मुसलमानों को उचित सलाह...
   Date21-Oct-2020

vishesh lekh_1  
इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि विश्व में मुसलमानों के मान से भारत से ज्यादा सुरक्षित देश कोई नहीं हो सकता...इस बात के अनेक उदाहरण बार-बार सामने आते रहे हैं...आजादी के पहले और आजादी के बाद भी जिस तरह से मुस्लिमों से राष्ट्रभक्त लोगों ने अपने धर्म, परिवार और समाज से इतर देश को पहले पायदान पर रखा...ऐसे प्राण न्यौछावर करने वाले मुस्लिमों की भी भारत में कमी नहीं है...लेकिन एक धड़ा ऐसा भी है, जो इन्हें लगातार इनके लक्ष्य व उद्देश्य से कट्टरपंथी सोच विकसित करके भटकाने का काम करता है...ऐसी जमात में ओवैसी से लेकर आजम खान और बुखारी जैसे वे तमाम मुल्ला-मौलवी भी शामिल हैं, जो अनेक बार कट्टरपंथी सोच के जरिए मुस्लिमों को दिशाभ्रमित करते रहते हैं...भारत में लंबे समय तक मुस्लिमों को किसको वोट देना है..? किसको वोट नहीं देना है..? इसके लिए फतवे जारी किए जाते रहे...आखिर इन फतवों के पीछे का सच कभी तो सामने आना ही था...जिन इमाम बुखारी ने लगातार दिल्ली में बैठकर देशभर के मुस्लिमों के लिए चुनावी फतवे जारी किए, वे अपने ही दामाद को चुनाव में जितवा नहीं पाए थे...इसलिए अब चुनाव में मुस्लिमों के लिए जारी होने वाले फतवों के कोई मायने नहीं रह गए...ठीक इसी तरह से डॉ. अब्दुल कलाम से लेकर ऐसे अनेक राष्ट्रभक्त मुस्लिम आज भी भारत में हैं, जो अपने मुस्लिम कौैम को राष्ट्रहित में प्रेरित करने का काम कर रहे हैं...अगर बिहार चुनाव के मद्देनजर चुनावी सभा में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन यह कहते हैं कि मुसलमान के लिए हिन्दुस्तान से अच्छा कोई देश नहीं..,हिन्दू से अच्छा कोई दोस्त नहीं और मोदी से अच्छा कोई प्रधानमंत्री नहीं...तो इसके मायने यही हैं कि भले ही सीएए जैसे मामलों में मुस्लिमों को भड़काने का काम कुछ लोग करते रहे हो..,लेकिन वास्तविकता में मुस्लिमों में कट्टरपंथी सोच और रूढ़ीवादी परंपराओं को सुधार कर उन्हें मुख्यधारा में लाने का प्रयास इन 5-6 सालों में मोदी सरकार ने बहुत तेजी से किया है...तीन तलाक को लेकर आखिर फायदा किसे होगा..? मुस्लिम महिलाओं को ही न..,फिर इसे मुस्लिम विरोधी कोई कैसे बता सकता है...सीएए भारत से बाहर के लोगों को नागरिकता देता है...भारतीय मुस्लिमों को भारत से बाहर नहीं करता..,लेकिन कुछ लोगों ने सीएए को लेकर भी मुस्लिमों को दिशाभ्रमित किया...देशभर में शाहीन बाग जैसा अराजक माहौल खड़ा करने की खुराफात हुई...लेकिन अगर गंभीरता से मुस्लिम वर्ग और उनके बुद्धिजीवी पैरोकार विचार करेंगे.., शाहनवाज हुसैन की बातों पर गौर फरमाएंगे तो उन्हें पता चल जाएगा कि बिहार और इसके बाद पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव मुस्लिमों के लिए निर्णायक हैं...इस मान से कि वे अपने परिवार की सुरक्षा के लिए एक ऐसे दल व नेता को चुने, जो सबको साथ लेकर चलने का भरोसा दिला सके....संभवत: इन 5-6 वर्षों में सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास से मुस्लिमों का भाजपा के प्रति विश्वास बढ़ा ही है...
 
 
दृष्टिकोण
चीन को आस्ट्रेलिया का भी झटका...
विस्तारवादी और वर्चस्ववादी सर्वभक्षी चीन के हर तरह के हथकंडे विफल हो रहे हैं..,क्योंकि वैश्विक महामारी कोरोना के जनक चीन के खिलाफ पूरा विश्व लामबंद हो रहा है...चीन की खुराफातों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह कोरोना के मामले में ध्यान भटकाने और वैश्विक मुद्दा कोरोना के बजाय सीमा विवाद के रूप में सामने ला रहा है...तभी तो वह कभी हांगकांग में दमन चक्र चलाता है तो कभी वियतनाम के खिलाफ खड़ा होने की हरकत करता नजर आता है...तो कभी अमेरिका द्वारा तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए उसके राजनयिक को पहली बार महत्व देने पर नाक, भौ सिकोड़ता है...इधर भारत में तो चीन पूर्वी लद्दाख, गलवान घाटी, अरुणाचल आदि में घुसपैठ की 6 माह से लगातार हरकतें जारी रखे हुए है...लेकिन इसके बाद भी विश्व इस बात को मानकर चल रहा है कि कोरोना की महामारी के लिए चीन की जवाबदेही सुनिश्चित होना चाहिए...ऐसे में अनेक यूरोपीय देश भी उसके खिलाफ खड़े होते नजर आ रहे हैं...चीन के खिलाफ उसके प्रभुत्व बढ़ाने की रणनीति को उस समय झटका लगा, जब भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया के 'क्वाडÓ की उस समय मजबूती स्थिति बन गई, जब आस्ट्रेलियाई सेना ने मालाबार में होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास में भारत-अमेरिका के साथ सहभागिता करने का निर्णय लिया...चीन इसके खिलाफ लगातार प्रयास कर रहा था..,यह युद्ध सैन्य अभ्यास भारत, अमेरिका की नौसेनाओं के बीच 1992 में शुरू हुआ था...2015 में इसमें जापान शामिल हुआ था...अब आस्ट्रेलिया ने भी चीन को झटका दे दिया है...