बिहार में बिछी चुनावी जाजम...
   Date08-Oct-2020

vishesh lekh_1  
बिहार केन्द्र की राजनीति को नियंत्रित करने का उत्तर प्रदेश के पास दूसरा सबसे बड़ा रिमोट कंट्रोल है... विधानसभा चुनाव में इस बार राजग में भाजपा और नीतीश का जदयू भी मैदान में नजर आता है... भले ही पासवान की लोजपा अलग रहा पकड़ चुकी हो.., लेकिन राजग से बाहर उसका कोई भविष्य नहीं है... बिहार में नई विधानसभा चुनने के लिए पहले चरण के मतदान में महज 21 दिन रह गए हैं, और राजग में सीटों के बंटवारे के साथ अब यह पूरी तरह से साफ हो चुका है कि राज्य बहुकोणीय मुकाबले का साक्षी बनने जा रहा है... एक तरफ, जद(यू)-भाजपा-हम गठजोड़ है, तो वहीं दूसरी तरफ, राजद-कांग्रेस-वाम दलों का महागठबंधन... एक मोर्चा बसपा-रालोसपा व एआईएमआईएम का है, तो एक अन्य कोण अब रामविलास पासवान की लोजपा गढ़ रही है... इनके अलावा पप्पू यादव भी कुछ राजनीतिक संगठनों के साथ मैदान में हैं... जाहिर है, इतने सारे गठबंधन जन-सरोकारों का नहीं, बढ़ती राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। बिहार के वोटरों के लिए यह कठिन चुनौती होगी कि गठबंधनों और मोर्चों की इस भीड़ से वे अगले पांच वर्षों के लिए एक भरोसेमंद समूह का इंतिखाब करें... परेशानी उन्हें इसलिए भी होगी, क्योंकि एक-दो चुनाव पहले तक जिस वैचारिक खुर्दबीन के सहारे या सामुदायिक हितों की कसौटी पर आसानी से वे अपनी पसंद की पार्टी या गठजोड़ को देख-परख लेते थे, उस पर अब अवसरवादिता की मोटी परत चढ़ चुकी है... चुनावी राजनीति का हमारा अनुभव यही कहता है कि जहां दो ध्रुवीय मुकाबला होता है, वहां राजनीतिक दलों को अपने आधार समर्थन को मजबूत करने में आसानी होती है, मगर बहुकोणीय चुनावों में वोटों का विभाजन इतना अधिक होता है कि कोई भी दल या गठबंधन अपने बेहतर प्रदर्शन को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं हो सकता... क्योंकि किसी छोटे समूह का जुडऩा या बिछडऩा कई विधानसभा क्षेत्रों की जीत-हार को प्रभावित करने लगा है... फिर उत्तर भारतीय राज्य, जहां जातिवादी, सांप्रदायिक तत्व समाज में प्रभावी स्थिति में हैं, चुनाव-दर-चुनाव राजनीतिक पंडितों की भी कड़ी परीक्षा लेने लगे हैं... ऐसे में, रामविलास पासवान की लोजपा के एनडीए से बाहर जाने या फिर महागठबंधन से एक छोटे साथी दल के निकलने के फायदे-नुकसान का आंकलन अभी किसी के लिए आसान नहीं होगा... नि:संदेह, लोजपा ने एक बड़ा दांव खेला है... यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि चुनाव के बहाने उसकी नजर राज्य में पार्टी के आधार को विस्तार देने की है, बल्कि चुनाव बाद की स्थिति में अपनी भूमिका को लेकर भी वह मुखर है...
दृष्टिकोण
चुनौती के बीच सुखद नतीजे...
वैश्विक महामारी कोरोना के समय में नामी शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश हेतु परीक्षा के सुखद नतीजे आश्वत सकते हैं कि चुनौतियां कितनी ही बड़ी क्यों न हो..? उनका समाधान संभव है... आईआईटी के लिए महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा के परिणामों की घोषणा बहुत सुखद और उत्साहजनक है... गत दिनों सोमवार को जेईई एडवांस्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया गया, जिसमें पूरे देश से कुल 43,204 छात्रों ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए योग्यता हासिल कर ली... कुल 1,50,838 छात्र इस परीक्षा में बैठे थे... इस बार सफल होने वालों में लड़कियों की संख्या 6,707 है... अर्थात इंजीनियरिंग का क्षेत्र अभी भी लड़कियों के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है... मोटे तौर पर आईआईटी में यदि सात लड़के पढ़ते हैं, तो महज एक लड़की... यह अनुपात नि:संदेह सुधरना चाहिए... बहरहाल, ये नतीजे इसलिए भी ज्यादा खुशी दे रहे हैं, क्योंकि इस सत्र में पढ़ाई पहले ही दो महीने से ज्यादा पिछड़ चुकी है... कोरोना ने पढ़ाई व शिक्षण सत्र का बड़ा नुकसान किया है... आईआईटी में प्रवेश के लिए देशभर के योग्यतम छात्र-छात्राएं सपना देखते हैं, खूब मेहनत करते हैं, लेकिन पिछले दिनों हुई देरी से छात्रों, अभिभावकों और यहां तक कि शिक्षण संस्थानों में भी चिंता की लहर थी... अब जैसे ही नए सत्र की शुरुआत होगी, तो भारत के टॉप शिक्षण संस्थानों में रौनक लौट आएगी... देश के विकास और शिक्षण-प्रशिक्षण में रफ्तार के लिए आईआईटी जैसे अग्रणी संस्थानों में नए सत्र का शुरू होना इस वक्त की एक बड़ी जरूरत है... आईआईटी प्रवेश के लिए आए परिणाम साफ संकेत करते हैं कि भारत में होनहार विद्यार्थियों की कोई कमी नहीं है... आईआईटी बॉम्बे जोन के चिराग फालोर जेईई एडवांस्ड 2020 में कॉमन रैंक लिस्ट में टॉपर रहे हैं। उन्होंने 396 में से 352 अंक प्राप्त किए हैं... रुड़की जोन की कनिष्का मित्तल लड़कियों में टॉपर रही हैं...