राजपूत व सिलावट ने दिए त्यागपत्र
   Date22-Oct-2020

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भोपाल द्य उपचुनाव से पहले मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार के दो मंत्रियों सांवेर से भाजपा प्रत्याशी तुलसी सिलावट और गोविंदसिंह राजपूत को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। जल संसाधन मंत्री सिलावट ने अपना इस्तीफा एक दिन पहले ही मंगलवार शाम को मुख्यमंत्री को भेज दिया था। वहीं, राजपूत ने बुधवार को राज्यपाल को इस्तीफा भेज दिया है। मंत्री पद जाने के साथ ही उन्हें मिलने वाली सभी सुविधाएं छिन गई हैं। दरअसल, सिलावट और राजपूत ने कांग्रेस और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद 21 अप्रैल को भाजपा की सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली थी। संवैधानिक नियम के अनुसार, गैर विधायक अधिकतम 6 माह तक ही मंत्री रह सकते हैं।
ऐसे में दोनों को 21 अक्टूबर से पहले विधानसभा का सदस्य बनना जरूरी था।
त्याग और समर्पण मेरी भावना- सिलावट
मंत्री पद छोडऩे के बाद बुधवार को चुनाव-प्रचार में निकले सिलावट ने कहा कि मेरे मंत्री पद को बुधवार को 6 महीने हो रहे हैं। मैंने कल ही इस्तीफा दे दिया। पद मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं है। मेरे लिए सेवा, मप्र का विकास और प्रगति महत्वपूर्ण है। मैंने पहले भी कांग्रेस छोड़ी, विधायक और मंत्री पद छोड़ा, अभी भी इस्तीफा दे दिया। त्याग-समर्पण मेरी भावना है। मेरा क्षेत्र पहले है, इसलिए कुर्बानी करना मेरे लिए जरूरी है। मेरे क्षेत्रवासियों की सेवा करना ज्यादा जरूरी है। मंत्री पद महत्वपूर्ण है, लेकिन सेवा बिना मंत्री पद के भी की जा सकती है।
फिर जीतूंगा, फिर मंत्री बनूंगा- राजपूत
शिवराज सरकार में मंत्री गोविंदसिंह राजपूत ने इस्तीफा देने के सवाल पर कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया है जिसके तहत 6 महीने के अंदर चुनाव लडऩा पड़ता है लेकिन कोरोना महामारी की वजह से चुनाव टल गए थे। आज मेरा कार्यकाल खत्म हो रहा है, इसलिए राज्यपाल महोदय को इस्तीफा भेज दिया है। अब सुरखी की जनता के बीच उनके आशीर्वाद से फिर जीतूंगा, फिर मंत्री बनूंगा और क्षेत्र के विकास के लिए काम करूंगा। जब उनसे पूछा गया कि वह कितने वोटों से जीतेंगे तो उनका जवाब था कि जीत आने वाली जनता है लेकिन पिछली बार से ज्यादा आंकड़े बढ़ेंगे।