उम्मीदवार के अधिकार से बड़ा लोगों के जीने का हक
   Date22-Oct-2020

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मध्यप्रदेश में विधानसभा उपचुनाव में उमड़ रही चुनावी भीड़ पर हाईकोर्ट नाराज, कहा-
ग्वालियर / भोपाल
चुनावी रैलियों में मास्क-दो गज की दूरी जैसे नियमों की अनदेखी और भीड़ पर अदालत और चुनाव आयोग, दोनों ने सख्ती दिखाई है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बेलगाम रैलियों के मद्देनजर कांग्रेस नेता कमल नाथ और भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने ऐसी रैलियों पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा संविधान ने उम्मीदवार और मतदाता दोनों को अधिकार दिए हैं। उम्मीदवार को चुनाव प्रचार का अधिकार है, तो लोगों को जीने और स्वस्थ रहने का हक है। उम्मीदवार के अधिकार से बड़ा लोगों के स्वस्थ रहने का अधिकार है। मध्यप्रदेश की ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने दतिया के भांडेर में कमल नाथ और ग्वालियर में नरेंद्रसिंह तोमर की रैली को अपने फैसले का आधार बनाया। इन रैलियों में कोरोना-19 की गाइड लाइन के उल्लंघन को लेकर एडवोकेट आशीष प्रताप सिंह ने याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने इसी पर फैसला सुनाया। ग्वालियर और दतिया कलेक्टर से दो दिन में रिपोर्ट भी मांगी है। जस्टिस शील नागू और जस्टिस राजीव कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने आदेश में कहा- राजनीतिक दलों की वर्चुअल मीटिंग अगर नहीं हो पा रही है तो ही सभा और रैलियां हो सकेंगी। इसके लिए चुनाव आयोग की इजाजत लेनी होगी। संविधान ने उम्मीदवार और मतदाता दोनों को अधिकार दिए हैं। उम्मीदवार को चुनाव प्रचार का अधिकार है तो लोगों को जीने के साथ-साथ स्वस्थ रहने का अधिकार है। उम्मीदवार के अधिकार से बड़ा लोगों के स्वस्थ रहने का अधिकार है। मौजूदा हालात में राजनेताओं को लोगों के लिए उदारता दिखानी चाहिए थी, लेकिन उनके व्यवहार से ऐसा नजर नहीं आ रहा। सभाओं में सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन नहीं हो रहा है। पार्टियों को रैली और सभाओं के लिए इजाजत लेनी होगी। ये भी बताना होगा कि वर्चुअल सभा क्यों नहीं हो सकती है। कलेक्टर अगर जवाब से संतुष्ट होते हैं तो ऑर्डर पास करेंगे और मामला चुनाव आयोग को भेजा जाएगा।