मर्यादा ताक पर रखते कमल नाथ...
   Date20-Oct-2020

vishesh lekh_1  
वैसे तो कांग्रेस और विवाद का चोली-दामन जैसा साथ है... क्योंकि कांग्रेस के अर्श से लेकर फर्श तक के नेता और कार्यकर्ता कभी भी सारी सीमाएं लांघकर इस तरह से वाचाल हो जाते हैं कि उन्हें पता ही नहीं रहता कि वे जो बोल रहे हैं, उसका कितना घातक संदेश समाज और देश में जाएगा... विवादित बयान देते वक्त कांग्रेस के नेता स्वयं की छवि का तो ख्याल रखते ही नहीं हैं, बल्कि वे संवैधानिक मर्यादाएं, समाज व राष्ट्र के लिए आवश्यक अनुशासन और नियम-संयम के वे सभी मानबिन्दु भुला देते हैं, जिनका उन्हें बड़े ही तरीके से पालन करना चाहिए... संवैधानिक पद पर बैठे विरोधी दल के नेताओं की भी हद दर्जे वाली मानसिकता के साथ उपहास उड़ाना, आरोप लगाना कांग्रेसियों का परंपरागत या कहें नियमित शगल है... इसलिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमल नाथ सारी मर्यादाओं को ताक पर रखकर विधानसभा चुनाव में जो बयानबाजी उनकी ही पार्टी में मंत्री, विधायक रहे लोगों के खिलाफ कर रहे हैं, इससे इतना तो पता चलता है कि सत्ता छूटते या दूर होते ही कांग्रेस का छोटा-बड़ा नेता ही नहीं, लंबे समय तक सांसद रहे, केन्द्र में मंत्री रहे, यहां तक कि दो-दो बार मुख्यमंत्री रहे लोग भी सारा आपा खो देते हैं... जब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व केन्द्रीय मंत्री से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्री आएदिन कांग्रेस को मुश्किलों में डालने से नहीं चूकते हैं, तब कमल नाथ के इस बयान को भी उसी श्रेणी में देखा जाना चाहिए, जहां संवैधानिक मर्यादाओं और समाज-राष्ट्र के लिए आवश्यक अनुशासन को कांग्रेस में हमेशा परे रखा गया है... याद करें छह महीने से लगातार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी चीन के प्रवक्ता बनकर भारत के खिलाफ बयानबाजी का कोई मौका नहीं गंवा रहे हैं... अंतरराष्ट्रीय मंच पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर कोरोना के मामले में भारत की तैयारियों की तुलना में पाकिस्तान को बेहतर बताने का हास्यास्पद तर्क रख रहे हैं... दिग्विजय सिंह तो आएदिन हिन्दू विरोधी अपनी मानसिकता का परिचय देने से बाज नहीं आते... ऐसे में अगर कमल नाथ उनकी सरकार में मंत्री रही और अब भाजपा के प्रत्याशी के रूप में डबरा से चुनावी मैदान में डटी इमरती देवी के खिलाफ कमल नाथ का इतनी हल्की भाषाशैली में अपनी सत्ता जाने का दुखड़ा रोना और उन्हें 'आइटमÓ बताना सही मायने में पूरे नारी समाज का खुला अपमान है... आखिर क्या कमल नाथ ने मातृशक्ति को एक निर्जीव उत्पाद समझ लिया है... जो वे उन्हें आइटम की श्रेणी में रख रहे हैं... प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे ऐसे नेता के मुख से महिलाओं के प्रति इतनी हल्की शब्दावली सही मायने में पूरे प्रदेश का भी अपमान है... ये वे ही कमल नाथ हैं, जिन्होंने हवाला कांड के बाद अपनी पत्नी को चुनाव तो लड़वाया, लेकिन उन्हें पुन: इस्तीफा देने के लिए भी मजबूर किया था... अत: उनकी महिलाओं के प्रति सोचने-समझने की मानसिकता अपने आप परिलक्षित हो जाती है...
दृष्टिकोण
महामारी को लेकर दावे...
वैश्विक महामारी कोरोना वैसे तो अभी भी विश्व के सभी देशों को पसोपेश में डाले हुए है... क्योंकि इस कोरोना महामारी में पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से घायल किया है... बाजार की पूरी प्रक्रिया ध्वस्त होने का असर अर्थव्यवस्था पर देखा जा सकता है... लेकिन अब जो दावे विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों और वैक्सीन तैयार करने में जुटी संस्थाओं के वरिष्ठ चिकित्सकों ने किए हैं, उससे इस कोरोनाकाल की आफतभरी स्थितियों में कुछ राहत के संकेत मिलने लगे हैं... कोरोना वायरस के फरवरी में नियंत्रण में आने के जो दावे रविवार को किए गए, इससे इस बात का बल मिलता है कि या तो ठंड के बाद कोरोना पस्त हो जाएगा या इसके पूर्व ही इस घातक महामारी के लिए वैक्सीन (टीका) तैयार हो जाएगा... दोनों में से जो भी स्थिति बनेगी, उससे परेशान विश्व को राहत मिलना तय है... भारत में अब तक 30 फीसदी आबादी कोरोना के संक्रमण में आ चुकी है... जबकि सीरो सर्वे में यह आंकड़ा महज 7 फीसदी था, लेकिन अगस्त अंत तक ही 14 फीसदी से अधिक संक्रमित हो चुके... फिर भी 75 लाख से अधिक कुल कोरोना संक्रमितों में से 65 लाख से अधिक का स्वस्थ होना विश्व के सामने भारत की तरफ से एक बड़ी सफलता के रूप में भी देखा जा रहा है... क्योंकि भारत में घनी आबादियां एवं ग्रामीण-शहरी आबादी के बीच संसाधनों का असंतुलन इस रोग की भयावहता का संकेत कर रहा था... लेकिन भारतीय जनमानस में सरकार के नियमों-कानूनों का पालन करते हुए कोरोना के खिलाफ एक बेहतर लड़ाई अब तक लडऩे में सफलता पाई है...