ईमानदारी
   Date07-Oct-2020

prernadeep_1  H
प्रेरणादीप
वि द्यार्थी जीवन में एक बार गोपालकृष्ण गोखले के कक्षाध्यापक ने एक कठिन प्रश्न पूछा। प्रश्न थोड़ा कठिन था, इसलिए कोई विद्यार्थी उसे हल नहीं कर पा रहा था। मात्र गोपालकृष्ण गोखले ही ऐसे विद्यार्थी थे, जिन्होंने उसका सही उत्तर बताया। इससे प्रसन्न होकर कक्षाध्यापक ने उन्हें पुरस्कृत करने का निर्णय लिया। पुरस्कार प्राप्त करते समय उन्होंने कक्षाध्यापक से कहा- 'गुरुजी! इस पुरस्कार का वास्तविक अधिकारी मैं नहीं हूँ। मैंने किसी और से पूछकर यह उत्तर बताया था। इसलिए यह पुरस्कार उसे ही मिलना चाहिए।Ó अध्यापक महोदय ने गोपाल के इस साहस की बहुत प्रशंसा की और बोले- 'अब यह पुरस्कार तुम्हें तुम्हारी ईमानदारी के लिए दिया जा रहा है।Ó