मानवता को बचाने का युद्ध...
   Date22-Oct-2020

vishesh lekh_1  
देश-दुनिया में अलग-अलग कालखंड में अलग-अलग तरह के युद्ध होते रहे हैं... कभी युद्ध दूसरों की जमीन को हथियाने के लिए तो कभी अपनी जमीन बचाने के लिए तो होता ही है, लेकिन अनेक बार मजबूरी में भी युद्ध करना या झेलना पड़ता है... क्योंकि स्वयं के स्वाभिमान को बचाए रखने के लिए... लेकिन मानवता को बचाने के लिए जब युद्ध जैसी स्थितियों का सामना करना पड़े, तब समझा जाना चाहिए कि स्थिति किस तरह की विकट है और इसमें किस तरह से हर व्यक्ति का सहयोग हर हाल में जरूरी है... उसके बिना यह युद्ध जीता नहीं जा सकता... संभवत: वैश्विक महामारी कोरोना के कारण देश-दुनिया जिस तरह से इस घातक वायरस से दो चार हो रही है, उसकी गंभीरता को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समझ लिया है... तभी तो उन्होंने बिना विलंब किए सातवीं बार देशवासियों को संबोधित किया... यह उनका संबोधन हर बार के संबोधन से कुछ अलग था...क्योंकि उन्होंने देशवासियों से आव्हान किया है कि जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं... यानी कोरोना वैक्सीन फरवरी में आएगी या उसके बाद... लेकिन उसके इंतजार या उसकी खुशखबरी में हम लापरवाही बिल्कुल नहीं बरत सकते... क्योंकि एक भी व्यक्ति की थोड़ी सी ढील उसके स्वयं के, उसके परिवार के, समाज के, राज्य व देश तक के लोगों को प्रभावित करने का कारण बन जाती है... यानी शत् प्रतिशत सतर्कता के जरिये ही इस कोरोना महामारी को हराने में सफल होंगे... अत: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रामचरित मानस में उल्लेखित 'रिपु रूज पावक पाप प्रभु अहि गगिअ न छोट करिÓ अर्थात् आग, शत्रु, पाप यानी गलती और बीमारी इन्हें कभी छोटा नहीं समझना चाहिए... प्रधानमंत्री का इसके जरिये लोगों से कहने का भाव यही था कि कोरोना का स्थायी उपचार अभी सामने नहीं आया है... इसलिए यह बीमारी रह रहकर प्रकट हो रही है... इसके लिए उन्होंने यूरोप में कोरोना के मामले पुन: बढऩे का भी उदाहरण पेश किया... अमेरिका-चीन और अन्य देशों में किस तरह से कोरोना नियंत्रित होने के बाद पुन: विकराल रूप धारण कर रहा है... इसको ध्यान में रखकर प्रत्येक भारतीय को नियमित रूप से मास्क लगाने, शारीरिक दूरी का पालन करने और हाथ धोने के साथ ही स्वच्छता के मापदंडों का घर से लेकर सार्वजनिक स्थल तक पालन करने से ही कोरोना को हराना संभव है... कहने का तात्पर्य यही है कि अभी त्योहारों के दिन आ चुके हैं... ऐसे में बाजार में भीड़ का उमडऩा, खाद्य पदार्थों व अन्य वस्तुओं का बाहर से घरों में ज्यादा आना स्वाभाविक है... ऐसे में यह वायरस ऐसी ही आपाधापी को अपने प्रसार का जरिया बना सकता है... जरूरत है कि हम अपने स्वयं के, परिवार के, समाज के, राष्ट्र के हितों को ध्यान में रखकर स्वयं को स्वस्थ रखते हुए राष्ट्र को स्वस्थ और कोरोना मुक्त बनाने के संकल्पों के साथ अगर कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करेंगे तो हर हाल में इस युद्ध में मानवता को बचाने का सपना साकार होगा...
दृष्टिकोण
चुनाव पूर्व बिहार के अनुमान...
देश की सत्ता में उत्तर प्रदेश के बाद बिहार की निर्णायक भूमिका रहती है... क्योंकि वह सीटों के मान से नहीं, आबादी के मान से भी महाराष्ट्र के बाद बड़ा राज्य माना जाता है... बिहार पर हर किसी की निगाहें इसलिए भी रहती है, क्योंकि उद्योग, धंधे, रोजगार, आबादी और उत्पादन के मान से भी इस राज्य की बहुत सारी समस्याएं, विशेषताएं उसे लगातार चर्चा में बनाए रखती है... आज बिहार के श्रमिक, मजदूर और कुशल कामगार देश के सभी राज्यों में मिल जाएंगे... ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आगामी नवंबर में सत्ता के मान से क्या भविष्य होगा..? यह तो नतीजों के बाद ही पता चलेगा, लेकिन सीएसडीएस-लोक नीति के ओपिनियन पोल में एक बार पुन: नीतीश के नेतृत्व में भाजपानीत राजग गठबंधन को सत्ता में वापसी करते हुए बताया जा रहा है... लेकिन इस बार स्थिति पिछले चुनाव जैसी नहीं है... नीतीश की पहचान सुशासन बाबू के रूप में हुई है, लेकिन कोरोना काल के बाद जिस तरह से बिहारी श्रमिकों ने देशभर से पलायन करके बिहार में आमद दर्ज कराई, इसके बाद स्थिति नीतीश के जदयू की ही नहीं, भाजपा के लिए भी थोड़ी कठिन हो चुकी है... ऐसे में ओपिनियन पोल में मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश को 31 तो तेजस्वी यादव को 27 फीसदी लोग पसंद कर रहे हैं... जिसका वोटों के समीकरण से असर जरूर दिखेगा... हालांकि नीतीश राजग के खाते में 133 से 143 सीटें लाने में सफल होते दिख रहे हैं, जबकि महागठबंधन को 88 से 98 सीटें मिल रही है... यानी अनुमान के मान से फिर नीतीश वापसी कर रहे हैं...