूप में भी दिखाई देता है। योगाचार्यों की मान्यता में सूर्य नमस्कार स्वयं में एक पूर्ण यौगिक अभ्यास है। मात्र इसी के नियमित अभ्यास से व्यक्ति संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकता है तथा बढ़ती हुई मानसिक समस्याओं को नियंत्रित कर सकता है। इससे शरीर व मन तो स्वस्थ बनते ही हैं, साथ ही व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य नमस्कार में आसनों से शारीरिक स्तर पर, श्वसन से प्राणिक स्तर पर तथा मंत्र (बीज मंत्रों) से सूक्ष्म सुप्त ग्रंथियों, उपत्यिकाओं, चक्रों पर प्रभाव पड़ता है। अध्ययन में सूर्य नमस्कार के तीन आवश्यक अंगों का प्रयोग किया गया है। ये तीन अंग हैं-1. आसन, 2. श्वसन और 3. मंत्र।
(1) आसन-सूर्य नमस्कार में 12 आसनों को सम्मिलित किया गया है, जिनका संबंध सूर्य की खगोलीय यात्रा में पडऩे वाली बारह राशियों से बताया गया है। ये बारह आसन हैं, क्रमश:- प्रणामासन, हस्तोत्थानासन, पादहस्तासन, अश्वसंचालनासन, पर्वतासन, अष्टांगासन, भुजंगासन, पर्वतासन, पादहस्तासन, हस्तोत्थानासन, प्रणामासन।
(2) श्वसन-सूर्य नमस्कार की समस्त गतिविधियां श्वसन प्रक्रिया के नियंत्रण के साथ सम्पन्न की जाती हैं। प्रत्येक आसन का संबंध पूरक, रेचक और कुंभक में से किसी एक के साथ निर्धारित है।
(3) मंत्र-सूर्य नमस्कार के बारह आसनों में प्रत्येक के साथ एक बीजाक्षर युक्त मंत्र संबद्ध है। आसनों की स्थितियों के अनुरूप ही अभ्यासकर्ता को मंत्रों का उच्चारण एवं मंत्र भावना को आत्मसात् करना होता है।